शत्रुघ्न सिन्हा और बाबुल सुप्रियो को TMC का टिकट तो मिल गया, पर दोनों नेताओं को मुस्लिम शक से देख रहे हैं

Shatrughan Sinha babul
जहां तक शत्रुघ्न सिन्हा की बात है तो आपको याद दिला दें कि वर्षों तक भाजपा में रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने 2019 में कांग्रेस का हाथ थाम लिया था और बिहार की पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गये थे।

बॉलीवुड के शॉटगन के रूप में विख्यात शत्रुघ्न सिन्हा ने आज पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। यही नहीं भाजपा से दो बार लोकसभा चुनाव जीते बाबुल सुप्रियो ने भी तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बॉलीगंज विधानसभा सीट से उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। अब यह दोनों प्रत्याशी चुनाव मैदान में गये तो बड़े जोश से हैं लेकिन बंगाल में इन दोनों को अपनी धर्मनिरपेक्षता साबित करनी पड़ रही है। दोनों नेता दुहाई दे रहे हैं कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं हमें शक की निगाह से मत देखिये।

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जहां तक शत्रुघ्न सिन्हा की बात है तो आपको याद दिला दें कि वर्षों तक भाजपा में रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने 2019 में कांग्रेस का हाथ थाम लिया था और बिहार की पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गये थे। कांग्रेस की लगातार हार के चलते शत्रुघ्न सिन्हा काफी समय से राजनीतिक रूप से किनारे चल रहे थे लेकिन जब पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट पर उपचुनावों की घोषणा हुई तो वह एक बार फिर चर्चा में आ गये क्योंकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें इस सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। हम आपको बता दें कि यह सीट बाबुल सुप्रियो की ओर से लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई है। बाबुल सुप्रियो ने साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी लेकिन पिछले साल वह भाजपा से इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे।

दल बदल में माहिर हो गये हैं शत्रुघ्न सिन्हा

जहां तक शत्रुघ्न सिन्हा की बात है तो यह सही है कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का बड़ा समय भाजपा के साथ गुजारा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों के उनके फैसलों पर निगाह डाली जाये तो अब वह किसी एक विचारधारा के साथ खड़े नजर नहीं आते हैं। साल 2019 का लोकसभा चुनाव वह कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पटना साहिब सीट से लड़ रहे थे और अपनी पत्नी पूनम सिन्हा को उत्तर प्रदेश की लखनऊ संसदीय सीट से सपा-बसपा महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस के खिलाफ ही चुनाव लड़वा रहे थे। बिहार विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपने बेटे को कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा लेकिन वह भी नाकाम रहे। यही नहीं हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा आम आदमी पार्टी से भी नजदीकियां बढ़ाते नजर आये थे। अब कांग्रेस पार्टी को बिना औपचारिक रूप से छोड़े हुए शत्रुघ्न सिन्हा तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा को मिली इस उम्मीदवारी के पीछे चुनाव चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर हैं।

मोदी से अपनी तुलना

दूसरी ओर, भाजपा ने शत्रुघ्न सिन्हा को आसनसोल में बाहरी उम्मीदवार बताया तो उन्होंने अपनी तुलना सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करते हुए कह दिया कि भगवा पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में ऐसा क्यों नहीं कहती जो वाराणसी से चुनाव लड़ते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री जैसी राष्ट्रीय हस्ती का कहीं और से चुनाव लड़ना स्वीकार्य है तो मेरे लिये भी यही होना चाहिये। सोमवार को नामांकन दाखिल करने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आसनसोल की जनता तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के नाम पर वोट डालेगी, जो बंगाल के विकास के लिये हमेशा खड़ी रही हैं। हम आपको बता दें कि आसनसोल लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 12 अप्रैल को मतदान होगा और मतगणना 16 अप्रैल को होगी।

अग्निमित्रा पर भाजपा को भरोसा

आसनसोल लोकसभा सीट से भाजपा ने अपनी महिला नेत्री और विधायक अग्निमित्रा पॉल को उम्मीदवार बनाया है। अग्निमित्रा ने सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले मंदिर में पूजा अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया और फिर शत्रुघ्न सिन्हा पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह बॉलीवुड में अच्छे लगते हैं। उन्होंने पूछा है कि उनका पिछला रिकॉर्ड क्या है? अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा पहले कांग्रेस में थे फिर भाजपा में आए और अब टीएमसी में हैं। उन्होंने कहा कि अगर 1-2 साल में उनको कुछ अच्छा नहीं मिला तो वह किसी और दल में चले जाएंगे इसलिए आसनसोल के लोग शत्रुघ्न सिन्हा पर भरोसा नहीं कर सकते।

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धर्मनिरपेक्षता की परीक्षा

भाजपा आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन बयानों को भी बड़ा मुद्दा बना रही है जो उन्होंने कथित तौर पर यूपी और बिहार के लोगों के बारे में दिये थे। शुभेंदु अधिकारी समेत कई भाजपा नेता तृणमूल कांग्रेस के उन नेताओं के बयान सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं जो उन्होंने बिहार के लोगों के खिलाफ दिये थे। देखना होगा कि शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का कैसे मुकाबला करते हैं। वैसे शत्रुघ्न सिन्हा के लिए एक मुश्किल यह भी खड़ी हो रही है कि आसनसोल में मुसलमान भी उनका विरोध कर रहे हैं। हम आपको बता दें कि इस क्षेत्र में मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी है। सोशल मीडिया पर शत्रुघ्न सिन्हा की भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ की तस्वीरें साझा की जा रही हैं और पूछा जा रहा है कि जो व्यक्ति कथित बाबरी ध्वंस के आरोपी रहे व्यक्ति के साथ रहा हो उस पर मुस्लिम समाज कैसे भरोसा कर सकता है।

पश्चिम बंगाल में इस समय आसनसोल के अलावा बॉलीगंज विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। यह सीट टीएमसी नेता सुब्रत मुखर्जी के निधन से खाली हुई है। तृणमूल कांग्रेस ने यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को प्रत्याशी घोषित किया है तो भाजपा ने पार्टी की महिला मोर्चे की नेता केया घोष को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बाबुल सुप्रियो को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में इमामों के एक निकाय ने उनका विरोध करते हुए उनकी 'धर्मनिरपेक्षता' पर सवाल उठाये हैं। जिसके बाद गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो ने विरोध कर रहे लोगों से मुलाकात की और अपने बारे में उनकी आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। बाबुल सुप्रियो ने कहा है कि वह बंगाल की धर्मनिरपेक्ष संस्कृति के लिए प्रतिबद्ध हैं। सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद उन्होंने कहा कि मैं अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हूँ।

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