पत्नी का सेक्स करने का नहीं है मूड तो 66 % पति तहते हैं 'कोई बात नहीं', 30 प्रतिशत अभी भी बनाने हैं जबरन संबंध

पत्नी का सेक्स करने का नहीं है मूड तो 66 % पति तहते हैं 'कोई बात नहीं', 30 प्रतिशत अभी भी बनाने हैं जबरन संबंध
prabhasakshi

एक पति पत्नी के रिश्ते में शारीरिक संबंध बनाना आम बात है। दोनों की रजामंदी से संबंध बनाए जाते हैं। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी वारदातें भी आयी है जिसमें यह देखा गया है कि पत्नी की इच्छा के विरुद्ध भी पति जबरन शारीरिक संबंध बनाने हैं।

एक पति पत्नी के रिश्ते में शारीरिक संबंध बनाना आम बात है। दोनों की रजामंदी से संबंध बनाए जाते हैं। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी वारदातें भी आयी है जिसमें यह देखा गया है कि पत्नी की इच्छा के विरुद्ध भी पति जबरन शारीरिक संबंध बनाने हैं। कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया और जबरन पत्नी से शरीरिक संबंध बनाने को रेप माना है। इसके बाद भी अपना परिवार बनाएं रखने के लिए कई औरते हैं तो पतियों के अत्याचार को चुपचार घर के अंदर सहती हैं रोज राज उनकी हवस का शिकार होती हैं। एक सर्वे किया गया हैं इस मुद्दे पर जिसमें कुछ आंकड़े चौंकाने वाले आये हैं।  भारत में लगभग एक तिहाई महिलाओं ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है, जैसा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -5 रिपोर्ट में पाया गया है। इसके अलावा इस सर्वें में एक अच्छी जो बात सामने निकल कर सामने आयी है कि 66 प्रतिशत पुरूषों के अंजर अपनी पत्नी को लेकर दया भाव और प्रेम की भावना है। वह अपनी पत्नी को सेक्स के लिए जबरदस्ती नहीं करते हैं। यदि रात के समय महिला थकी है और वह संबंध नहीं बनाना चाहती है तो पति उन्हें 'कोई बात नहीं' कहते हैं। उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर नहीं करते हैं। 

 

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घरेलू हिंसा में आयी थोड़ी कमी

इसके अलावा देश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा 31.2% से घटकर 29.3% हो गई है, 18 से 49 वर्ष की आयु की 30% महिलाओं ने 15 वर्ष की आयु से शारीरिक हिंसा का अनुभव किया है, जबकि 6% ने अपने जीवनकाल में यौन हिंसा का अनुभव किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने गुरुवार को यह रिपोर्ट जारी की।

 

32% विवाहित महिलाओं ने  वैवाहिक हिंसा का किया अनुभव

सर्वेक्षण में पाया गया है कि 32% विवाहित महिलाओं (18-49 वर्ष) ने शारीरिक, यौन या भावनात्मक वैवाहिक हिंसा का अनुभव किया है। वैवाहिक हिंसा का सबसे आम प्रकार शारीरिक हिंसा (28%) है, जिसके बाद भावनात्मक हिंसा और यौन हिंसा होती है। इसके विपरीत, देश में केवल 4% पुरुष घरेलू हिंसा के मामलों का सामना करते हैं।

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महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा सबसे अधिक 48% कर्नाटक में है, इसके बाद बिहार, तेलंगाना, मणिपुर और तमिलनाडु का स्थान है। लक्षद्वीप में सबसे कम घरेलू हिंसा 2.1% है। शारीरिक हिंसा का अनुभव ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं (32%) में शहरी क्षेत्रों (24%) में उनके समकक्षों की तुलना में अधिक आम है और हिंसा का एक महिला का अनुभव स्कूली शिक्षा और धन में वृद्धि के साथ तेजी से घटता है - महिला पीड़ित दोनों के लिए, जैसा कि साथ ही पुरुष अपराधी।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि स्कूली शिक्षा पूरी न करने वाली 18% महिलाओं की तुलना में 40% महिलाएं शारीरिक हिंसा का शिकार होती हैं। सबसे कम वेल्थ क्विंटाइल में महिलाओं के बीच शारीरिक हिंसा का अनुभव 39% और सबसे अधिक वेल्थ क्विंटल में 17% के बीच है।





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