धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं से मिलीं प्रियंका, बोलीं- कानून को वापस लेने के अलावा कोई समाधान नहीं !

  •  अनुराग गुप्ता
  •  जनवरी 8, 2021   14:40
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धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं से मिलीं प्रियंका, बोलीं- कानून को वापस लेने के अलावा कोई समाधान नहीं !

महासचिव प्रियंका गांधी की कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें प्रियंका गांधी यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि कानून को वापस लेने का अलावा कोई समाधान नहीं है।

नयी दिल्ली। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के कांग्रेस नेता राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 32 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। इसी बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी के आवास पर इन नेताओं से मुलाकात की। पंजाब कांग्रेस के ट्विटर हैंडल ने मुलाकात की तस्वीरों को साझा किया है और लिखा कि प्रियंका गांधी ने धरने पर बैठे पार्टी नेताओं से मुलाकात की और किसानों की स्थिति पर चर्चा भी की।

प्रियंका गांधी की कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें प्रियंका गांधी यह कहते हुए दिखाई दे रही हैं कि कानून को वापस लेने का अलावा कोई समाधान नहीं है।

बता दें कि कांग्रेस की पंजाब इकाई ने किसानों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए सोशल मीडिया पर एक अभियान चलाया हुआ है। जिसमें वह किसानों से जुड़ी हुई समस्याओं और मुद्दों को साझा कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने #किसानकेलिएबोलेभारत नामक हैशटैग का इस्तेमाल किया है। 

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कांग्रेस ने इस अभियान के साथ जुड़ने की अपील करते हुए एक तस्वीर साझा की थी। जिसमें लिखा है, 'जुड़िए #किसान_के_लिए_बोले_भारत अभियान से, भारत के लोग मांग करते हैं कि भाजपा सरकार किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द करें।'

किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार कांग्रेस केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। हाल ही में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सर्दी की भीषण बारिश में टेंट की टपकती छत के नीचे जो बैठे हैं सिकुड़-ठिठुर कर, वो निडर किसान अपने ही हैं, ग़ैर नहीं। सरकार की क्रूरता के दृश्यों में अब कुछ और देखने को शेष नहीं।

वहीं, महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार एक तरफ तो किसानों को बातचीत के लिए बुलाती है, दूसरी तरफ इस कड़कड़ाती ठंड में उन पर आंसू गैस के गोले बरसा रही है। इसी अड़ियल और क्रूर व्यवहार की वजह से अब तक लगभग 60 किसानों की जान जा चुकी है।





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