'100% टैरिफ की धमकी से नहीं डगमगाएगी भारतीय अर्थव्यवस्था'! MEA बोला- देश के उद्योगों और व्यापारिक हितों की करेंगे रक्षा!

अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के लिए पारित किए गए नए कानून ('लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026') के बीच भारत ने अपना रुख बेहद सख्त और स्पष्ट कर दिया है।
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के लिए पारित किए गए नए कानून ('लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026') के बीच भारत ने अपना रुख बेहद सख्त और स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत सरकार देश के व्यापारिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और 1,400,000,000 (1.4 अरब) नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। इस बिल से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाता है, अगर वे रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे विश्व के ताकतवर नेता बन गए? उनके गूढ़ राजनीतिक गुणों के बारे में जानिए
मंत्रालय ने कहा कि हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने साफ तौर पर बताया है कि इस कानून का द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ सकता है। मंत्रालय ने कहा, "भारतीय पक्ष ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना संकल्प भी साफ कर दिया है।" साथ ही कहा कि वह अमेरिकी कदम के असर से निपटने के लिए व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा।इसे भी पढ़ें: Donald Trump के 'टैरिफ बम' पर भारत का करारा जवाब! MEA की दहाड़- एक अरब चालीस करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा से रत्ती भर समझौता नहीं!
बुधवार को अमेरिकी हाउस ने 262-159 वोटों से यह कानून पास किया, जिसका आधिकारिक नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' है।
यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं। हाउस में बहस के दौरान भारत और चीन की खास तौर पर उन बड़े खरीदारों के तौर पर पहचान की गई जिन पर इसका असर पड़ सकता है।
यह बिल पिछले महीने ही अमेरिकी सीनेट से 86-11 वोटों से पास हो चुका है और अब यह व्हाइट हाउस जाएगा, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस पर साइन करके इसे कानून बनाने की उम्मीद है।
इस कानून का मकसद यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसके लिए रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ टैंकरों के तथाकथित "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) को निशाना बनाया जाएगा, जिन पर मॉस्को को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। इसमें ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी है।
यह बिल भारत को कैसे प्रभावित कर सकता है?
कानून में भारत का नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय सामान पर 100% टैरिफ लगा दिया गया है। इसके बजाय, यह बिल ट्रंप को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देगा जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं, बशर्ते संबंधित प्रावधान लागू हों। यह प्रावधान भारत के लिए अब भी अहम है क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बना हुआ है।
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों ने जब ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के तौर-तरीकों को बदला, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल और भी अहम हो गया। अमेरिका ने रूसी एनर्जी खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की है। उसका तर्क है कि तेल और गैस से होने वाली कमाई मॉस्को को युद्ध के लिए फंड का एक अहम ज़रिया देती है।
अगर वॉशिंगटन इस कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता है, तो इसका असर मुख्य रूप से अमेरिका को होने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर पड़ेगा। 100 प्रतिशत तक का टैरिफ अमेरिकी बाज़ार में भारतीय उत्पादों की लागत को तेज़ी से बढ़ा सकता है, जिससे उनकी कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) पर असर पड़ सकता है।
Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi
अन्य न्यूज़














