Chhattisgarh Liquor Scam: ED की बड़ी कार्रवाई, कांग्रेस नेता Ramgopal Agarwal गिरफ्तार, ₹2,883 करोड़ के घोटाले की जांच तेज

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अभिनय आकाश । Aug 11 2026 4:52PM

बिज़नेसमैन अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की अगुवाई वाले शराब सिंडिकेट ने कथित तौर पर 2019 और 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में हेरफेर किया। ED का दावा है कि इस नेटवर्क ने शराब की खरीद की बढ़ी हुई दरों, बिना हिसाब-किताब वाली शराब के अवैध उत्पादन और चुनिंदा कंपनियों को दिए गए FL-10A लाइसेंस के ज़रिए कमीशन वसूलकर 2,883 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध कमाई की।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। ED के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने इस मामले में पूछताछ के बाद अग्रवाल को गिरफ्तार किया, जो चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक बड़ी कार्रवाई है। यह कदम ED द्वारा इस मामले में 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति अटैच करने के लगभग दो महीने बाद उठाया गया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 28 मई को जारी तीन प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के बाद की गई थी, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये की डीड वैल्यू और 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अनुमानित मार्केट वैल्यू वाली संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। ED ने कहा कि यह जांच रायपुर के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग और एंटी-करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) द्वारा दर्ज FIR से जुड़ी है।

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एजेंसी के अनुसार, "बिज़नेसमैन अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की अगुवाई वाले शराब सिंडिकेट ने कथित तौर पर 2019 और 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में हेरफेर किया। ED का दावा है कि इस नेटवर्क ने शराब की खरीद की बढ़ी हुई दरों, बिना हिसाब-किताब वाली शराब के अवैध उत्पादन और चुनिंदा कंपनियों को दिए गए FL-10A लाइसेंस के ज़रिए कमीशन वसूलकर 2,883 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध कमाई की।

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संपत्ति ज़ब्त करने का पहला आदेश विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों से संबंधित है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि अग्रवाल ने मुख्य वित्तीय हैंडलर के तौर पर काम किया, डिस्टिलरी और लाइसेंस धारकों से कमीशन इकट्ठा किया और उस पैसे को ढेबर तक पहुँचाया। अग्रवाल के परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों को उनकी कथित अवैध कमाई के बराबर ज़ब्त किया गया है।

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