Ujjain में होगा भव्य Sandipani Alankaran समारोह, Guru Purnima पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav देंगे शिक्षा को नई दिशा

Sandipani Alankaran Ceremony
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मध्य प्रदेश सरकार सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से गुरुकुल परंपरा और आधुनिक विज्ञान का विश्लेषणात्मक समन्वय कर शिक्षा क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह विजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु मानवीय मूल्यों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों को एक मंच पर लाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने 'सांदीपनि विद्यालयों' के जरिए गुरुकुल के संपन्न और सनातन वैभव को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की एक नायाब शुरुआत की है। ​इस वर्ष गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, जब पूरा देश आदि गुरु महर्षि वेदव्यास के अवदान को याद कर रहा है, तब मध्य प्रदेश से आ रही सांस्कृतिक और शैक्षणिक पुनर्जागरण की बयार पूरे देश को एक नई राह दिखा रही है। इन विद्यालयों में गुरुकुल की समृद्ध परंपराओं के साथ अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान की भी शिक्षा दी जा रही है, और ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का इकलौता और अग्रणी राज्य बन गया है।

​उज्जैन केवल बाबा महाकाल की नगरी ही नहीं है, बल्कि वह द्वापर युग में महर्षि सांदीपनि की ऐतिहासिक तपोभूमि भी रही है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में संदीपनि अलंकरण समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव होंगे। इसके अलावा 15 जुलाई से 29 जुलाई तक गुरु शिष्य परंपरा के उत्सव के तौर पर गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रदेश में  "एक गुरु एक वृक्ष" अभियान के तहत 40000 से अधिक पौधों का रोपण भी किया गया।

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उज्जैन में महर्षि सांदीपनि का पावन आश्रम था जहां स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने साथ रहकर समतावादी शिक्षा प्राप्त की थी। यहीं पर श्रीकृष्ण और बलराम ने मात्र 64 दिनों में 4 वेद, 6 वेदांग, उपनिषद, राजनीति, युद्धकला, संगीत और जीवन प्रबंधन सहित 64 कलाओं और 14 विद्याओं का गहन अध्ययन किया था।

​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसी ऐतिहासिक नगरी उज्जैन से आते हैं। यही कारण है कि उज्जैन की इस महान सांदीपनि शिक्षा परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से खासे संजीदा हैं। मुख्यमंत्री इस योजना के क्रियान्वयन, गुणवत्ता और प्रगति की स्वयं कड़े स्तर पर मॉनिटरिंग करते हैं। उनके विजन का ही नतीजा है कि पूर्व की "सीएम राइज़" योजना को भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ देते हुए अब 'सांदीपनि विद्यालय' के रूप में एक नई चेतना प्रदान की गई है।

सांदीपनि विद्यालय परंपरा और आधुनिकता का संगम हैं। ​आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, बिग डेटा और इंटरनेट का है। उंगलियों की एक क्लिक पर दुनिया भर की सूचनाएं उपलब्ध हैं, परंतु सूचना और 'विवेक' में बहुत महीन अंतर होता है। उत्तर इंटरनेट दे सकता है और निबंध एआई लिख सकता है; लेकिन सही-गलत का भेद करने वाला विवेक, मानवीय मूल्य, करुणा और अडिग चरित्र का निर्माण केवल और केवल एक 'सच्चा गुरु' ही कर सकता है।

​राज्य में प्रथम चरण में कुल 368 सांदीपनि विद्यालय संचालित हैं। इनमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े हैं। दूसरे चरण में 405 और विद्यालय संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। 

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​मध्य प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय आज की पीढ़ी को राज्य के गौरव से जोड़ रहे हैं। शैक्षिक सत्र 2025- 26 में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में इन विद्यालयों का रिजल्ट तकरीबन 90 फ़ीसदी रहा है । कुल मिलाकर सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार 21वीं सदी के भारत के लिए 'मनुष्य निर्माण की एक अनुपम प्रयोगशाला' तैयार कर रही है।

​सांदीपनि विद्यालयों का लक्ष्य भव्य कंक्रीट की इमारतें खड़ा करना मात्र नहीं है, बल्कि आधुनिक विद्यालयों में 'गुरुकुल की आत्मा' को डालना है। यहां एक तरफ जहां आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, रोबोटिक्स और डिजिटल स्मार्ट कक्षाएं बच्चों को 21वीं सदी के लिए तैयार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति, योग, नैतिक शिक्षा, खेल, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व को अनिवार्य रूप से समाहित किया गया है।

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