आर श्रीलेखा ने नहीं दिया इस्तीफा, Thiruvananthapuram Mayor का दावा

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तिरुवनंतपुरम के महापौर वी. वी. राजेश ने कहा है कि पूर्व डीजीपी और भाजपा पार्षद आर. श्रीलेखा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीलेखा अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगी और नगर निगम में कोई संकट नहीं है। दूसरी ओर, माकपा और कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी में पद पाने का नाटक बताया है।

तिरुवनंतपुरम, चार अक्टूबर तिरुवनंतपुरम के महापौर वी. वी. राजेश ने रविवार को कहा कि पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पार्षद आर. श्रीलेखा ने इस्तीफा नहीं दिया है और वह अपने पद पर बनी रहेंगी। यह मामला उस समय सामने आया जब श्रीलेखा द्वारा कथित तौर पर उनके वार्ड के निवासियों के एक व्हाट्सऐप समूह में भेजे गए संदेश में कहा गया कि उन्होंने महापौर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और पांच अक्टूबर को इसकी एक प्रति जिला कलेक्टर को देंगी। राजेश ने इससे पहले पत्रकारों से कहा था कि उन्हें 30 सितंबर को इस्तीफे का पत्र मिला था और उन्होंने इसे नगर निगम सचिव को नहीं भेजा है, जो इस्तीफा स्वीकार करने के लिए सक्षम अधिकारी हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि पत्र में निजी असुविधाओं का हवाला दिया गया है। हालांकि, रविवार को राजेश ने कहा कि ऐसा कोई इस्तीफा पत्र है ही नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘आपको किसने बताया कि उन्होंने इस्तीफा पत्र दिया है?

वह अपने पद पर बनी रहेंगी और मैंने कल ही यह बात कह दी थी।’’ श्रीलेखा द्वारा व्हाट्सऐप समूह में कथित तौर पर भेजे गए संदेश के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, ‘‘आप चाहते हैं कि शासन सुचारू रूप से चले। जैसा कि सभी चाहते हैं तो शासन मजबूती से आगे बढ़ेगा।’’ उन्होंने नगर निगम में किसी भी तरह के संकट की स्थिति से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि पार्षद नियमित रूप से अपने-अपने वार्ड के लिए धनराशि मंजूर करने और कामकाज से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए पत्र देते रहते हैं। राजेश ने कहा कि श्रीलेखा पार्षद बनी रहेंगी और अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगी। इस बीच, माकपा नेता और पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने श्रीलेखा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘श्रीलेखा जो कुछ भी कहती हैं, उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, वह पद और सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी तरह की धमकी का सहारा ले सकती हैं। इसे भाजपा पर नए पद हासिल करने के लिए बनाए जा रहे दबाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।’’ एक पत्रकार के यह पूछे जाने पर कि क्या श्रीलेखा कांग्रेस में जाने के लिए दबाव बना रही हैं, इस पर शिवनकुट्टी ने कहा कि कुछ नेता स्वाभाविक रूप से वहीं जाते हैं जहां उन्हें अधिक लाभ मिलता है।

उन्होंने कहा, ‘‘स्वाभाविक रूप से, कुछ लोग वहां जाते हैं जहां उन्हें अधिक लाभ मिलता है। उन्हें जहां सबसे ज्यादा फायदा मिलता है, वे वहीं चले जाएंगे।’’ श्रीलेखा ने अब तक इस्तीफे के मुद्दे और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भाजपा पिछले साल पहली बार तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता में आई थी।

101 सदस्यीय नगर निकाय में उसे एक निर्दलीय पार्षद समेत 51 पार्षदों का समर्थन हासिल है। श्रीलेखा ने पिछले साल हुए स्थानीय निकाय चुनाव में निगम के शास्तमंगलम वार्ड से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। श्रीलेखा का भाजपा पार्षद के रूप में बने रहना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन के कारण निगम में उसके पास मामूली बहुमत है।

श्रीलेखा फिलहाल भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने अप्रैल में वट्टीयूरकावु विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन से हार गई थीं। केरलम के स्वास्थ्य एवं देवस्वओम मंत्री के. मुरलीधरन ने श्रीलेखा द्वारा दिए गए इस्तीफे को रविवार को ‘‘नाटक’’ करार दिया।

मुरलीधरन ने कहा कि वह इसे नाटक इसलिए कह रहे हैं क्योंकि नियमों के अनुसार इस्तीफा नगर निगम के सचिव को सौंपा जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया, ‘‘एक पार्षद के तौर पर वह इस नियम से अनजान नहीं हो सकतीं। वह एक आईपीएस अधिकारी और पहली महिला डीजीपी रही हैं।

क्या उनके जैसे व्यक्ति को नियमों की जानकारी नहीं है? यह पार्टी में कुछ पद हासिल करने की कोशिश थी।

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