Prabhasakshi NewsRoom: Union Budget से क्या सस्ता हुआ, क्या महँगा? नये वित्त वर्ष से आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा?

बजट में क्या सस्ता होगा यदि इस पर ध्यान दें तो सामने आता है कि सरकार ने कुछ ऐसे क्षेत्रों को चुना है जहां राहत देकर उत्पादन और सामाजिक जरूरत दोनों को साधा जा सके। खेल सामग्री पर जोर देते हुए खेलो भारत अभियान का विस्तार किया गया है।
मोदी सरकार का आम बजट साफ राजनीतिक संदेश देता है कि सत्ता अब तात्कालिक लोकलुभावन राहत से हटकर उद्योग और उत्पादन बढ़ाने पर दांव लगा रही है। पिछले साल वेतनभोगी वर्ग को साधा गया था, इस बार ध्यान कारखानों, निर्यात और निर्माण पर है। महंगाई और रोजमर्रा के खर्च से जूझ रहे मध्यम वर्ग को तुरंत राहत कम दिखेगी, पर सरकार यह जताना चाहती है कि मजबूत उद्योग ही आगे चलकर रोजगार और आय बढ़ाएंगे। यानी यह बजट वोट से ज्यादा विकास की कहानी गढ़ने की कोशिश भी है और आर्थिक दिशा बदलने का संकेत भी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ संकेत दिया है कि तुरंत उपभोक्ता राहत से ज्यादा जोर दीर्घकालिक औद्योगिक मजबूती पर रहेगा, वह भी ऐसे समय में जब दुनिया भर में व्यापारिक अनिश्चितता मंडरा रही है। अर्थशास्त्री इसे उत्पादक केंद्रित बजट बता रहे हैं और मानते हैं कि इससे देश में निर्माण को बल मिलेगा। मध्यम वर्ग को कागज पर यह बजट फीका लग सकता है, पर विशेषज्ञों का तर्क है कि परोक्ष लाभ, प्रत्यक्ष लाभ से ज्यादा होंगे।
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बजट में क्या सस्ता होगा यदि इस पर ध्यान दें तो सामने आता है कि सरकार ने कुछ ऐसे क्षेत्रों को चुना है जहां राहत देकर उत्पादन और सामाजिक जरूरत दोनों को साधा जा सके। खेल सामग्री पर जोर देते हुए खेलो भारत अभियान का विस्तार किया गया है। खेल को रोजगार, कौशल और अवसर से जोड़ा गया है। इससे खेल सामग्री के दाम नरम पड़ने और खेल उद्योग में काम बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही कैंसर की दवाओं पर बड़ा कदम उठाते हुए 17 दवाओं पर मूल सीमा शुल्क हटाया गया है। साथ ही सात दुर्लभ रोगों के उपचार में काम आने वाली दवाओं और विशेष आहार पर व्यक्तिगत आयात के लिए शुल्क छूट दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों पर खर्च का बोझ कुछ हल्का हो सकता है।
इसके अलावा, समुद्री भोजन के क्षेत्र में समुद्री सीमा से बाहर पकड़ी गई मछली पर शुल्क मुक्त व्यवस्था से मछुआरा समुदाय को सहारा मिलेगा और बाजार में आपूर्ति बढ़ने से दाम काबू में रह सकते हैं। वहीं घरेलू उपकरणों में माइक्रोवेव ओवन बनाने में काम आने वाले कुछ पुर्जों पर सीमा शुल्क छूट दी गई है। इससे निर्माण लागत घटेगी और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में सौर कांच बनाने में काम आने वाले पदार्थ पर सीमा शुल्क हटाया गया है और लिथियम आयन बैटरी सेल बनाने वाली पूंजीगत मशीनों पर छूट जारी रखी गई है। इससे सौर पैनल और ऊर्जा भंडारण बैटरी सस्ती पड़ सकती हैं, जो हरित ऊर्जा को गति देगा।
वहीं व्यक्तिगत उपयोग के लिए विदेश से लाए जाने वाले कर योग्य सामान पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही विदेश यात्रा पैकेज पर स्रोत पर कर संग्रह घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, वह भी बिना न्यूनतम सीमा के। यानी विदेश घूमने की बुकिंग के समय जेब से कम रकम निकलेगी। इसके अलावा, उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत पढ़ाई और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले धन पर स्रोत पर कर संग्रह 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन परिवारों को तत्काल नकद बोझ में राहत मिलेगी जो बच्चों की पढ़ाई या इलाज के लिए पैसा भेजते हैं। साथ ही विमान के इंजन और पुर्जे, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आयातित सामान और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े पूंजीगत सामान पर भी रियायतें दी गई हैं, जो बड़े उद्योगों को सहारा देंगी।
क्या क्या होगा महंगा यदि इस पर ध्यान दें तो सामने आता है कि मोदी सरकार ने कर बचाव के रास्तों पर सख्ती का संकेत दिया है। शेयर कारोबार, कंपनियों द्वारा अपनी ही हिस्सेदारी की पुनर्खरीद और कुछ नकद वितरण के रास्ते महंगे हो सकते हैं क्योंकि पुनर्खरीद कर, प्रतिभूति लेनदेन कर और स्रोत पर कर संग्रह से जुड़ी दरों और नियमों में बदलाव प्रस्तावित हैं। यानी बाजार में लेनदेन करने वालों की लागत बढ़ सकती है। साथ ही वीडियो खेल उपकरण बनाने में काम आने वाले पुर्जों पर सीमा शुल्क छूट पहली अप्रैल से हटेगी। इससे खेल यंत्र और खेल यंत्रों की मशीनें कुछ महंगी हो सकती हैं। कॉफी भुनने, बनाने और परोसने वाली मशीनों पर सीमा शुल्क छूट खत्म कर दी गई है। इससे आयातित मशीनें महंगी होंगी और कैफे तथा दफ्तरों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है।
साथ ही मानव उपभोग के लिए मदिरा की बिक्री पर विक्रेताओं के लिए स्रोत पर कर संग्रह दर को 2 प्रतिशत किया जा रहा है। इससे आयातित मदिरा के दाम ऊपर जा सकते हैं। इसके अलावा, चिड़ियाघरों के लिए आयातित जानवर और पक्षियों पर छूट खत्म की गई है। साथ ही उर्वरक उत्पादन में काम आने वाले नेफ्था पर भी सीमा शुल्क छूट हटाई गई है, जिससे खेती की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा छाते, नकद वितरण मशीन और उनके पुर्जे, तथा विदेशी दलों के लिए फिल्म और प्रसारण उपकरण भी महंगे पड़ सकते हैं। इसके अलावा, कर विवरण में गलत जानकारी देने वालों को एक तरह की राहत देते हुए कहा गया है कि यदि वे पूरा बकाया कर, ब्याज और बराबर अतिरिक्त रकम जमा कर दें तो दंड और मुकदमे से छूट मिल सकती है।
देखा जाये तो यह बजट साफ संदेश देता है कि सरकार अब तात्कालिक खुशामद की राजनीति से हटकर उत्पादन, निर्माण और दीर्घकालिक क्षमता पर दांव लगा रही है। सवाल यह है कि क्या आम परिवार इतना धैर्य रख पाएगा कि आज की कड़वी गोली खाकर कल की मीठी उम्मीद देखे। खेल, हरित ऊर्जा, दवा और निर्माण जैसे क्षेत्रों को दी गई राहत दूरदर्शी कदम लगते हैं। कैंसर दवाओं पर छूट मानवीय संवेदना का संकेत है और सौर ऊर्जा पर जोर भविष्य की जरूरत।
लेकिन दूसरी सच्चाई भी उतनी ही कठोर है। शेयर बाजार में छोटे निवेशक हों या खेती से जुड़े लोग, कई जगह लागत बढ़ने का खतरा है। उर्वरक से लेकर मशीनों तक महंगाई की आंच खेत और बाजार दोनों को छू सकती है। विदेश यात्रा और विदेश में पढ़ाई करने वाले वर्ग को राहत मिलती दिख रही है, जिससे यह धारणा भी बनेगी कि बजट का झुकाव ऊपर की परत की ओर है। असली कसौटी बजट का सही क्रियान्वयन होगी। यदि उद्योग को मिली राहत सच में रोजगार और सस्ती वस्तुओं में बदलती है तो यह दांव सफल कहा जाएगा। पर यदि लाभ सिर्फ बड़ी कंपनियों की तिजोरी में बंद हो गया तो मध्यम वर्ग की नाराजगी तेज होगी। यह बजट एक तरह से घोषणा है कि सरकार उत्पादन के रास्ते समृद्धि लाना चाहती है। अब देखना यह है कि यह रास्ता आम नागरिक की जेब तक कितनी जल्दी पहुंचता है और कितनी मजबूती से पहुंचता है।
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