Speaker Om Birla का बड़ा फैसला, अपने खिलाफ No-Confidence Motion पर निर्णय तक नहीं करेंगे सदन की अध्यक्षता

Om Birla
ANI
अंकित सिंह । Feb 10 2026 7:04PM

विपक्षी दलों द्वारा पक्षपात के आरोपों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ पद से हटाने का नोटिस दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस नोटिस पर फैसला होने तक ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से दूर रखने और आसन पर न बैठने का निर्णय लिया है।

मौजूदा बजट सत्र के दौरान लोकसभा में सत्ताधारी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच तनाव जारी है। 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद से सदन सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है। इस बढ़ते गतिरोध के बीच, विपक्षी दलों ने लोकसभा महासचिव को नोटिस भेजकर अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने की मांग की है। सूत्रों से पता चला है कि ओम बिरला ने नोटिस पर निर्णय होने तक लोकसभा की कार्यवाही में शामिल न होने का फैसला किया है।

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उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को विपक्ष द्वारा उनके निष्कासन के संबंध में दायर नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने महासचिव से नोटिस की गहन समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई करने को कहा है। मंगलवार को विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश करने हेतु नोटिस दिया। 

दलों का आरोप है कि बिरला ने सदन की कार्यवाही में स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया और कांग्रेस सांसदों पर स्पष्ट रूप से झूठे आरोप लगाकर संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक के सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को नोटिस सौंपा। हालांकि, टीएमसी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए और वे इसके पक्षकार नहीं थे।

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सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) जैसी पार्टियों के लगभग 120 सांसदों ने प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए थे। नोटिस में कहा गया है कि हम, अधोहस्ताक्षरी, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को भारत के संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के प्रावधानों के तहत पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव की सूचना देते हैं, क्योंकि उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही को खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित किया है।

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