Ayodhya में राम मंदिर ट्रस्ट पर SIT का शिकंजा, Pran Pratishtha समेत 124 करोड़ के खर्च की जांच

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ANI
अभिनय आकाश । Jul 7 2026 11:54AM

SIT पिछले दो सालों के ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट कर रही है। जांचकर्ता ऑडिट रिपोर्ट, पेमेंट वाउचर, बिल, चार्टर्ड अकाउंटेंट के रिकॉर्ड और खर्च के ब्योरे की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि फंड का इस्तेमाल ट्रस्ट की तय वित्तीय प्रक्रियाओं और मंज़ूरी के अनुसार किया गया था या नहीं।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा बड़े कार्यक्रमों पर खर्च किए गए 124 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इन कार्यक्रमों में जनवरी 2024 का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, 2025 के महाकुंभ से जुड़ी तैयारियां और नवंबर 2025 में हुआ ध्वजारोहण समारोह शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक,

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सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी एक बड़े ऑडिट के हिस्से के तौर पर खर्चों की जांच कर रही है और अभी तक वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इस कवायद का मकसद ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाओं और मंज़ूरी देने के तरीकों के पालन की पुष्टि करना है।

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यह विस्तृत जांच ऐसे समय में हो रही है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दान में चोरी के विवाद में घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों की जांच के लिए एक SIT बनाई थी, जिसके बाद कई आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। तब से जांच का दायरा कथित चोरी से आगे बढ़कर ट्रस्ट के वित्तीय सिस्टम, खर्च के रिकॉर्ड और मंज़ूरी की प्रक्रियाओं की जांच तक फैल गया है। इस विवाद की वजह से ट्रस्ट में पहले ही बड़े बदलाव हो चुके हैं। सोमवार को ट्रस्ट ने जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए डोनेशन चोरी के विवाद के बीच इन दोनों ने अपने पद छोड़ दिए थे। ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया, साथ ही ट्रस्ट ने निगरानी मज़बूत करने और जनता का भरोसा फिर से कायम करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक समीक्षा की भी घोषणा की।

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जांच के दायरे में सबसे बड़ा खर्च 22 जनवरी, 2024 को राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़ा है, जिसके लिए ट्रस्ट ने लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए। इस कार्यक्रम में लगभग 8,000 मेहमान शामिल हुए थे। इसमें नए बने मंदिर में राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई और यह हाल के वर्षों में देश में हुए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रमों में से एक था। SIT द्वारा जांचे जा रहे ऑडिट रिकॉर्ड के अनुसार, खर्च की मुख्य मदों में शेड और टेंट-सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर 35.97 करोड़ रुपये, अक्षत पूजन अभियान पर 30.85 करोड़ रुपये, प्रचार और विज्ञापनों पर 21.77 करोड़ रुपये और सजावट व लाइटिंग पर 14.62 करोड़ रुपये शामिल थे। अन्य खर्चों में भोजन की व्यवस्था (अन्न क्षेत्र) पर 5.11 करोड़ रुपये, धार्मिक अनुष्ठानों पर 1.06 करोड़ रुपये, भक्ति संगीत (राग सेवा) पर 93 लाख रुपये, साउंड सिस्टम पर 68 लाख रुपये, बिजली और मंडल पूजन पर 43-43 लाख रुपये और अन्य तैयारियों पर 51 लाख रुपये शामिल थे।

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SIT 11 से 13 जनवरी, 2025 तक आयोजित पहले 'प्रतिष्ठा द्वादशी' समारोह पर हुए खर्च की भी जांच कर रही है। ट्रस्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, इस कार्यक्रम पर लगभग 83 लाख रुपये खर्च हुए, जिसमें लाइटिंग और सजावट पर 52 लाख रुपये शामिल हैं। जांचकर्ता 'महाकुंभ' के दौरान श्रद्धालुओं की व्यवस्था पर खर्च किए गए 43 लाख रुपये की भी समीक्षा कर रहे हैं। महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसके दौरान अयोध्या में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहुंचे थे। 

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