School से Cinema Hall तक गूंजेगा वंदे मातरम, Home Ministry ने जारी किया नया National Protocol

Vande Mataram
ANI
अंकित सिंह । Feb 11 2026 12:13PM

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत इसे सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान से पहले गाना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रगीत के लिए एक समान प्रोटोकॉल स्थापित करना है, जिसमें सभी छह श्लोकों को शामिल करने से राजनीतिक विवाद की संभावना है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को वंदे मातरम के संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें कहा गया है कि सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम गाया जाना चाहिए और इसके बजने के दौरान सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में लिखा था और 1950 में अपनाया गया था। अब पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक पुरस्कार समारोहों और राष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित होने वाले सभी अन्य कार्यक्रमों में उनके आगमन और प्रस्थान के दौरान राष्ट्रगीत बजाना अनिवार्य होगा। 

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सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी राष्ट्रगीत बजाया जाएगा, हालांकि इस दौरान खड़े होना अनिवार्य नहीं है। और इसके सभी छह श्लोक बजाए जाएंगे, जिनमें वे चार श्लोक भी शामिल हैं जिन्हें कांग्रेस ने 1937 में हटा दिया था। पहले, जन गण मन राष्ट्रगान की तरह वंदे मातरम के लिए कोई स्पष्ट राष्ट्रीय प्रोटोकॉल परिभाषित नहीं था। इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रगीत के सम्मानपूर्वक पालन को औपचारिक रूप देना और आधिकारिक समारोहों, विद्यालयों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एकरूपता सुनिश्चित करना है। यह कदम संसद में राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व पर हुई बहसों के बाद राष्ट्रीय प्रतीकों को लोकप्रिय बनाने और उन पर जोर देने के निरंतर प्रयासों को भी दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक साल तक चलने वाले समारोह का शुभारंभ किया है और यह मुद्दा संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्ताधारी सरकार और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच विवाद का मुख्य कारण भी बन गया था। इस निर्देश और उन चार श्लोकों को शामिल करने से विवाद खड़ा होने की संभावना है, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले साल इस मुद्दे पर सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस के बीच जबरदस्त लड़ाई हुई थी।

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यह घटना तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूर्ववर्ती जवाहरलाल नेहरू पर मुहम्मद अली जिन्ना का अनुसरण करते हुए इस गीत का विरोध करने का आरोप लगाया क्योंकि इससे मुसलमानों को ठेस पहुंच सकती थी। इसके बाद भाजपा ने अपने दावे के समर्थन में नेहरू के पत्र साझा किए और गीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में हुई 'बहस' के बाद यह विवाद कटुतापूर्ण हो गया।

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