अचानक दिल्ली आकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से क्यों मिले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला?

बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार आरक्षण नीति से जुड़ी उस तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर भी केंद्र की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है, जिसे पिछले वर्ष अप्रैल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को भेजा गया था।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच जम्मू-कश्मीर से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच हुई बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार के पास जम्मू-कश्मीर सरकार की कई महत्वपूर्ण फाइलें अंतिम मंजूरी के लिए लंबित हैं। नेशनल कांफ्रेंस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 के तहत अब तक कार्य संचालन नियम तय नहीं होने से वर्ष 2024 में निर्वाचित सरकार बनने के बाद से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। नेता ने कहा कि कई विभागों में मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से तय नहीं हैं, जिससे शासन व्यवस्था में दिक्कतें आ रही हैं और मुख्यमंत्री के लिए अपने अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल करना मुश्किल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार आरक्षण नीति से जुड़ी उस तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर भी केंद्र की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है, जिसे पिछले वर्ष अप्रैल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को भेजा गया था। इस रिपोर्ट का उद्देश्य मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करना था, जिसके कारण सरकारी शिक्षण संस्थानों और विभागों में ओपन मेरिट वर्ग की हिस्सेदारी घटकर 30 प्रतिशत रह गई थी। उमर अब्दुल्ला सरकार ने अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद ओपन कैटेगरी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के सुझाव देने के लिए एक उपसमिति का गठन किया था। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार ने नए महाधिवक्ता की नियुक्ति से जुड़ी फाइल भी केंद्र को भेज रखी है, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने के कारण वर्ष 2024 से यह पद खाली है।
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हम आपको यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली रवाना होने से पहले श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि वह केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित सभी प्रमुख विषयों को गृह मंत्री के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
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