शिवराज सिंह चौहान ने गुपकार गठबंधन को बताया गुप्तचर संगठन, कहा- पाकिस्तान और चीन के लिए कर रहे हैं जासूसी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 21, 2020   10:15
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शिवराज सिंह चौहान ने गुपकार गठबंधन को बताया गुप्तचर संगठन, कहा- पाकिस्तान और चीन के लिए कर रहे हैं जासूसी
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शिवराज चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस इस ‘‘देश विरोधी गुपकर गठबंधन’’ के साथ खड़ी है। वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने कहा कि चौहान राज्य में फैले कोरोना वायरस को रोकने में अपनी सरकार की विफलता को छिपाने के लिए गुपकर गठबंधन पर विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू-कश्मीर में बने ‘गुपकर गठबंधन’पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वास्तव में यह ‘गुप्तचर संगठन’ है जिसके लोग पाकिस्तान और चीन के लिए जासूसी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन ‘देश विरोधी गठबंधन’है, क्योंकि इसमें शामिल जितने नेता हैं, वे सब राष्ट्र विरोधी बयान देते हैं। चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस इस ‘‘देश विरोधी गुपकर गठबंधन’’ के साथ खड़ी है। वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने कहा कि चौहान राज्य में फैले कोरोना वायरस को रोकने में अपनी सरकार की विफलता को छिपाने के लिए गुपकर गठबंधन पर विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले साल केन्द्र सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म किये जाने पर इसकी बहाली की मांग को लेकर नेशनल कांफ्रेंस एवं पीडीपी सहित जम्मू-कश्मीर के कुछ प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने ‘गुपकार गठबंधन’ का गठन किया है। चौहान ने आरोप लगाया कि रोशनी कानून की आड़ में इस गुपकर संगठन के नेताओं ने जम्मू कश्मीर में 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जमीन हड़प ली।’’ चौहान ने कहा, ‘‘यह नेशनल कॉन्फ्रेंस हो या पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) हो, इनके बच्चे तो विदेशों में पढ़ रहे हैं। ये कश्मीरी बेटे-बेटियों के हाथ में पत्थर थमाते रहे हैं। इन्होंने विलासितापूर्ण जीवन जिया। कश्मीर को लूटने की आजादी इनको थी। इन्होंने जम्मू कश्मीर को अंधेरे में धकेला। आज ये सब इकट्ठे होकर देशद्रोह की बोल रहे हैं और कांग्रेस भी इनके साथ-साथ खड़ी हुई है।’’ 

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पूर्व में भाजपा के पीडीपी के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी राष्ट्र विरोधी दृष्टिकोण वालों के साथ भाजपा कभी नहीं रहेगी और इसलिए हम उस गठबंधन से उस समय उस सरकार की नीति के कारण बाहर हो गए थे।’’ गौरतलब है कि पिछले सप्ताह कांग्रेस ने कहा था कि वह ‘गुपकर गठबंधन’ में शामिल नहीं हुए हैं। चौहान ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भी निशाना साधा। चौहान ने कहा, ‘‘पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सत्ता जल्दी प्राप्त करने की चाह में देश के विभाजन को स्वीकार किया था। देश का विभाजन करवाया। वह नेहरू थे जिन्होंने कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू करवाया, वो नेहरू ही थे जिन्होंने एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान की व्यवस्था करके कश्मीर को भारत से समरस नहीं होने दिया था, वो नेहरू थे जिन्होंने कश्मीर के मामले को जो हमारे देश का आंतरिक मामला था, उसे संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाकर जनमत संग्रह तक की बात की थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उस अलगाववादी मानसिकता से कांग्रेस आज भी नहीं उभरी है।’’ चौहान ने कहा, ‘‘आज मैं कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी से सवाल पूछना चाहता हूं कि जम्मू कश्मीर में जो गुपकर गठबंधन बना है, आज सारा देश यह जानना चाहता है कि धारा 370 की समाप्ति का विरोध करने वालों और आतंकवाद को बढ़ावा देकर जम्मू-कश्मीर की फिज़ा में ज़हर घोलने वालों के साथ हाथ में हाथ डालकर कांग्रेस पार्टी क्यों खड़ी है?।’’ चौहान ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला ने 11 अक्टूबर को एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि वे लोग अनुच्छेद 370 की बहाली चीन की मदद से करेंगे। वहीं, 23 अक्टूबर को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती बोलती हैं कि वह उस वक्त तक तिरंगा नहीं उठाएंगी और न ही किसी को उठाने देंगी, जब तक कि उन्हें कश्मीर का झंडा वापस नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी वह नेता हैं जिन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने को असंवैधानिक कहा था और देश की सुरक्षा को खतरा बता दिया था। यह कांग्रेस पहली बार नहीं कह रही है। चौहान ने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘यहां के एक और नेता हैं जो अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन से जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू करवाएंगे। कांग्रेस बताए कि क्या कुछ और सुनना बाकी रह गया है।’’ उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस गुपकार गठबंधन के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव भी लड़ रही है। चौहान ने कहा, ‘‘वास्तव में कांग्रेस हमेशा से इन देशद्रोही ताकतों का साथ देती रही है। यहां तक कि कांग्रेस नेता पी चिदंबरम खुलेआम कह रहे हैं, गुलाम नबी आजाद कह रहे हैं कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 फिर से बहाल होनी चाहिए।’’ चौहान ने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस से सवाल पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस का अनुच्छेद 370 के बारे में दृष्टिकोण क्या है? मैडम सोनिया गांधी को स्पष्ट करना चाहिए। अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने के पक्ष में वह दोमुंही बातें क्यों कर रहे हैं? आतंकवादियों के साथ उनके रिश्ते क्या हैं? बटला हाउस एनकाउंटर के बाद क्यों सोनिया गांधी रात भर आंसू बहाती रहीं? क्यों दिग्विजय सिंह आतंकवादियों के साथ खड़े हुए?’’ चौहान ने कहा,‘‘ गुपकर गठबंधन’ बनाने का कारण ‘‘अब्दुल्लाओं, मुफ्तियों और एक गांधी परिवार की लूट की दुकान अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद बंद हो गई थी। इसलिए यह इनकी एकजुटता का कारण है। अब ये फिर से जम्मू-कश्मीर की हवा में ज़हर घोलने का प्रयास कर रहे हैं।’’ चौहान ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर खुली हवा में सांस ले रहा है। जिन गलियों में कभी खून के निशान दिखते थे, वहां प्राकृतिक सौंदर्य की महक आने लगी है।





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CM अमरिंदर ने किसानों के संघर्ष को बताया न्यायपूर्ण, कहा- सरकार किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:15
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CM अमरिंदर ने किसानों के संघर्ष को बताया न्यायपूर्ण, कहा- सरकार किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही
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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह उस पर ‘बैठ’ गए हैं।

सुलतानपुर लोधी। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संघर्ष को ‘न्यायपूर्ण’ बताते हुये केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही है और इस मुद्दे पर उसका हठी रवैया क्यों है। सिंह ने दोहराया कि उनकी सरकार इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़ी रहेगी।

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मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक कस्बों सुल्तानपुर लोधी और डेरा बाबा नानक की यात्रा के दौरान अनौपचारिक तौर पर मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘ जनता की बात सुनना सरकार का काम है । अगर कई राज्यों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि वे वास्तव में दुखी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मोदी शुरू से यही कह रहे हैं और यही वजह है कि पंजाब इसके लिए अपने विधेयक लेकर आया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह उस पर ‘बैठ’ गए हैं।





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किसानों और सरकार के बीच आज होगी बात, दोपहर 3 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:03
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किसानों और सरकार के बीच आज होगी बात, दोपहर 3 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी एवं सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के ​लिये आने का न्यौता दिया है। यह बैठक एक दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर बाद तीन बजे बुलायी गयी है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के नेताओं को कोविड-19 महामारी एवं सर्दी का हवाला देते हुये तीन दिसंबर की जगह मंगलवार को बातचीत के लिये आमंत्रित किया है। गौरतलब है कि हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर पिछले पांच दिनों से धरने पर हैं । केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ उनका यह धरना सोमवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। इन कानूनों के बारे में किसानों को आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा।

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तोमर ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी एवं सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के ​लिये आने का न्यौता दिया है। उन्होंने बताया कि अब यह बैठक एक दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर बाद तीन बजे बुलायी गयी है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को हुई बैठक में शामिल सभी किसान नेताओं को इस बार भी आमंत्रित किया गया है।

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इस बीच कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने 32 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों को पत्र लिख कर एक दिसंबर को चर्चा के लिये आमंत्रित किया है। अग्रवाल ने जिन संगठनों को पत्र लिखा है उनमें क्रांतिकारी किसान यूनियन, जम्मुहारी किसान सभा, भारतीाय किसान सभा (दकुदा), कुल हिंद किसान सभा और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं। इससे पहले 13 नवंबर को हुयी बैठक बेनतीजा रही थी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसानों को तीन दिसंबर को दूसरे दौर की बातचीत के लिये आमंत्रित किया था ताकि तीन नये कृषि कानूनों से उपजी उनकी चिंताओं का निराकरण किया जा सके।





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भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखने की माँग

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 30, 2020   23:30
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भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखने की माँग
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भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाए। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले जब गुरु नानक देव जी भारत भ्रमण पर निकले थे, तब वे भोपाल भी आए थे।

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने  प्रदेश की राजधानी  भोपाल स्थित ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि भोपाल की यह टेकरी ऐतिहासिक रूप से गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़ी हुई है। वही रामेश्वर शर्मा ने होशंगाबाद शहर का नाम बदलकर नर्मदापुरम रखने की वकालत की है। 

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भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाए। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले जब गुरु नानक देव जी भारत भ्रमण पर निकले थे, तब वे भोपाल भी आए थे। यहां गुरु नानक देव जी उसी टेकरी पर आए थे, जिसे ईदगाह हिल्स कहा जाता है। उन्होंने कहा कि पहले इस टेकरी को गुरुनानक टेकरी कहा जाता था, लेकिन बाद में यहां ईदगाह बन गई और उसका नाम ईदगाह हिल्स पड़ गया। अब इसे बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाना चाहिए। वही रामेश्वर शर्मा ने कहा कि होशंगाबाद का नाम भी बदलकर नर्मदापुरम किया जाना चाहिए। 





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