ऑनलाइन क्लासेज पर शिक्षकों ने बयां किया अपना हाल, कहा- रहता है दिमाग पर प्रेशर

ऑनलाइन क्लासेज पर शिक्षकों ने बयां किया अपना हाल, कहा- रहता है दिमाग पर प्रेशर

शिक्षकों ने बताया कि उनका काम केवल पढ़ाने तक ही सीमित नहीं रह गया है ।बल्कि हर बच्चे को क्लास में बुलाना, उनसे असाइनमेंट और बाकी एक्टिविटीज करवाना भी है।

कोरोना वायरस  के चलते बच्चों के स्कूल बंद होने के कारण  सरकारी से लेकर निजी स्कूलों तक बच्चों की जूम, गूगल मीट और माइक्रोसॉफ्ट जैसी एप्स के जरिए ऑनलाइन क्लास  चल रही हैं ।जो सिर्फ ऑनलाइन क्लास रूम तक सीमित ना  होकर शिक्षकों की निजी जिंदगी तक पहुंच गई हैं।

शिक्षकों ने बताया कि उनका कामं केवल  पढ़ाने तक ही सीमित नहीं रह गया है ।बल्कि हर बच्चे को क्लास में बुलाना, उनसे असाइनमेंट और बाकी एक्टिविटीज करवाना भी है।

शिक्षक बताते हैं कि उन्हें पता ही नहीं होता कि स्क्रीन के पीछे  बच्चे  किस काम में लगे हैं। वह घर वालों के साथ बातचीत में लगे रहते हैं आधा क्लास का टाइम तो शिक्षकों का बच्चों को डांटने में ही निकल जाता है ।शिक्षक बताते हैं कि कई बच्चों के घर वाले उनके साथ बैठे होते हैं और उन पर अलग तरह का मानसिक दबाव रखते हैं ।

ऑनलाइन क्लासेज के दौरान टीचर्स को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वे बताते हैं कि लगभग 65% ऑनलाइन क्लासेज के दौरानं पेरेंट्स  अपने बच्चों को खाना खिलाते हैं ।ऑनलाइन क्लासेस का दायरा यहीं तक नहीं रह गया है वे मानते हैं कि टीवी स्क्रीन के आगे बैठकर बच्चे खाना खाते हैं ,अब टीवी स्क्रीन की जगह ऑनलाइन क्लासेस ने ले ली है।

25% पेरेंट्स का मानना है कि ऐसे में उनके बच्चे आसानी से खाना खा लेते हैं ।यह पाया गया है कि कक्षा के दौरान खाने को लेकर यह समस्या मुख्य रूप से  सुबह जल्दी होने वाले इस सेशनस में देखी गई है। 

पेरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चों को 8:30am से 1:30 pmतक स्क्रीन पर रहना पड़ता है ऐसे में वे अपना नाश्ता भी स्किप कर देते हैं, या कुछ जल्दी जल्दी में खाते हैं इसके पीछे का मुख्य कारण बच्चों का लेट से उठना देखा  गया है।





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