MP High Court ने प्री-पैक्ड व्हिस्की और रम पर FSSAI ban पर अंतरिम रोक लगाई

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मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्री-पैक्ड व्हिस्की और रम की बिक्री पर एफएसएसएआई के प्रतिबंधात्मक आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने पाया कि नियामक निकाय ने कंपनी द्वारा दिए गए विस्तृत स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना ही यह प्रतिबंध लागू कर दिया था। इस मामले में केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक शराब निर्माता कंपनी की प्री-पैक्ड व्हिस्की और प्री-पैक्ड रम की बिक्री पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के लगाए प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने पाया कि नियामक निकाय ने अपने कारण बताओ नोटिस पर कंपनी के प्रस्तुत विस्तृत जवाब पर विचार किए बिना ही यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया था। इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज लिमिटेड की याचिका पर छह अगस्त को सुनवाई करते हुए एफएसएसएआई के 29 जुलाई को जारी प्रतिबंधात्मक आदेश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी।

खंडपीठ ने सभी संबंधित पक्षों के तर्क सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी की प्री-पैक्ड व्हिस्की और प्री-पैक्ड रम आबकारी अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के मानकों के अनुरूप हैं, इसलिए अगली सुनवाई तक प्रतिबंधात्मक आदेश पर रोक रहेगी। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया। मामले में अगली सुनवाई सात सितंबर को होनी है।

कंपनी की याचिका में एफएसएसएआई के एक अधिकारी द्वारा 29 जुलाई को जारी आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के तहत खरगोन जिले में कंपनी की इकाई में निर्मित प्री-पैक्ड व्हिस्की और प्री-पैक्ड रम के कुछ बैच की बिक्री को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया था। एफएसएसएआई ने आदेश में प्राथमिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि उत्पादों के लेबल पर ‘कृत्रिम फ्लेवर’ और ‘प्रकृति-सदृश और कृत्रिम (रम) फ्लेवरिंग पदार्थों’ के इस्तेमाल का उल्लेख है जो नियम-कायदों के मुताबिक तय मानकों के विपरीत है और ये उत्पाद ‘अमानक’ की श्रेणी में आते हैं।

कंपनी ने एफएसएसएआई के इस निष्कर्ष पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ‘एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए)’, अनुमत फ्लेवर और रंगों का इस्तेमाल मध्यप्रदेश के आबकारी कानूनों के तहत पूरी तरह वैध है। कंपनी ने एफएसएसएआई के क्षेत्राधिकार को भी चुनौती दी और कहा कि शराब के उत्पादन व विनियमन पर राज्य सरकार का विशेषाधिकार है। अदालत में याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर ने पक्ष रखते हुए कहा कि 20 जुलाई को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में कंपनी ने 27 जुलाई को समयसीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण दाखिल कर दिया था, लेकिन एफएसएसएआई के 29 जुलाई के प्रतिबंधात्मक आदेश में इस जवाब का कोई संदर्भ तक नहीं दिया गया।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने तर्क दिया कि चूंकि कारण बताओ नोटिस के जवाब में प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी गई थी, इसलिए उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि, खंडपीठ ने इस तर्क को असंतोषजनक करार दिया।

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