Jammu-Kashmir के लोग PoK में हो रहे दमन से चिंतित, अलगाववादी भी बोलने लगे सबसे अच्छा है हिंदुस्तान

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इस घटनाक्रम की गूंज कश्मीर घाटी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों तक पहुंच गई है। श्रीनगर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच रावलाकोट और मुजफ्फराबाद से सामने आए वीडियो चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की बर्बर कार्रवाई ने इस्लामाबाद के लोकतंत्र और मानवाधिकारों के दावों की पोल खोल दी है। विधानसभा चुनावों के पहले चरण के दौरान भड़की हिंसा में कम से कम 20 प्रदर्शनकारियों की मौत और दो दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की घटनाओं ने न केवल पीओके को झकझोर दिया है, बल्कि कश्मीर घाटी में भी इस मुद्दे पर अभूतपूर्व प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। छात्र संगठनों से लेकर अलगाववादी नेतृत्व और मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां तक, सभी ने बल प्रयोग के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की वकालत की है।

इस घटनाक्रम की गूंज कश्मीर घाटी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों तक पहुंच गई है। श्रीनगर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच रावलाकोट और मुजफ्फराबाद से सामने आए वीडियो चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं। कई छात्रों का कहना है कि राजनीतिक मतभेद चाहे जितने भी गंभीर हों, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का जवाब गोलियों से नहीं दिया जा सकता। छात्रों ने यह भी रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की शिकायतों का समाधान संवाद से होना चाहिए, न कि दमन और हिंसा से।

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा बातचीत का रास्ता अपनाने और दूसरी ओर नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान द्वारा बल प्रयोग करने के बीच तुलना भी घाटी में चर्चा का विषय बनी हुई है। छात्रों का मानना है कि लोकतंत्र की असली ताकत संवाद और सहमति में होती है, जबकि हिंसा केवल असंतोष और अविश्वास को बढ़ाती है।

सबसे उल्लेखनीय प्रतिक्रिया अलगाववादी नेतृत्व की ओर से आई। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक, जो लंबे समय तक भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं, उन्होंने भी पाकिस्तान से अपील की कि पीओके में जारी अशांति का समाधान बल प्रयोग नहीं बल्कि बातचीत के जरिए निकाला जाए। उन्होंने नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। अन्य अलगाववादी नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी दर्शा रही हैं कि उन्हें अब पाकिस्तान की बजाय हिंदुस्तान भा रहा है।

मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पीओके की घटनाओं पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। वहीं जम्मू में हिंदूवादी संगठनों ने पीओके के लोगों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर का पुतला फूंका।

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