शिमला में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस के अवसर पर भाजपा नेताओं ने उनके आदर्शो को अपनाकर संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया

शिमला में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस के अवसर पर भाजपा नेताओं ने उनके आदर्शो को अपनाकर संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया

शिमला नगर निगम की पार्षद किमी सूद की अगुवाई में बेनमोर इलाके में आज भाजपा कार्यकर्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्यक्ष के जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस अवसर अपने संबोधन में किमी सूद ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है।

शिमला । भाजपा कार्यकर्ताओं ने आज शिमला में जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म दिवस मनाया। कार्यकर्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शो को अपनाकर संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया।

 

शिमला नगर निगम की पार्षद किमी सूद की अगुवाई में बेनमोर इलाके में आज  भाजपा कार्यकर्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय  के जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।  

इस अवसर अपने संबोधन में किमी सूद ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती मनाई जाती है। वह एक महान विचारक और एक महान राजनेता थे। इसके साथ ही साथ वे एक समाज सुधारक और महान शुभ चिंतक भी थे और भारतीय संगठन पार्टी को बनाने में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा। 

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जन्म 25 सितंबर 1916 को  मथुरा में हुआ। वह बहुत ही साधारण परिवार से थे। उनके पिता  भगवती प्रसाद उपाध्याय रेलवे में तैनात थे। जब वह तीन साल के थे तब उनके पिता का निधन हो गया।  सात साल के हुये तो उनकी माता का भी निधन हो गया। 

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उन्होंने काँलेज के दिनों में ही राजनीति में आने का निर्णय ले लिया था और उन्होंने बहुत ही कम समय में बहुत सारी उपलब्धियां हासिल कर ली थीं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपने कार्यों एवं विचारों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। दनका मानना था कि एकात्म मानववाद ही किसी  देश को मजबूत कर सकता है। उन्होंने छोटी सी उम्र में ही बहुत से संकटों को सामना किया. इससे वे दीनदयाल समाज के लिए एक मिसाल बने। उनका योगदान राजनिति के अलावा साहित्य में भी रहा। उनकी मौत रहस्यमयी परिस्थितयों में हुई थी। 





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