भाजपा ने क्यों खेला सांसदों को टिकट देने वाला दांव ? क्या है इसके पीछे की कहानी ?

भाजपा ने क्यों खेला सांसदों को टिकट देने वाला दांव ? क्या है इसके पीछे की कहानी ?

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में जहां ममता दीदी को लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। वहीं पर भाजपा का स्थान चौथा था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने खुद को मजबूत पाया और 42 लोकसभा सीटों वाले प्रदेश में 18 सीटें हासिल की।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीतने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सांसदों पर दांव खेला है। लेकिन भाजपा के इस दांव ने मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को एक नया मुद्दा दे दिया और वह इसका जिक्र अपनी रैलियों में कर भी रही हैं। हालांकि, ऐसी क्या मजबूरी रही कि भाजपा को अपने सांसदों पर दांव खेलना पड़ा ? क्या उनके पास पर्याप्त उम्मीदवार नहीं हैं ? या फिर उम्मीदवारों को लेकर पार्टी के भीतर विश्वास की कमी है ? 

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किन-किन सांसदों को मिले टिकट

कई तरह के सवाल पश्चिम बंगाल की फिजाओं में घूम रहे हैं। आपको बता दें कि 294 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान होने वाले हैं। ऐसे में भाजपा ने मौजूदा सांसदों पर अपना दांव खेला है। जिसमें आसनसोल से पार्टी सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, राणाघाट से सांसद जगन्नाथ सरकार, हुगली से सांसद लॉकेट चटर्जी, कूचबिहार से सांसद निसिथ प्रमाणिक और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दास गुप्ता शामिल हैं।

नाराजगी का सामना कर रही भाजपा

एक तरफ जहां भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ममता दीदी को घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं दूसरी तरफ अंदरुनी कलह का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो विगत वर्षों से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं, उनकी अनदेखी कर पार्टी नए चेहरों को टिकट दे रही है। 

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साल 2016 के विधानसभा चुनाव में जहां ममता दीदी को लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। वहीं पर भाजपा का स्थान चौथा था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने खुद को मजबूत पाया और 42 लोकसभा सीटों वाले प्रदेश में 18 सीटें हासिल की। इस दौरान भाजपा को 38 फीसदी वोट हासिल हुए और यह कहा गया कि लेफ्ट और कांग्रेस के वोट भी भाजपा को ट्रांसफर हो गए हैं।

क्या काम आएगा मोदी मैजिक ?

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा को 38 फीसदी से अधिक वोट हासिल हुए और ममता दीदी को नुकसान सहना पड़ा। इसके तुरंत बाद ही भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दीं और धीरे-धीरे तृणमूल नेता भाजपा में शामिल होने लगे। उस वक्त भाजपा पर आरोप लगा कि वह तृणमूल कांग्रेस की बी टीम है। 

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विधानसभा चुनावों में भी मोदी मैजिक छा जाए, इसके लिए पार्टी तरकश से अपने तीर निकालने में जुटी हुई है। कोलकाता के बिग्रेड मैदान में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती भाजपा में शामिल हुए और फिर उन्होंने खुद को कोबरा बताया। लेकिन क्या कोबरा तृणमूल कांग्रेस को डस लेगा ? यह सवाल भी अपने आप में अहम है। वैसे तो मिथुन चक्रवर्ती चुनाव नहीं लड़ रहे हैं पर वह पार्टी के लिए वोट मांगते हुए जरूर देखे जा सकेंगे।

इसके लिए पार्टी ने बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली से भी संपर्क साधा था। हालांकि यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई कि वह राजनीति में आएंगे भी या नहीं ?

आत्मविश्वास का संदेश

भाजपा ने पार्टी सांसदों को टिकट देकर आत्मविश्वास का संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी का मानना है कि कोई भी राजनीतिक दल उस वक्त तक ऐसा दांव नहीं खेलता है जब तक वह जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त न हो। एक मत और भी है कि पार्टी ने मौजूद सांसदों को टिकट देकर उनके लोकसभा क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा लिया है। मतलब कि उनके द्वारा की गई अपील का असर विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के तमाम इलाकों पर भी पड़ेगा।





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