अचूक, अभेद्य और सटीक भारतीय वायु सेना: गर्व के साथ सफलता की ऊंचाइयों को छूते हुए

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भारतीय वायु सेना 8 अक्टूबर को अपनी 94वीं वर्षगांठ मना रही है। अमेरिका और रूस के बाद लगातार पांचवें साल दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायु सेना बनी आईएएफ के पास 250 से अधिक सुखोई-30एमकेआई और राफेल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। वायु सेना अपनी सामरिक ताकत का भव्य फ्लाई-पास्ट इस साल वाराणसी में आयोजित करेगी।

भारतीय वायु सेना (आई. ए. एफ.) आज (8 अक्टूबर, 2026) अपनी 94वीं वर्षगांठ मना रही है। यह दिन हवाई सुरक्षा, रणनीतिक प्रतिरोध और मानवीय सेवा के लगभग एक सदी के सफल सफर को दर्शाता है।

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भारतीय वायु सेना दिवस क्यों मनाया जाता है

भारतीय वायु सेना दिवस हर साल 8 अक्टूबर को मनाया जाता है, जो 1932 में हमारी वायु सेना  की आधिकारिक स्थापना की याद दिलाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान 'रॉयल ​​इंडियन एयर फ़ोर्स' के रूप में स्थापित, वायु सेना ने 1950 में अपने नाम से "रॉयल" शब्द हटा दिया। यह दिन उन वायु योद्धाओं (सेवानिवृत्त एवं सेवारत) के साहस, पेशेवर रवैये और बलिदान का सम्मान करता है, जो शांति और संघर्ष के समय भारत के हवाई क्षेत्र, सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करते हैं।

भारतीय वायु सेना  दिवस समारोह की खास बातें

भारतीय वायु सेना  दिवस समारोह भव्यता, सटीकता और टेक्नोलॉजी के प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं।  सालाना एयर डिस्प्ले और फ्लाईपास्ट में फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के तालमेल वाले हवाई करतब शामिल होते हैं। एयर-वॉरियर परेड में पुरुष और महिला दोनों तरह के कर्मियों का सटीक तालमेल वाला मार्च होता है, जो अनुशासन और मिलिट्री अंदाज़ को दिखाता है।
फ्लाई-पास्ट कार्यक्रम को आम जनता तक पहुँचाने के लिए हर साल जगहें बदली जाती हैं, जैसे हिंडन एयर फ़ोर्स बेस, चंडीगढ़ और प्रयागराज। इस साल वाराणसी में 22, 23 और 25 अक्टूबर को फ्लाई-पास्ट डिस्प्ले होगा।
थीम-बेस्ड कैंपेन में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) और रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से ऑफिशियल प्रमोशनल रिलीज़ शामिल हैं, जिनमें डायनामिक वीडियो कंटेंट होता है, जैसे 2026 का कैंपेन जिसकी थीम है, "इंडियन एयर फ़ोर्स: अचूक, अभेद्य और सटीक।"

भारतीय वायु सेना की मुख्य बातें

2022 से लगातार पांचवें साल, भारतीय वायु सेना दुनिया भर में अमेरिका और रूस के बाद तीसरे स्थान पर है। यह युद्ध में खुद को साबित कर चुकी और अनुभवी सेना है। साथ ही, यह इस क्षेत्र की एकमात्र ऐसी वायु सेना है जो लगातार युद्ध अभियानों में शामिल रही है। 2019 में बालाकोट, 2020 से 2025 तक लद्दाख एल ए सी गतिरोध और मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे अभियानों ने भारतीय वायु सेना की लंबी दूरी तक हमला करने और हवाई सुरक्षा की क्षमताओं को दिखाया है। ऑपरेशन का अनुभव इसकी एक बड़ी ताकत है।

भारतीय वायु सेना 250 से ज़्यादा एसयू-30एम के आई एयर-डोमिनेंस फाइटर जेट्स का संचालन करती है। इन्हें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार और अस्त्र मार्क2 मिसाइलों के साथ 'सुपर सुखोई' मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है। राफेल 4.5-जेनरेशन फाइटर जेट्स, जो मीटियोर और स्कैल्प मिसाइलों और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट से लैस हैं, 'ऑपरेशन सिंदूर' में बहुत असरदार साबित हुए। जल्द ही राफेल का एक नया वेरिएंट आने की उम्मीद है। तेजस मार्क-1, अपग्रेडेड मिग-29यूपीजी, मिराज-2000 और जगुआर फाइटर जेट्स जैसे अन्य प्लेटफॉर्म भी अलग-अलग तरह की ऑपरेशनल क्षमताएं प्रदान करते हैं। लेह (10,700 फीट की ऊंचाई) से लेकर कार निकोबार जैसी जगहों से काम करने की भारतीय वायु सेना  की क्षमता इसे क्षेत्र की एकमात्र ऐसी वायु सेना बनाती है जो लगातार ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन करने में सक्षम है। भारतीय वायु सेना एस-400 और आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के साथ  आईएसीसीएस और एएफनेट का इस्तेमाल करके असरदार इंटीग्रेटेड नेट-सेंट्रिक ऑपरेशन करती है। ये प्लेटफ़ॉर्म एक यूनिफाइड नेटवर्क के तौर पर काम करते हैं। एयर वॉरियर्स ने टेक्नोलॉजी-बेस्ड ऑपरेशन के तरीके को सफलतापूर्वक अपना लिया है।
भारतीय वायु सेना  का ट्रेनिंग का तरीका सबसे अच्छे तरीकों में से एक है और भारतीय वायु सेना  के पायलटों ने कई इंटरनेशनल एक्सरसाइज़ जीती हैं।

'आत्मनिर्भर भारत' पहल और देश में ही मॉडर्नाइज़ेशन पर ध्यान देने के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। भारतीय वायु सेना ने 180 तेजस मार्क -1ए एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया है और आमका (ए एम सी ए), फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर, कैटस् टीमिंग ड्रोन और स्वदेशी अस्त्र बी वी आर मिसाइल को मंज़ूरी दी है। ये कदम आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं, साथ ही बदलाव के दौर में क्षमता की कमियों को दूर करने के लिए लगातार कोशिशें ज़रूरी हैं।

इंडियन एयर फ़ोर्स की उपलब्धियाँ

कई दशकों के इतिहास में, भारतीय वायु सेना  बाइप्लेन के एक छोटे से बेड़े से बढ़कर दुनिया की टॉप पाँच सबसे ताकतवर एयर फ़ोर्स में से एक बन गई है। इसकी मुख्य उपलब्धियों में शामिल हैं:
युद्ध के समय बहादुरी: बड़े मिलिट्री ऑपरेशन्स में अहम भूमिका, जिसमें दूसरा विश्व युद्ध; 1948, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष; 1999 का कारगिल युद्ध शामिल हैं। और 2019 के बालाकोट ऑपरेशन जैसे सटीक क्रॉस-बॉर्डर हमले।
सेना का आधुनिकीकरण और स्वदेशी इनोवेशन: पुराने आयातित विमानों से हटकर राफेल और एसयू-30एम के आई जैसे एडवांस्ड मल्टी-रोल फाइटर जेट, तेजस जैसे स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान, सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-295 जैसे आधुनिक भारी-भरकम सामान ढोने वाले विमान, और स्वार्म ड्रोन व ड्रोनाथॉन जैसी नई तकनीकों को अपनाना।
मानवीय सहायता और आपदा राहत (एच ए डी आर): राष्ट्रीय आपातकाल, बाढ़ और भूकंप के दौरान ज़रूरी बचाव अभियान चलाना, और विदेशों में संघर्ष वाले इलाकों में फँसे नागरिकों और मेडिकल सप्लाई को एयरलिफ्ट करना।

आज भारतीय वायु सेना के सामने चुनौतियाँ

शानदार क्षमताओं के बावजूद, भारतीय वायु सेना को ऑपरेशन, स्ट्रक्चर और प्लानिंग से जुड़ी अहम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय वायु सेना  के लड़ाकू विमानों की संख्या में काफी कमी आ रही है। हालाँकि 42 फाइटर स्क्वाड्रन की मंज़ूरी है, लेकिन अभी संख्या इससे कम है। 2030 के दशक में इनके और कम होने की उम्मीद है क्योंकि मिग-21, मिग-29, जगुआर और मिराज-2000 जैसे पुराने बेड़े तेज़ी से रिटायर हो रहे हैं और उनकी जगह नए विमान उतनी तेज़ी से नहीं आ रहे हैं। यह बढ़ता अंतर भविष्य की तैयारी के लिए सेना के आधुनिकीकरण को बहुत ज़रूरी बनाता है। एयर चीफ मार्शल एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने 3 अक्टूबर 2026 को कहा, "हमारी संख्या कम है, लेकिन हम कमज़ोर नहीं हैं," जो भारतीय वायु सेना  की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है।

2021 में ऑर्डर किए गए स्वदेशी तेजस मार्क-1ए का एक स्क्वाड्रन साल के आखिर तक शामिल कर लिया जाएगा। तेजस मार्क-2 की पहली उड़ान सितंबर 2027 तक होने की संभावना है, जबकि आमका (ए एम सी ए) की पहली उड़ान सितंबर 2028 तक होने की उम्मीद है। भारतीय वायु सेना  उत्तरी सीमा पर लंबे समय से चल रहे और बहुत अहम सैन्य गतिरोध को संभाल रही है, साथ ही परमाणु हथियार वाले पश्चिमी पड़ोसी के खिलाफ रणनीतिक तैयारी भी बनाए हुए है।

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चीन का सैन्य बुनियादी ढांचे, एयरफील्ड और क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टील्थ क्षमताओं जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों का तेज़ी से आधुनिकीकरण क्षेत्रीय निर्माण क्षमताओं से कहीं आगे निकल रहा है। इससे प्रभावी 'फोर्स मल्टीप्लायर' (सैन्य क्षमता बढ़ाने वाले साधनों) और लगातार आधुनिकीकरण के ज़रिए सीमित संसाधनों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने की ज़रूरत बढ़ जाती है। इन-फ्लाइट रिफ्यूलर (आई एल-78), एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स), लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी और मज़बूत अनमैन्ड एरियल कॉम्बैट सिस्टम (यू ए एस) जैसे अहम 'फोर्स मल्टीप्लायर' की कुल संख्या में अभी भी कमी है, जिससे इन क्षमताओं को बड़े पैमाने पर तैनात करने में सीमाएँ आती हैं। भारतीय वायु सेना  की लगातार प्रभावशीलता बनाए रखने के रोडमैप के लिए इन कमियों को दूर करना ज़रूरी है।

--- प्रोफेसर (डॉ.) डी. के. पांडेय

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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