Shivraj Singh Chouhan ने किया Bihar Flood प्रभावित क्षेत्रों का दौरा, हर संभव केंद्रीय मदद का भरोसा दिया

Shivraj Singh Chouhan ने किया Bihar Flood प्रभावित क्षेत्रों का दौरा, हर संभव केंद्रीय मदद का भरोसा दिया
प्रतिरूप फोटो
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के कई जिलों में बाढ़ और फसल क्षति का जमीनी मुआयना किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर नुकसान का आकलन किया जा रहा है और केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की पूरी सहायता करेगी।

केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि हाल के वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ से प्रभावित बिहार के लोगों के साथ केंद्र सरकार मजबूती से खड़ी है और राज्य को हर संभव सहायता दी जाएगी। चौहान ने यह बात बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों के दौरे के दौरान कही। केंद्र सरकार उनके आकलन के आधार पर राज्य को दी जाने वाली केंद्रीय सहायता की मात्रा तय करेगी।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “आज बिहार में बाढ़ से हुई तबाही के बीच मैंने जमीनी स्थिति का आकलन किया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। राज्य सरकार पूरी तत्परता के साथ राहत कार्यों में जुटी हुई है।” उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ वैशाली, मुंगेर और भागलपुर जिलों के प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “केंद्र सरकार के दल भी नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

संकट की इस घड़ी में हम बिहार के लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं।” चौहान और मुख्यमंत्री ने पटना जिले के मनेर तथा सारण जिले के दिघवारा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री के साथ वैशाली जिले के तेरसिया और सरायपुर गांवों में नाव और ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा प्रभावित लोगों और किसानों से बातचीत कर फसल क्षति का जायजा लिया। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, नेपाल और बिहार में हुई भारी बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि से राज्य के 15 जिलों के लगभग 49.74 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। तेरसिया और सरायपुर गांवों के दौरे के बाद चौहान ने संवाददाताओं से कहा, “यह अब तक की सबसे भीषण बाढ़ है। मुझे बताया गया है कि इस बार पानी का स्तर 2016 की बाढ़ की तुलना में लगभग एक फुट अधिक है।

मैंने किसानों को हुए नुकसान को भी देखा है।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर मैं जमीनी स्थिति और नुकसान का आकलन करने आया हूं। राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता दे रही है।” चौहान ने कहा कि एक अन्य केंद्रीय टीम भी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने बिहार आएगी और केंद्र सरकार राज्य को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा, “बिहार सरकार ने हाल ही में प्रभावित परिवारों को राहत के रूप में 7,000 रुपये प्रति परिवार दिए हैं।

स्थिति से निपटने में राज्य सरकार का कार्य संतोषजनक है।” बाद में चौहान और मुख्यमंत्री ने पटना में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा बैठक के बाद चौहान ने कहा, “बिहार में 15 स्थानों पर तटबंध टूटने का खतरा था।

कई इलाके अब भी जलमग्न हैं, इसलिए नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो सका है। बिहार बाढ़ और सूखे, दोनों चुनौतियों से जूझ रहा है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर बाढ़ की स्थायी समस्या का समाधान खोज रही हैं।” इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने चौहान के दौरे को लेकर केंद्र सरकार की “देर से प्रतिक्रिया” की आलोचना की।

उन्होंने कहा, “आप बहुत देर से पहुंचे। बिहार की पीड़ा उनकी प्राथमिकता नहीं है। चार्टर्ड विमान से आने के बजाय वह धन बाढ़ पीड़ितों पर खर्च होता तो बेहतर होता।” वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र पर निशाना साधते हुए चौहान के दौरे को “फोटो शूट” करार दिया और आरोप लगाया कि बिहार के लिए कोई विशेष पैकेज घोषित नहीं किया गया।

तेजस्वी ने कहा, “केंद्र को कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केंद्रीय टीम का दौरा केवल फोटो शूट बनकर रह गया।” उन्होंने बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की और दावा किया कि प्रभावित परिवारों को 7,000 रुपये की राहत उनकी ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखे जाने के बाद दी गई।

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