प्रदूषण पर काबू के लिए शार्ट-कट तरीका नहीं, सतत प्रयास की जरूरत: जावडेकर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 21, 2019   19:11
प्रदूषण पर काबू के लिए शार्ट-कट तरीका नहीं, सतत प्रयास की जरूरत: जावडेकर

जावड़ेकर ने इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि हर शहर की समस्या के अलग अलग कारण हैं और उन्हें किसी एक तरीके से हल नहीं किया जा सकता।

नयी दिल्ली,राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर विभिन्न दलों द्वारा चिंता जताए जाने के बीच पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि इस समस्या पर काबू के लिए सरकार द्वारा विभिन्न कदम उठाए गए हैं और उसका असर भी हुआ है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर काबू के लिए कोई ‘‘शार्ट-कट’’ तरीका नहीं है और इसके लिए सतत प्रयास करना होगा। उन्होंने हालांकि कहा कि सरकार काम करके जल्दी ही प्रदूषण की समस्या को खत्म करेगी। 

जावड़ेकर ने इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि हर शहर की समस्या के अलग अलग कारण हैं और उन्हें किसी एक तरीके से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रबंधन के लिए सरकार ने कारणों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के कारणों में औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन जनित उत्सर्जन, सड़क और मिट्टी की धूल, निर्माण और विध्वंस गतिविधियां, बायोमास और कचरा जलाना शामिल हैं। वाहनों से होने वाले प्रदूषण का जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि एक अप्रैल 2020 से ईंधन के साथ साथ वाहनों में बीएस-6 मानक लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सड़कों पर भीड़ को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और सड़कों में सुधार करने पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने पौधारोपण पर जोर देते हुए कहा कि सभी सदस्यों की ऐसी ही राय थी। उन्होंने स्कूलों में नर्सरी कार्यक्रम सहित विभिन्न कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि इस संबंध में जन आंदोलन बनाने की जरूरत है।वह दिल्ली सहित देश भर में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तरों के कारण उत्पन्न होने वाली स्थिति पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बोल रहे थे।जावडेकर ने कहा कि दुनिया के सिर्फ दो ही देशों भारत और चीन में हरित क्षेत्र में वृद्धि हुयी है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर काबू के लिए हम सब से जो प्रयास हो सकता है, करना चाहिए। उन्होंने देश के विभिन्न शहरों के वायु गुणवत्ता सूचकांक का जिक्र करते हुए कहा कि कई शहरों में यह 300 से ज्यादा है तो कई शहरों में यह 60 से भी कम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वायु प्रदूषण की समस्या का व्यापक तरीके से हल करने के लिए जनवरी 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें 2017 को आधार वर्ष मानते हुए 2024 तक पीएम10 और पीएम2.5 को 20 से 30 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। 

इसे भी पढ़ें: रोजगार सृजन नहीं होने की समस्या महामारी का रुप ले चुकी है: प्रियंका

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि केंद्र में विभिन्न समितियों का भी गठन किया गया है और राज्यों को अपने स्तर पर ऐसी समितियां गठित करने को कहा गया है। इससे पहले विभिन्न सदस्यों ने मंत्री से स्पष्टीकरण पूछा और कहा कि प्रदूषण के लिए किसानों को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे पराली नहीं जलाएं।चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आाजाद ने कहा कि प्रदूषण एक ऐसा मुद्दा है जिस पर संसद या सर्वदलीय बैठक में चर्चा करने मात्र से काम नहीं चल सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यावरण मंत्री इस सदन की ओर से प्रधानमंत्री से यह अनुरोध करें कि वे प्रदूषण के मुद्दे और इससे निपटने के लिए मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन बुलायें।उन्होंने कहा कि इससे इस समस्या के समाधान पर ठोस तरह से काम करना होगा क्योंकि राज्य स्तर पर ही इन उपायों को लागू करना है।कांग्रेस पार्टी के मोहम्मद अली खान ने आजाद के सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान की शुरूआत ब्लाक स्तर से की जानी चाहिए।सपा की जया बच्चन ने कहा कि प्रदूषण के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इंग्लैंड और आयरलैंड ने पर्यावरण आपातकाल घोषित कर दिया है वैसे ही हमें वर्तमान समस्या से निपटने के लिए पर्यावरण आपातकाल घोषित करना चाहिए। कांग्रेस की कुमारी शैलजा ने कहा कि सरकार की आदत सबकुछ ठीक बताने की है लेकिन वास्तविक स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा किसानों को दोषी ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने की जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इसके लिए उनके सामने कोई प्रौद्योगिकी नहीं है। उन्होंने कहा कि पराली को मनरेगा से जोड़ा जाना चाहिए। 

इसे भी पढ़ें: भारत के संविधान में राष्ट्रीय भाषा का उल्लेख नहीं: रविशंकर प्रसाद

भाजपा के विजय गोयल ने आप नीत दिल्ली सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह हाथ पर हाथ रखकर बैठी है और उसने कोई काम नहीं किया है। इस वजह से स्थिति गंभीर हो गयी है।  आप सदस्यों की टोकाटाकी के बीच उन्होंने आरोप लगाया कि 50 लाख मास्क बांटे गए और उसमें भी भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने समाचार पत्र आदि दिखाने का भी प्रयास किया लेकिन उपसभापति हरिवंश ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।राजद के मनोज कुमार झा ने कहा कि पराली लंबे समय से जलायी जाती रही है। लेकिन अब उन्हें ही दोषी बताया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने से दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के संबंध में कोई अध्ययन नहीं कराया गया है। जदयू के कहकशां परवीन ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बिहार सरकार द्वारा शुरू किए गए हरियाली मिशन का उल्लेख किया और कहा कि प्रदेश सरकार की पहलों के कारण राज्य में हरित क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुयी है। भाजपा सदस्यों की टोकाटोकी के बीच आप के संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार के प्रयासों से स्थिति में सुधार हुआ है और हरित क्षेत्र में भी वृद्धि हुयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सदस्य प्रदूषण पर काबू के लिए शुरू की गयी सम-विषम सहित विभिन्न योजनाओं का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री के बयान में कहा गया है कि पराली प्रबंधन के लिए 56 हजार से अधिक मशीनों की आपूर्ति की गयी है जबकि उच्चतम न्यायालय में इस संबंध में अलग आंकड़ा दिया गया है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।