West Bengal में 17 सितंबर से शुरू होगा Seva Sankalp Abhiyan, सरकारी योजनाओं को लेकर चलेगा अभियान

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पश्चिम बंगाल प्रशासन 17 सितंबर से 10 अक्टूबर तक राज्य भर में जन-जागरूकता और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके तहत स्कूलों में प्रतियोगिताओं से लेकर आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण व स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां चलाई जाएंगी।

पश्चिम बंगाल सरकार 17 सितंबर से 10 अक्टूबर तक राज्यव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित करेगी। इसके तहत सरकारी योजनाओं और सेवाओं के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने तथा उनके बेहतर क्रियान्वयन और पहुंच से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को है और उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में देशभर में महीने भर ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि राज्य सरकार ने सभी विभागों, जिला प्रशासनों, नगरपालिकाओं और प्रखंड प्रशासनों को इन कार्यक्रमों के लिए समन्वय करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सेवाओं को लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाना, नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को बढ़ावा देना है। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को ‘आशीर्वादेर प्रदीप’ कार्यक्रम से होगी, जिसके तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थी और उनके परिवार के सदस्य मिलकर दीप जलाएंगे।

जनभागीदारी के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थानों पर भी दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों के माध्यम से ‘अमार स्वप्नेर भारत — चित्र सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी से भाषण, चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं तथा प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। इसी अवधि में ‘नमो सेवा — ओजाना कहिनी’ के तहत संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जनसेवा और कल्याण से जुड़ी पहलों को उजागर किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि ‘अन्न मिलन सेवा’ कार्यक्रम 15 से 17 सितंबर तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें पोषण, स्वास्थ्य और महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं में अधिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। सत्रह सितंबर से नौ अक्टूबर तक ‘सेबार कहिनी’ के तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के अनुभवों को वीडियो, रील, तस्वीरों और लिखित विवरण के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासनों को यह सामग्री एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई है।

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