ट्रेकिंग, किताबें और AI डांस: वी डी सतीशन ने बातचीत में खोले जिंदगी के कई अनछुए पहलू

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केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने एक साक्षात्कार के दौरान अपने व्यक्तिगत शौक, खानपान की आदतों और पसंदीदा लेखकों के बारे में खुलकर बातचीत की। उन्होंने 18 साल की उम्र से जंगलों में ट्रेकिंग करने, अनुशासित भोजन शैली और एआई डांस वीडियो पर अपने अनुभव साझा किए। सतीशन ने सोशल मीडिया पर नई तकनीकों के दुरुपयोग को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दी।

(विजय जोशी) तिरुवनंतपुरम, 12 अक्टूबर केरलम के जंगल में ट्रेकिंग करना, जवाहरलाल नेहरू या ओरहान पामुक की किताब पढ़ना और अपने राज्य के विविध व्यंजनों का स्वाद लेना—ये मुख्यमंत्री वी डी सतीशन की कुछ पसंदीदा चीजें हैं। हालांकि, वह यह बताने में भी देर नहीं करते कि खाने के मामले में वह मेज से उठने से पहले अपना पेट आधा ही भरते हैं। और हां, उनसे कभी डांस के लिए मत कहिएगा।

डांस का काम वह अपने एआई अवतार पर छोड़ देंगे। सतीशन के साथ बातचीत की शुरुआत राजनीति, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर सवालों से हुई, लेकिन करीब एक घंटे बाद बात उनके शौक, पसंद-नापसंद और आदतों की ओर मुड़ गई। ‘पीटीआई वीडियो’ के तीन कैमरों के सामने सतीशन के व्यक्तित्व के नए पहलू सामने आने लगे।

सतीशन से जब पूछा गया कि अगर उन्हें केरलम में एक दिन आम पर्यटक की तरह बिताने का मौका मिले, तो वह किस जगह जाना पसंद करेंगे, तो उन्होंने बिना देर किए जवाब दिया। सतीशन (62) ने कहा, “सबसे पहले, बेशक जंगल। मुझे ट्रेकिंग का शौक है।

मैंने 18 साल की उम्र से जंगल में ट्रेकिंग शुरू कर दी थी। मुझे ट्रेकिंग का बहुत जुनून है। जब भी मौका मिलता है, मैं जंगल में जाता हूं।

केरलम के जंगल बेहद खूबसूरत हैं। मैंने दक्षिण भारत के सभी जंगल में ट्रेकिंग की है।” सतीशन की राजनीति में रुचि 15 साल की उम्र में पैदा हुई और उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की रचनाओं को पढ़ना शुरू किया। बातचीत के दौरान नेहरू का जिक्र फिर आया, जब उनसे पूछा गया कि वह किन तीन लोगों के साथ रात का भोजन करना चाहेंगे, चाहे वे जीवित हों या दिवंगत।

सतीशन ने कहा, “यह बहुत अच्छा सवाल है। जीवित या दिवंगत, दोनों में से कोई भी?” थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, “पहले नंबर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू। दूसरे नंबर पर ओरहान पामुक, जो मेरे पसंदीदा लेखक हैं।

और तीसरे नंबर पर, बेशक, गैब्रियल गार्सिया मार्केज।” जब उनसे कहा गया कि वह काफी फिट और छरहरे हैं, तो सतीशन ने माना कि वह अपने खानपान को लेकर अनुशासित हैं। उन्होंने कहा, “हां, मैं (भूख मिटाने के लिए जरूरी भोजन का) सिर्फ आधा ही खाता हूं। फिर खाना बंद कर देता हूं।” यह पूछे जाने पर उनकी नजर में मलयाली लोगों का एक विशिष्ट गुण क्या है, तो उन्होंने कहा, “यह समुदाय और जगह के हिसाब से अलग-अलग होता है।

उदाहरण के लिए, उत्तरी केरलम के मालाबार में लोग आपको कॉफी पीने के लिए बुलाएंगे। जब आप कॉफी पीने बैठेंगे, तो खाने की मेज पर तरह-तरह के पकवान सजे होंगे। हो सकता है कि वहां 50 से भी ज्यादा व्यंजन हों।” जब उनसे पूछा गया कि कोच्चि जैसी दूसरी जगहों पर कॉफी के साथ क्या मिलता है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मैं कोच्चि से हूं।

(कोच्चि में) अगर आपकी किस्मत अच्छी रही, तो कॉफी के साथ बिस्कुट भी मिल जाएगा।” इसके बाद सतीशन ने केरलम के अलग-अलग इलाकों में मिलने वाले विविध व्यंजनों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “तलश्शेरी बिरयानी और अन्य व्यंजनों के लिए मशहूर है।” उन्होंने बताया कि तलश्शेरी के लोग अक्सर देश के दूसरे राज्यों में काम करते नजर आते हैं। पुणे और मुंबई में बेकरी संचालित करने वालों में भी तलश्शेरी के कई लोग शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘त्रिशूर में ईसाई समुदायों के अपने खास व्यंजन हैं। मछली, मांस और कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। ईसाई समुदायों में भी खानपान एक संप्रदाय से दूसरे संप्रदाय के हिसाब से अलग होता है।

सीरियाई ईसाई समुदाय का एक खास व्यंजन है, जबकि जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स समुदायों के व्यंजन अलग हैं। लैटिन समुदाय के व्यंजन भी इनसे अलग होते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सबके स्वाद अलग-अलग होते हैं। केरलम के मध्यवर्ती हिस्से में स्थित कुट्टनाड और चंगनाशेरी इलाकों में बत्तख के मांस से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं।’’ केरलम की 3.3 करोड़ की आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी 18.5 प्रतिशत है।

आगे बातचीत में सतीशन ने बताया कि स्कूल और कॉलेज के दिनों में उनका सपना उच्चतम न्यायालय में वकालत करने का था। स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने केरल उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की। उन्होंने कहा, ‘‘नौ साल तक वकालत करने के बाद मैं 2001 में विधायक बन गया।

विधायक के तौर पर अब मेरे 25 साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन मुझे आज भी वकालत के पेशे से प्यार है। कानूनी मुद्दों में मेरी गहरी रुचि है।’’ हाल के महीनों में भारतीय राजनीति में हलचल मचाने वाली प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सवाल पूछने का यह अच्छा मौका था।

सतीशन की नजर में सीजेआई कैसे हैं? उन्होंने कहा, ‘‘भारत के प्रधान न्यायाधीश एक वरिष्ठ वकील और न्यायिक क्षेत्र की वरिष्ठ शख्सियत हैं, जिन्हें मैं जानता हूं। मैं समझ सकता हूं कि आप यह सवाल किस मंशा से पूछ रहे हैं।

उन्होंने एक टिप्पणी की थी। नेताओं और न्यायपालिका से जुड़े लोगों को अपने पद पर रहते हुए बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए। मुझे भी बयान देते समय बहुत सावधान रहना चाहिए।’’ सतीशन ने कहा कि सोशल मीडिया में हर चीज को सकारात्मक या नकारात्मक, किसी भी रूप में बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की ताकत है।

उदाहरण के लिए, उनके डांस करते हुए एआई से बनाए गए वीडियो को ही ले लीजिए? सतीशन को उस वीडियो से कोई बुरा नहीं लगा और वह उन युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करवाना चाहते थे, जिन्होंने उसे बनाया था। लेकिन क्या वह वास्तव में डांस करते हैं?

उन्होंने कहा, “नहीं... मैंने सिर्फ कॉलेज के दिनों में डांस किया था। कॉलेज के बाद मुझे डांस करने का मौका नहीं मिला। कॉलेज में भी मैंने तो बस साधारण सा डांस किया था, कोई डांस विशेषज्ञ नहीं था।

लेकिन यह वीडियो बहुत अच्छा था। इसे एआई की मदद से त्रिशूर के दो युवाओं ने बनाया था। मुझे यह देखकर बहुत मजा आया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘छोटे बच्चों ने मुझसे कहा कि उन्हें लगा कि यह असली डांस है।

कुछ बच्चों ने तो यह भी कहा कि मैं तमिलनाडु के अपने सहयोगी विजय (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिल फिल्म अभिनेता) से बेहतर डांस कर रहा हूं। वह एक मशहूर डांसर हैं और केरलम में भी उनके प्रशंसक हैं।’’ कांग्रेस नेता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े खतरों पर बात की। उन्होंने कहा, “नयी तकनीकों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

एआई का हर तरह से, खासकर सोशल मीडिया पर, दुरुपयोग किया जा सकता है। हमें बहुत सावधान रहना चाहिए।” बातचीत को समेटने का समय हो गया था। हमने उनसे पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या दोस्तों के साथ उनके व्यवहार या दोस्तों के उनके प्रति रुख में कोई बदलाव आया है।

उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, नहीं। कॉलेज के दिनों से ही वे सभी मेरे अच्छे और करीबी दोस्त हैं। वे कई मुद्दों पर मेरी आलोचना भी करते हैं।

अगर मैं कुछ ऐसा करता हूं, जिसे वे गलत मानते हैं, तो फोन करके कहते हैं, ‘यार, तुम यह क्या कर रहे हो?’ अगर मैं सार्वजनिक रूप से किसी गलत शब्द का इस्तेमाल करता हूं या गलत शब्दावली का प्रयोग करता हूं, तो वे इस पर भी नजर रखते हैं। वे कहते हैं, ‘नहीं, इस तरह मत कहो। हमें तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं है।’” क्या वह रविवार को छुट्टी लेते हैं?

उन्होंने कहा, “रविवार सबसे व्यस्त दिन होता है! रविवार सुबह साढ़े पांच बजे से ही मेरे घर में मिलने आने वाले लोगों की भीड़ लग जाती है। मुझे सुबह पांच बजे उठना पड़ता है।

तभी मैं लोगों से मिल पाता हूं।” इसके बावजूद, उन्हें मुख्यमंत्री पद से कोई खास लगाव नहीं है। सतीशन ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री पद को एक जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं, न कि किसी दिखावटी पद के तौर पर। यह एक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मैं इसे ईश्वर की ओर से सौंपी गई जिम्मेदारी मानता हूं। मैं आस्तिक हूं।

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