नेकां ने अधिकारों की लड़ाई को सिर्फ राज्य के दर्जे तक समेटा: सांसद Ruhullah Mehdi

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श्रीनगर में आयोजित हल्ला बोल सम्मेलन में सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पांच अगस्त 2019 को छीने गए संवैधानिक अधिकारों की बहाली की शुरुआत तक नहीं की है। मेहदी ने कहा कि 2024 विधानसभा चुनाव का जनादेश पहचान और अधिकारों की लड़ाई के लिए था, जिससे अब पार्टी पीछे हट रही है।

श्रीनगर, चार अक्टूबर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के खिलाफ बगावती रुख रखने वाले पार्टी सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने रविवार को जम्मू कश्मीर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इसने लोगों के अधिकारों के संघर्ष को केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तक सीमित कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह जनादेश के साथ “विश्वासघात” है। यहां आयोजित पांचवें ‘हल्ला बोल’ सम्मेलन में मेहदी ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पांच अगस्त 2019 को वापस लिए गए लोगों के संवैधानिक अधिकारों को बहाल कराने के लिए संघर्ष शुरू करना तो दूर, अभी तक इसकी शुरुआत भी नहीं की है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस के साथ उनके “अनगिनत” वैचारिक मतभेद हैं, लेकिन उससे एक बात जरूर सीखी जा सकती है कि वह अपने “त्रुटिपूर्ण उद्देश्यों” को हासिल करने के लिए एक आंदोलन जैसे अनुशासनबद्ध तरीके से काम करता है। उन्होंने कहा, “2024 के विधानसभा चुनावों में जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को स्पष्ट जनादेश दिया था कि बाकी सब कुछ छोड़कर अपने दायित्व को पूरा करें। लोगों ने हमें अपनी पहचान और अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ने की जिम्मेदारी दी थी।

इसके लिए उन्होंने हमें जनादेश सौंपा था—एक स्पष्ट जनादेश, जो एक भरोसे के रूप में हमें दिया गया था।’’ श्रीनगर के सांसद ने कहा कि देशभर में लोग सीएए, किसानों से जुड़े मुद्दों, परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने और यहां तक कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने जैसे कई मुद्दों को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हर कोई अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रहा है। और जिसे सबसे बड़ी लड़ाई लड़नी थी, जिसे सबसे मजबूती से शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करना था—वही नेशनल कॉन्फ्रेंस, जनादेश मिलने के बाद, इस लड़ाई से बचने के लिए बहाने बना रही है।’’ लद्दाख और वहां चल रहे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए मेहदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर अपने पूर्ववर्ती क्षेत्र (लद्दाख) की तुलना में अधिक अधिकार-संपन्न था।

उन्होंने कहा, “लद्दाख ने भाजपा के खिलाफ संघर्ष किया और उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया। लेकिन हमने दो वर्षों में इस लड़ाई को क्यों नहीं लड़ना चाहिए, इसके लिए हर संभव बहाना तलाश लिया।” मेहदी ने कहा कि उनका मानना है कि केंद्र की भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल नहीं करेगी, लेकिन अगर ऐसा होता है, तो यह नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए “अपमानजनक” बात होगी।

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