'Mind Games' या Delimitation की चाल? Congress का PM Modi सरकार पर गंभीर आरोप

Jairam Ramesh
ANI
अंकित सिंह । Sep 11 2026 2:42PM

कांग्रेस ने संसद सत्र के सत्रावसान में असामान्य देरी को मोदी सरकार की 'साजिश' बताया है, आरोप है कि गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी ने इस देरी को रिकॉर्ड तोड़ते हुए 29 दिन तक खींचने पर सवाल उठाए हैं, जबकि आमतौर पर यह अंतर तीन से चार दिन का होता है। सरकार पर सर्वदलीय बैठक से इनकार कर गोपनीयता बरतने का भी आरोप लगाया गया।

शुक्रवार को कांग्रेस ने संसद के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद भी सत्र का सत्रावसान (proroguing) न करने में हुई देरी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उसने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास कराया जा सके।

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कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार परिसीमन प्रस्तावों पर व्यापक आम सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों इनकार कर रही है। उन्होंने पूछा कि भारतीय गणराज्य के मूल सिद्धांतों के लिए इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर गोपनीयता और रहस्य क्यों बरता जा रहा है। हालांकि, 'अनिश्चित काल के लिए स्थगन' (adjournment sine die) से सदन की बैठक तो खत्म हो जाती है और दोबारा मिलने की कोई तारीख तय नहीं होती, लेकिन सत्र कानूनी तौर पर खुला रहता है। जब तक राष्ट्रपति औपचारिक रूप से सत्र का सत्रावसान (prorogation) नहीं करते, तब तक तकनीकी रूप से सदन सत्र में ही माना जाता है।

X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि तो आज मोदी सरकार ने 2015 में बनाए अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है। संसद के अनिश्चित काल के लिए स्थगन और उसके सत्रावसान के बीच का अंतर 29 दिन हो गया है। 2015 के मॉनसून सत्र के दौरान यह अंतर 28 दिन का था। उन्होंने कहा कि मॉनसून सत्र के लिए यह अंतर दिन-ब-दिन बढ़ रहा है और जल्द सत्रावसान की कोई साफ संभावना नहीं दिख रही है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आम तौर पर यह अंतर सिर्फ़ तीन से चार दिन का होता है।

रमेश ने कहा कि यह बिल्कुल साफ़ है कि 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में अपने ज़बरदस्त अहंकार के कारण खुद को और अपनी सरकार को जो करारी हार उन्होंने दी थी, उससे केंद्रीय गृह मंत्री बुरी तरह आहत हुए थे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि वह अब लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत (जो कि पूरी तरह दागदार होगा) हासिल करके वापसी की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने उन तीन पार्टियों में पहले ही फूट डाल दी है जिन्होंने 17 अप्रैल, 2026 को बिल के खिलाफ वोट किया था और वे दूसरों (जिन्होंने भी बिल के खिलाफ वोट किया था) को अपना रुख बदलने के लिए धमकाने, डराने और लालच देने का तरीका अपना रहे हैं।

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कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि गृह मंत्री के पास जरूरी संख्या बल नहीं है, लेकिन उनकी "डींगें हांकने, झांसा देने और शेखी बघारने" की आदत उन्हें साफ दिख रही सच्चाई को समझने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र को खत्म न करके, खुद को चाणक्य समझने वाले नेता को लग सकता है कि वह माइंड गेम्स खेल रहे हैं और मनोवैज्ञानिक दांव-पेच (psy-ops) अपना रहे हैं। लेकिन यह बेवकूफी है क्योंकि सरकार किसी भी मकसद के लिए जब चाहे सत्र बुला सकती है।" रमेश ने कहा कि शाह इस उम्मीद में सस्पेंस बनाए हुए हैं कि विपक्ष घबरा जाएगा, और कहा कि गृह मंत्री अपनी ख्याली दुनिया में जीते रह सकते हैं।

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