Press Club of India ने CEC विरोध के दौरान पत्रकारों से बदसलूकी की निंदा की

जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मीडियाकर्मियों से पुलिस के दुर्व्यवहार पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कड़ा रोष जताया है। संगठन ने महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस बीच दिल्ली पुलिस ने निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतें अपराध शाखा को सौंप दी हैं।
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के बर्ताव की रविवार को निंदा की और पुलिसकर्मियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। प्रेस क्लब का यह बयान शनिवार को विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाये जाने के एक दिन बाद आया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसे उनकी शिकायतें मिली हैं और उसने ‘‘निष्पक्ष जांच’’ के लिए उन्हें अपराध शाखा को सौंप दिया गया है।
प्रेस क्लब ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया शुक्रवार और शनिवार को जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के बर्ताव और कार्रवाई से स्तब्ध और निराश है।’’ बयान में कहा गया है कि एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने उनके साथ छेड़खानी की और गलत तरीके से छुआ तथा शनिवार रात प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश के दौरान उन्हें संसद मार्ग पुलिस थाने में कई घंटे रूकना पड़ा। प्रेस क्लब ने कहा है कि स्वतंत्र संगठनों और समाचार पोर्टलों के पत्रकारों ने शिकायत की है कि प्रेस कार्ड होने और खुद को मीडियाकर्मी बताने के बावजूद, पुलिस ने उनके साथ आक्रामक व्यवहार किया और कुछ पत्रकारों को तो प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में भी ले लिया गया। बयान के अनुसार, लोकतंत्र में इस तरह के व्यवहार को सामान्य नहीं माना जा सकता तथा पत्रकारों को निर्भिक होकर मुक्त रूप से काम करने दिया जाए।
प्रेस क्लब ने मांग की कि दिल्ली पुलिस महिला पत्रकार की शिकायत पर कार्रवाई करे और यह सुनिश्चित करे कि मीडियाकर्मी बिना किसी हमले या धमकी के अपना काम कर सकें। महिला पत्रकारों ने उक्त आरोप राष्ट्रीय राजधानी में उन विरोध प्रदर्शनों के बीच लगाए, जिनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सीईसी के इस्तीफे की मांग की गई है। शुक्रवार को, आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं आतिशी और सौरभ भारद्वाज समेत 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों और छात्र व युवा संगठनों के सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया।
ये लोग निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षा इंतजामों के तहत मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और 12 मेट्रो स्टेशन पर प्रवेश एवं निकास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। शनिवार को प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर पहुंचे, जहां भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत लगभग 150 लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
रविवार को भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहे। छात्र समूहों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक मार्च का आह्वान किया और पुलिस ने मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी। प्रेस क्लब ने शुक्रवार को जंतर-मंतर और उसके आस-पास इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की भी निंदा की और कहा कि इस कदम से विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों को परेशानी हुई।
प्रेस क्लब ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह मनमाने ढंग से इंटरनेट बंद करने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
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