Shashi Tharoor का Modi सरकार पर बड़ा हमला, Delimitation को बताया Political Demonetisation

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'राजनीतिक नोटबंदी' करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह जटिल प्रक्रिया भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को बंधक बनाने जैसा है और इस कानून को मौजूदा सीटों पर तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि परिसीमन एक तरह से राजनीतिक नोटबंदी होगी। उन्होंने संसद के विस्तार को महिला आरक्षण से जोड़ने के लिए सरकार की आलोचना की। महिला कोटा कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग की स्थापना के प्रस्ताव सहित तीन विधेयकों पर लोकसभा में हुई बहस के दौरान उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना, भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को भारत के इतिहास की सबसे जटिल और विवादास्पद प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक के हाथों बंधक बनाने जैसा है।
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थरूर ने कहा कि आज हम ऐसी स्थिति में हैं जहां महिला आरक्षण को लेकर लगभग सर्वसम्मत राजनीतिक सहमति है। हर बड़ा दल मानता है कि प्रतीकों का समय खत्म हो गया और सामूहिक साझेदारी का कालखंड शुरू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह नारी शक्ति के लिए न्याय का उपहार लाए हैं लेकिन उन्होंने इसे कंटीले तारों में लपेट दिया है, महिला आरक्षण को लागू करने को संसद सत्र के विस्तार से, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के इस्तेमाल से और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है।
थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण की फसल कटने को तैयार है, इसे संसद में सीटों की मौजूदा संख्या के आधार पर तत्काल लागू किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपने इतनी हड़बडी में परिसीमन का प्रस्ताव रखा है, इतनी ही जल्दबाजी आपने नोटबंदी में दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि दुर्भाग्य से देश को उस समय कितना नुकसान हुआ था। परिसीमन (डिलिमिटेशन) की कवायद ‘राजनीतिक नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन)’ बन जाएगी। इसे मत कीजिए।
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उन्होंने कहा कि परिसीमन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, इसमें छोटे राज्यों और बड़े राज्यों का संतुलन होना चाहिए, तमिलनाडु तथा केरल जैसे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि एक तरफ संसद में बैठक के दिन कम होते जा रहे हैं, वहीं जब सदन में 850 सांसद होंगे तो आसन को भी कार्यवाही संचालित करने में और सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने में कठिनाई होगी। उन्होंने इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग सरकार से की।
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