Live-in पार्टनर का शादी से इनकार खुदकुशी के लिए उकसाना नहीं, Supreme Court का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ रिश्ता तोड़ने या शादी से इनकार करने पर किसी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस नहीं बनता। तेलंगाना के एक मामले में छह आरोपियों पर कार्यवाही रद्द करते हुए अदालत ने माना कि शादी से इनकार करना धारा 306 के तहत उकसाने का अपराध नहीं है, क्योंकि इसमें ऐसा कोई इरादा साबित नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस सिर्फ़ इसलिए नहीं चलाया जा सकता कि उसने लिव-इन पार्टनर के तौर पर रिश्ता खत्म कर लिया या शादी करने से इनकार कर दिया और इसके बाद दूसरे पार्टनर ने आत्महत्या कर ली। तेलंगाना के एक मामले में, जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने छह आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही रद्द करते हुए यह बात कही। इन आरोपियों में मृत महिला का पार्टनर, उसके माता-पिता, बहन और अन्य लोग शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि आरोपियों का इरादा महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करना था या उन्हें यह पता था कि शादी से इनकार करने पर वह अपनी जान दे देगी। बेंच ने कहा कि हालातों पर लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, और अगर किसी ब्रेकअप के बाद कोई आत्महत्या कर लेता है, तो इसे हमेशा आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता।
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अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि महिला और पहला आरोपी बचपन के दोस्त थे, उनकी आपसी सहमति से संबंध थे और वे लगभग तीन महीने तक साथ रहे थे। हालांकि शुरू में शादी का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में आरोपी ने परिवार और अन्य लोगों के दबाव में उससे शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने अपनी बहन से कहा कि अगर अगले दिन शादी नहीं हुई तो वह अपनी जान दे देगी। आरोपी के घर पर हुई बहस के बाद, उसने कथित तौर पर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और आत्महत्या कर ली। ट्रायल कोर्ट और तेलंगाना हाई कोर्ट ने कार्यवाही खत्म करने से इनकार कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अगर आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तो भी उनसे उकसाने (instigation) की कोई बात साबित नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "ज्यादा से ज्यादा, अगर हम शिकायतकर्ता की बात पर पूरी तरह यकीन भी कर लें, तो भी मामला सिर्फ़ शादी से इनकार का था, जिसके कारण महिला ने आत्महत्या कर ली।" कोर्ट ने माना कि इन आरोपों से IPC की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment) का मामला नहीं बनता।
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