अमेरिकी वाणिज्य मंत्री Howard Lutnick अचानक से भागे भागे भारत आये, Trade Deal पर India-US ने की बात

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यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। इस सप्ताह दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की वाशिंगटन में बैठक प्रस्तावित थी, जहां अंतरिम समझौते को औपचारिक रूप देने पर चर्चा होनी थी।

अमेरिकी शुल्क नीति पर उठे कानूनी और कूटनीतिक दबावों के बीच अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक आज भागे भागे भारत आये और यहां नयी दिल्ली में उन्होंने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अहम मुलाकात की। इस दौरान भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद रहे। इस मुलाकात में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि बातचीत बेहद सार्थक रही और दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया। वहीं सर्जियो गोर ने भी बैठक को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे दोनों देशों के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम करार दिया।

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हम आपको बता दें कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। इस सप्ताह दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों की वाशिंगटन में बैठक प्रस्तावित थी, जहां अंतरिम समझौते को औपचारिक रूप देने पर चर्चा होनी थी। हालांकि हाल ही में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक शुल्क आदेश को निरस्त किए जाने के बाद स्थिति में नया मोड़ आ गया है। अमेरिकी न्यायालय ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लगाए गए इन शुल्कों को अवैध ठहराया, जिससे ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति को झटका लगा है।

अदालत के फैसले के बाद अमेरिका सरकार ने सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लागू करने की घोषणा की है। बाद में इसे 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का संकेत भी दिया गया, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक आदेश अभी जारी नहीं हुआ है।

हम आपको यह भी बता दें कि अभी एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में अपने शुल्क एजेंडे का जोरदार बचाव किया था जबकि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर हुए व्यापार समझौतों को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है। इस घटनाक्रम ने उन द्विपक्षीय समझौतों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जो पूर्व में आपात प्रावधानों के आधार पर तय किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी प्रशासन धारा 301 जैसे अन्य प्रावधानों के तहत शुल्क संरचना पुनर्निर्मित करना चाहता है तो उसे औपचारिक जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे वार्ताओं में समय और जटिलता दोनों बढ़ सकती हैं। साथ ही ट्रंप ने सभी देशों को चेतावनी भी दी है कि यदि हालात को फायदा उठाने की कोशिश करते हुए सौदेबाजी का प्रयास किया गया तो ज्यादा टैरिफ लगेगा।

हम आपको याद दिला दें कि अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क और जोड़े जाने से भारत पर कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया था। इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ा और व्यापारिक असंतुलन को लेकर चिंताएं गहराईं। इसी पृष्ठभूमि में इस साल फरवरी की शुरुआत में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी थी। बदले में भारत ने पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों की खरीद की योजना का संकेत दिया था।

इस समझौते का उद्देश्य पहले चरण को औपचारिक रूप देना और आगे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखना था। हालांकि न्यायालय के हालिया फैसले के बाद भारत ने वाशिंगटन जाने वाले अपने प्रतिनिधिमंडल की यात्रा स्थगित कर दी है। इसके बावजूद मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि समझौते पर पुनर्विचार नहीं किया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि नई परिस्थिति में भारत भविष्य में संभावित एकतरफा या न्यायिक हस्तक्षेप से उत्पन्न जोखिमों के चलते सुरक्षा उपायों की मांग कर सकता है। साथ ही वह अपने ऊर्जा और घरेलू आर्थिक हितों को संतुलित रखते हुए अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने का प्रयास करेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि न्यायालय के फैसले के पूर्ण प्रभाव पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने संकेत दिया था कि सरकार सभी पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रही है ताकि वाणिज्यिक हितों की रक्षा करते हुए द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन बना रहे।

बहरहाल, पीयूष गोयल और लुटनिक की ताजा बैठक से संकेत मिलता है कि दोनों देश अस्थिर वैश्विक व्यापार माहौल के बीच संवाद की राह खुली रखना चाहते हैं। शुल्क विवाद, न्यायिक हस्तक्षेप और घरेलू राजनीतिक प्राथमिकताओं के बावजूद दोनों पक्ष व्यापक आर्थिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं। आने वाले सप्ताहों में यह स्पष्ट होगा कि अमेरिकी न्यायालय के फैसले के बाद संशोधित परिस्थितियों में अंतरिम समझौते को किस स्वरूप में आगे बढ़ाया जाता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद यह संकेत देता है कि रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देने की साझा इच्छा बरकरार है।

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