स्थानीय भाषाओं में ई-गवर्नेंस के लिए Bhashini AI जोड़ेगा Karnataka, बोले Priyank Kharge

कर्नाटक सरकार 700 से अधिक नागरिक सेवाओं को आसान बनाने के लिए एआई आधारित भाषा प्लेटफॉर्म भाषिणी का उपयोग करेगी। आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे के अनुसार, तकनीक को नागरिकों की स्थानीय भाषाओं और बोलियों के अनुसार ढलना चाहिए ताकि शासन अधिक समावेशी बने। इसके साथ ही सरकार डीप-टेक और एआई स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान भी देगी।
कर्नाटक सरकार, AI-बेस्ड भाषा टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म 'भाषिणी' का इस्तेमाल करके लोकल भाषाओं और बोलियों में डिजिटल गवर्नेंस और नागरिकों के लिए सेवाओं को ज़्यादा आसान और सुलभ बनाएगी। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को यह बात कही। बेंगलुरु के विधान सौधा में ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों के लिए आयोजित 'भाषिणी' वर्कशॉप का उद्घाटन करने के बाद प्रियांक खड़गे ने कहा, "कर्नाटक एक राज्य है, लेकिन इसमें कई दुनियाएँ बसी हैं। अलग-अलग इलाकों में हमारी भाषा, बोलियाँ और सांस्कृतिक संदर्भ काफी अलग-अलग हैं। अगर टेक्नोलॉजी को सच में गवर्नेंस को ज़्यादा सुलभ बनाना है, तो उसे नागरिकों से उसी भाषा में बात करनी होगी जिसे वे समझते हैं। 'भाषिणी' हमें इस अंतर को पाटने के लिए AI, आवाज़ और अनुवाद टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का मौका देती है। हमें 'प्रजा सेवा' और ई-गवर्नेंस के तहत अपनी 700 से ज़्यादा नागरिक सेवाओं को आसान, समझने में सरल और सुलभ बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहिए। सवाल यह नहीं है कि नागरिक टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को ढाल सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या टेक्नोलॉजी नागरिकों के हिसाब से खुद को ढाल सकती है।" एक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, इस वर्कशॉप में सरकारी सेवाओं को आसान, ज़्यादा समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए AI-बेस्ड भाषा और आवाज़ टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर चर्चा की गई।
इसे भी पढ़ें: Bengaluru के जयनगर में 5698 वोट कटवाने की साजिश, दो BLA पर FIR दर्ज
कर्नाटक में भाषाओं, बोलियों और सांस्कृतिक परिवेश में काफी क्षेत्रीय विविधता है। यहाँ कन्नड़ मुख्य भाषा है, लेकिन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तमिल, तेलुगु, मराठी, उर्दू, तुलु, बेरी और दूसरी भाषाएँ भी बड़े पैमाने पर बोली जाती हैं। मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा यह कर्नाटक के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सरकारी क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के समाधान तैयार करने का भी एक मौका है। हमारी 'गवर्नमेंट फर्स्ट पॉलिसी' के ज़रिए सरकार नए और अनोखे स्टार्टअप्स की पहली ग्राहक बन सकती है, जबकि डीप-टेक और AI इनोवेशन के लिए 1 करोड़ रुपये तक की ग्रांट मिल सकती है। मैं 'भाषिणी' टीम को बेंगलुरु टेक समिट में आमंत्रित करता हूँ ताकि वे इस टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने पेश कर सकें और यह पता लगा सकें कि हम सरकारी सेवाओं (G2C) में इसका इस्तेमाल कैसे बढ़ा सकते हैं। आखिरकार, AI की सफलता को इस बात से मापा जाना चाहिए कि वह लोगों की ज़िंदगी में क्या बदलाव लाता है।
इसे भी पढ़ें: Bengaluru के जयनगर में 5698 वोट कटवाने की साजिश, दो BLA पर FIR दर्ज
केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया डिवीज़न के CEO अमिताभ नाग ने 'भाषिणी' और उसकी क्षमताओं के बारे में बात की। प्रजा सेवा विभाग के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता ने शुरुआती भाषण दिया। ई-गवर्नेंस विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार पांडे, सूचना और जनसंपर्क विभाग के सचिव जे. मंजूनाथ, निदेशक भोयर हर्षल नारायणराव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
अन्य न्यूज़















