प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली लागत राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं: तोमर

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महंगाई बढ़ने के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा गरीबों के आवास निर्माण हेतु लागत राशि बढ़ाकर तीन लाख रुपये किए जाने की तर्ज पर केन्द्र सरकार द्वारा भी लागत राशि बढ़ाये जाने संबंधी एक पूरक प्रश्न के उत्तर में तोमर ने कहा कि फिलहाल लागत राशि में इजाफा करने का कोई प्रस्ताव मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन नहीं है।

नयी दिल्ली। केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मकान बनाने के लिए लागत राशि के रूप में लाभार्थी को मिलने वाली रकम में फिलहाल इजाफा करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थी को मैदानी क्षेत्र में 1.20 लाख रुपये और पर्वतीय एवं अन्य गैर-मैदानी क्षेत्रों में लाभार्थी को 1.30 लाख रुपये दिये जाते हैं। इसके अलावामनरेगा योजना के साथ समन्वय करते हुए लाभार्थियों को 90 से 95 दिन का मनरेगा (के तहत) रोजगार तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 हजार रूपये शौचालय निर्माण के लिये दिये जाते हैं। 

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महंगाई बढ़ने के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा गरीबों के आवास निर्माण हेतु लागत राशि बढ़ाकर तीन लाख रुपये किए जाने की तर्ज पर केन्द्र सरकार द्वारा भी लागत राशि बढ़ाये जाने संबंधी एक पूरक प्रश्न के उत्तर में तोमर ने कहा कि फिलहाल लागत राशि में इजाफा करने का कोई प्रस्ताव मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन नहीं है। दिल्ली में इस योजना के तहत मकानों का निर्माण हो जाने के बावजूद उनका आवंटन नहीं होने के बारे में पूछे गये एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में तोमर ने बताया कि दिल्ली में गरीबों के लिये आवास बन कर तैयार हैं। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों की तरह दिल्ली को भी सरकार ने झुग्गी पुनर्विकास, ऋण से जुड़ी सब्सिडी योजना, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के तहत केन्द्रीय सहायता जारी की है। 

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उन्होंने दिल्ली सरकार से इस योजना की तकनीकी बाधाओं को दूर करने का अनुरोध किया, जिससे आवंटन प्रक्रिया शुरु की जा सके। तोमर ने इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 2022 तक 2.95 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य समय से पहले पूरा कर लिये जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में 2015 से 2018 के बीच एक करोड़ मकान बना लिये गये हैं और दूसरे चरण में अगले तीन साल के दौरान 1.95 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य है।

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