Europe में Modi की Master Stroke Diplomacy, भारत के पक्ष में खड़ी हुईं Nordic Countries, दुनिया देखती रह गई

भारत और नॉर्वे के बीच आर्थिक सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका है। यह विकसित यूरोपीय देशों के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे और स्वीडन यात्रा ने भारत और नॉर्डिक देशों के बीच तेजी से मजबूत होते रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को नई दिशा दी है। नॉर्वे पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े रहने के लिए नॉर्वे का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, संघर्षों और ध्रुवीकरण के दौर में उन देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करना बेहद आवश्यक है, जिनके साथ लोकतांत्रिक मूल्य और समान हित साझा होते हैं।
हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली द्विपक्षीय यात्रा है और पिछले तैंतालीस वर्षों में भारतीय प्रधानमंत्री स्तर की पहली नॉर्वे यात्रा भी है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्तोरे से विस्तृत बातचीत की।
हम आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने राजा हैराल्ड पंचम और रानी सोन्या से भी मुलाकात की। दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, समुद्री सहयोग और अनुसंधान से जुड़े विषयों पर विचार विमर्श किया।
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हम आपको बता दें कि भारत और नॉर्वे के बीच आर्थिक सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका है। यह विकसित यूरोपीय देशों के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है। इस समझौते के तहत अगले पंद्रह वर्षों में एक लाख करोड़ डॉलर के निवेश और दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने निवेश प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए विशेष ईएफटीए डेस्क भी स्थापित किया है।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में भारत और नॉर्वे के बीच वस्तु व्यापार लगभग एक अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि भारत की सेवा निर्यात आय आठ सौ छिहत्तर मिलियन डॉलर रही। नॉर्वे का सरकारी पेंशन कोष, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा सार्वभौमिक संपत्ति कोष माना जाता है, भारतीय पूंजी बाजार में लगभग तीस अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में यह निवेश और तेजी से बढ़ेगा।
समुद्री क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। कोच्चि शिपयार्ड नॉर्वे के लिए पर्यावरण अनुकूल जहाज तैयार कर रहा है, जबकि गुजरात के पिपावाव शिपयार्ड को भी नॉर्वेजियन कंपनियों से नए आदेश मिले हैं। भारतीय शिपयार्ड अब नॉर्वेजियन जहाज मालिक संघ की कुल ऑर्डर बुक का ग्यारह प्रतिशत हिस्सा संभाल रहे हैं। इसके अलावा भारत और नॉर्वे समुद्री सुरक्षा, ध्रुवीय अनुसंधान, विज्ञान और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी गहरा सहयोग विकसित कर रहे हैं।
अंतरिक्ष और आर्कटिक अनुसंधान में भी दोनों देशों की साझेदारी तेजी से मजबूत हुई है। स्वालबार्ड में इसरो के एंटीना संचालन शुरू होने से भारत की आर्कटिक अनुसंधान क्षमता और सशक्त हुई है। हिमाद्रि अनुसंधान केंद्र में अब तक चार सौ से अधिक वैज्ञानिक कार्य कर चुके हैं। वहीं इंडआर्क समुद्री वेधशाला से प्राप्त आंकड़े भारत में मानसून पूर्वानुमान के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहे हैं। दोनों देश अपतटीय पवन ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन भंडारण, बैटरी प्रौद्योगिकी और आर्कटिक वैज्ञानिक अभियानों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को तीसरे भारत नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जिसमें नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्री शामिल होंगे। वर्ष 2024 में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वस्तु एवं सेवा व्यापार उन्नीस अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। सात सौ से अधिक नॉर्डिक कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जबकि लगभग डेढ़ सौ भारतीय कंपनियां नॉर्डिक देशों में काम कर रही हैं। इस शिखर सम्मेलन में हरित हाइड्रोजन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, छठी पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक, जहाज निर्माण और जलवायु वित्त जैसे विषयों पर विशेष ध्यान रहेगा।
हम आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन यात्रा भी बेहद महत्वपूर्ण रही। भारत और स्वीडन ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ वार्ता के दौरान व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और मानव केंद्रित विकास की मजबूत नींव पर आधारित हैं।
स्वीडन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया। यह सम्मान किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख को दिया जाने वाला सर्वोच्च अलंकरण माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत और स्वीडन के संबंधों को नई ऊंचाई देने और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया। यह प्रधानमंत्री मोदी का 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
स्वीडन यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों की रफ्तार बहुत तेज है और विदेशी कंपनियों के लिए यहां विशाल अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना, हरित ऊर्जा, गहन प्रौद्योगिकी निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य सेवा, शहरी परिवर्तन और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपील की।
स्वीडन के गोटेनबर्ग में भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया। पारंपरिक बंगाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भारतीय तिरंगे के साथ वहां का माहौल पूरी तरह भारतीय रंग में रंगा दिखाई दिया। इस अवसर ने भारत और स्वीडन के बीच सांस्कृतिक जुडाव को भी नई मजबूती प्रदान की।
बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान पांच देशों की विदेश यात्रा को भारत की सक्रिय और दूरदर्शी कूटनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात से लेकर नीदरलैंड, स्वीडन और अब नॉर्वे तक की उनकी यात्राएं यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि भारत वैश्विक मंच पर अपने आर्थिक, सामरिक और तकनीकी साझेदारों के साथ संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया, यूरोप और नॉर्डिक क्षेत्र के देशों के साथ एक साथ संवाद बढ़ाकर भारत ने यह संदेश दिया है कि वह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलित और प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है। ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आर्कटिक अनुसंधान, निवेश और व्यापार जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले समय में भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की उस व्यापक रणनीति को भी दर्शाती है जिसके तहत देश विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित कर रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान की है।
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