असम में अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान पुलिस ने ‘अत्यधिक बल’ प्रयोग किया: एनजीओ

Himanta Biswa Sarma

एक गैर सरकारी संगठन ‘द एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ के रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस और प्रशासन ने विस्थापितों पर ‘‘डंडे एवं पत्थरों’’ से हमले के लिए ‘‘बड़ी भीड़’’ को जिम्मेदार बताया, जिस कारण हिंसा भड़की।

असम के दारंग जिले में पिछले महीने अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान हुई झड़पोंको लेकर सोमवार को एक गैर सरकारी संगठन ने रिपोर्ट जारी की और आरोप लगाया कि पुलिस ने विस्थापित लोगों के खिलाफ ‘‘बिना उकसावे के हमला’’ किया और ‘‘अत्यधिक बल’’ प्रयोग किया।

इन झड़पों में दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब 20 अन्य घायल हो गये थे। ‘द एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और शोधार्थियों के तथ्यान्वेषी दल ने पिछले हफ्ते इलाके का दौरा करने के बाद रिपोर्ट तैयार की।

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रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस और प्रशासन ने विस्थापितों पर ‘‘डंडे एवं पत्थरों’’ से हमले के लिए ‘‘बड़ी भीड़’’ को जिम्मेदार बताया, जिस कारण हिंसा भड़की। रिपोर्ट के मुताबिक तथ्यान्वेषी दल ने जब निवासियों से संपर्क किया तो उन्होंने पुलिस के बयान का विरोध किया और कहा कि ‘‘अभियान शुरू होने के 24 घंटे से भी कम समय में बेदखली के लिए नोटिस दिया गया।’’

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने घरों को खाली कर रहे लोगों पर हमला किया। इसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने ‘‘बिना उकसावे के हमला’’किया और लोगों पर ‘‘अत्यधिक बल’’ प्रयोग किया।

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डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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