अस्पताल पर सवाल, अपनी ही सरकार से तकरार, Bihar Assembly में क्यों छाईं MLA Maithili Thakur?

Maithili Thakur
ANI
अंकित सिंह । Feb 10 2026 12:17PM

बिहार विधानसभा में विधायक मैथिली ठाकुर ने अपनी ही सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को सरकारी अस्पताल की जर्जर हालत पर घेरा, जिससे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर हुई। मंत्री के जवाब से उनकी असंतुष्टि ने सरकारी आश्वासनों और वास्तविक स्थिति के बीच की खाई को दर्शाया है।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी अस्पतालों की दयनीय स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठा, जब पहली बार विधायक बनीं मैथिली ठाकुर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में जर्जर बुनियादी ढांचे को लेकर अपनी ही पार्टी के स्वास्थ्य मंत्री से सवाल किया। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए, ठाकुर ने तरदीह ब्लॉक के कुरासन नादियामी स्थित सरकारी अस्पताल की भयावह स्थिति की ओर ध्यान दिलाया और चेतावनी दी कि इमारत असुरक्षित है।

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स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे की शुरुआती प्रतिक्रिया से असंतुष्ट होकर, जिसमें उन्होंने इमारत को असुरक्षित नहीं बल्कि मरम्मत योग्य बताया था, ठाकुर ने उनसे फिर से सवाल किया और कहा कि उनका आकलन जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। उन्होंने सदन को बताया कि स्वास्थ्य सेवाएं एक छोटे से कमरे से चलाई जा रही हैं और अस्पताल में पहले दो एमबीबीएस डॉक्टर तैनात थे, लेकिन फिलहाल कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर तैनात नहीं है।

ठाकुर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी मंत्री पर हमला नहीं बल्कि एक अपील थी, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में उनके लंबे कार्यकाल का हवाला देते हुए उनसे जनहित में कार्रवाई करने का आग्रह किया। इसके जवाब में पांडे ने कहा कि सरकार इस मुद्दे से अवगत है और कई अस्पतालों के लिए नए भवनों को मंजूरी दे चुकी है। हालांकि, इस आश्वासन से ठाकुर संतुष्ट नहीं हुईं और सदन में गरमागरमी हो गई।

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ठाकुर ने इस बातचीत का एक वीडियो साझा किया, जो जल्द ही वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर विधायक के हस्तक्षेप की खूब सराहना हुई। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि जन स्वास्थ्य से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। क्षेत्र के लोगों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है। कई उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकरण ने एक व्यापक लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या को उजागर किया है, और बताया कि असुरक्षित सरकारी अस्पताल की इमारतें केवल बिहार तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि देश भर के कई राज्यों को प्रभावित करती हैं।

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