Cauvery विवाद: तमिलनाडु ने पानी के लिए Supreme Court का रुख किया

तमिलनाडु सरकार ने पड़ोसी राज्य कर्नाटक से पानी का वाजिब हिस्सा दिलाने की मांग को लेकर सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। राज्य का कहना है कि उसे आवंटित और छोड़ा गया पानी बहुत कम है।
चेन्नई, तीन अगस्त तमिलनाडु सरकार ने पड़ोसी राज्य कर्नाटक के साथ कावेरी जल विवाद को लेकर सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की ओर से उसे आवंटित पानी की मात्रा और पड़ोसी राज्य की ओर से छोड़े गए पानी की मात्रा कम है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ वकीलों के साथ चर्चा की थी।
कावेरी जल विनियमन समिति की 28 जुलाई को हुई बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए 3,500 क्यूसेक (घन फुट प्रति सेकंड) पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। बाद में, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने भी इस आदेश को बरकरार रखा। हालांकि, बयान में कहा गया है कि 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलिगुंडलू में पानी की मात्रा 158-550 क्यूसेक के बीच रही।
कर्नाटक के जलाशयों -- कृष्णराज सागर (केआरएस), काबिनी, हारंगी और हेमवती -- में तीन अगस्त तक कुल 77.537 टीएमसी (अरब घन फुट) पानी था और कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का पानी छोड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी। बयान में कहा गया है कि हाल में कर्नाटक के कृष्णराज सागर और काबिनी बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद, बिलिगुंडलू (कृष्णागिरि जिला, तमिलनाडु) में छोड़े जाने वाला पानी 26.954 टीएमसी होना चाहिए। बयान के अनुसार, ‘‘इस लिहाज से, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का 4.536 टीएमसी पानी आवंटित करने का आदेश उपयुक्त मात्रा से बहुत कम है।’’ इसमें कहा गया है कि कर्नाटक, तमिलनाडु को पानी का उसका वाजिब हिस्सा देने में ‘‘नाकाम’’ रहा है।
बयान के अनुसार, ‘‘मुख्यमंत्री के निर्देश पर, इस मुद्दे का समाधान निकालने और तमिलनाडु को पानी का उसका वाजिब हिस्सा समय पर दिलाने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।
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