Water Bodies Census: महाराष्ट्र में जल निकायों की संख्या पांच गुना बढ़ी, यूपी में भी 16 फीसदी इजाफा

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी जल निकायों की दूसरी गणना रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 4.74 लाख से अधिक जल स्रोत दर्ज किए गए हैं। इस गणना में उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में बढ़ोतरी दिखी है, जबकि मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश सहित पांच राज्यों में इनकी संख्या घटी है। मिजोरम में सबसे अधिक 63 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर जल निकायों की दूसरी गणना में महाराष्ट्र में 4.74 लाख जल निकाय दर्ज किए गए हैं, जो पहली गणना में दर्ज संख्या से लगभग पांच गुणा अधिक हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में 2.86 लाख जल निकाय दर्ज किए गए हैं। कर्नाटक, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी जल निकायों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पांच राज्यों मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और राजस्थान में पहली गणना की तुलना में जल निकायों की संख्या में कमी दर्ज की गई। इनमें मिजोरम में सबसे ज्यादा 63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जिसके बाद अरुणाचल प्रदेश में 50 प्रतिशत की कमी आई। ये आंकड़े जल निकायों की दूसरी गणना के खंड-2, भाग-2 का हिस्सा हैं।
इसमें 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ तथा जम्मू-कश्मीर को शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने 25 सितंबर को यहां भारत मंडपम में आयोजित नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह के समापन समारोह के दौरान जारी की थी। दूसरे खंड में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अलावा चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर को शामिल किया गया है।
जल निकायों की पहली गणना 2017-18 में की गई थी, जबकि दूसरी गणना 3 अप्रैल 2025 को शुरू की गई थी और इसके लिए 2023-24 को आधार वर्ष रखा गया था। महाराष्ट्र में दूसरी गणना में 4,74,548 जल निकाय दर्ज किए गए, जबकि पहली गणना में इनकी संख्या 97,062 थी। यानी इसमें 388.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
लगभग 99.72 प्रतिशत जल निकाय ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जबकि कुल जल निकायों में तालाबों की हिस्सेदारी 61.68 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में उपयोग में आने वाले जल निकायों में से 98.06 प्रतिशत का मुख्य रूप से सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता है। उत्तर प्रदेश में 2,86,292 जल निकाय दर्ज किए गए, जो पहली गणना में दर्ज 2,45,087 जल निकायों से 16.81 प्रतिशत अधिक हैं।
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