'अंग्रेजों से सावरकर ने मांगी होती माफी तो कोई न कोई पद मिल जाता', पौत्र बोले- गांधी को राष्ट्रपिता नहीं कहा जा सकता

'अंग्रेजों से सावरकर ने मांगी होती माफी तो कोई न कोई पद मिल जाता', पौत्र बोले- गांधी को राष्ट्रपिता नहीं कहा जा सकता

रंजीत सावरकर ने कहा कि मेरे दादा ने सभी राजनीतिक बंदियों के लिए आम माफी मांगी थी। यदि उन्होंने वास्तव में अंग्रेजों से माफी मांगी होती तो उन्हें कोई न कोई पद दिया गया होता।

नयी दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी के बाद बयानबाजी शुरू हो गई। इसी बीच विनायक दामोदर सावरकर के पौत्र रंजीत सावरकर का बयान सामने आया। दरअसल, राजनाथ सिंह ने 'वीर सावरकर हु कुड हैव प्रीवेंटेड पार्टिशन' नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कहा था कि महात्मा गांधी के कहने पर वीर सावरकर ने अंग्रेजी शासन को दया याचिकाएं दी थीं।

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समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में रंजीत सावरकर ने कहा कि मेरे दादा ने सभी राजनीतिक बंदियों के लिए आम माफी मांगी थी। यदि उन्होंने वास्तव में अंग्रेजों से माफी मांगी होती तो उन्हें कोई न कोई पद दिया गया होता।

गांधी को लेकर क्या बोले रंजीत ?

इसी बीच रंजीत सावरकर ने महात्मा गांधी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जैसे व्यक्ति को राष्ट्रपिता नहीं कहा जा सकता क्योंकि देश के निर्माण में हजारों लोगों ने अपना योगदान दिया है, जिसका 5,000 साल से अधिक का इतिहास है।

वहीं उन्होंने संवाददाता द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि वीर सावरकर को राष्ट्रपिता कहा जाए ऐसी मांग कोई नहीं कर रहा है क्योंकि वीर सावरकर को यह अवधारणा खुद स्वीकार्य नहीं थी। 

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आपको बता दें कि वीर सावरकर पर टिप्पणी करने के बाद राजनाथ सिंह विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि वीर सावरकर की ओर से पहली दया याचिका साल 1911 में जेल जाने के 6 महीनों बाद दी गई थी और उस समय महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में थे।





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