Thane Court ने पुलिसकर्मियों से मारपीट के आरोपी कारोबारी Sher Bahadur Singh को बरी किया

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने 2017 में पुलिसकर्मियों पर हमले और धमकी देने के आरोपी कारोबारी शेर बहादुर सुरेश सिंह को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.एस. रेंगे ने गवाहों के बयानों में विसंगतियों और सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पार्षद के पति और कारोबारी शेर बहादुर सुरेश सिंह को 2017 में गाड़ी उठाने की कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों को धमकाने और उनके साथ मारपीट करने के मामले में गवाहों के बयानों में विसंगतियों का हवाला देते हुए बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.एस. रेंगे ने बृहस्पतिवार को सिंह को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक धमकी देने और सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने के आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला 29 सितंबर, 2017 की एक घटना से जुड़ा है, जब अवैध पार्किंग की शिकायतों के बाद ठाणे के नालपाडा इलाके में एक निजी क्रेन के साथ पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सिंह ने पुलिस टीम के सदस्यों को अपशब्द कहे, उन्हें धमकी दी और क्रेन में आग लगा दी। साथ ही उन्होंने एक पुलिसकर्मी को गाड़ी से बाहर खींचने की कोशिश भी की। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के एक गवाह ने हालांकि स्वीकार किया कि बहस की शुरुआत सिंह द्वारा टीम से सवाल करने और निजी क्रेन के इस्तेमाल के लिए कानूनी पंजीकरण व अनुमति पत्र मांगे जाने से शुरू हुई।

अदालत ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष क्रेन के पंजीकरण की जानकारी, मालिकाना हक के दस्तावेज, अनुबंध या अनुमति पत्र पेश करने में नाकाम रहा। साथ ही, वह ऐसा कोई दस्तावेजी या आधिकारिक सबूत भी पेश नहीं कर पाया जिसके आधार पर वाहन उठाने का कार्य किया जा रहा था। न्यायाधीश ने इसी के साथ गवाहों के बयानों में विसंगति, चिकित्सा संबंधी साक्ष्यों की कमी, घटना वाली जगह पर ‘नो पार्किंग’ का कोई चिह्न न होने और भीड़-भाड़ वाली जगह पर घटना होने के बावजूद अभियोजन पक्ष द्वारा स्वतंत्र गवाहों से पूछताछ न करने जैसे तथ्यों को भी संज्ञान में लिया।

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