BKU नेता राकेश टिकैत बोले, सरकार के साथ बैठकों का नहीं करेंगे विरोध

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 14, 2021   20:42
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BKU नेता राकेश टिकैत बोले, सरकार के साथ बैठकों का नहीं करेंगे विरोध

क्या किसान संघों को शुक्रवार को होने वाली वार्ता से कोई उम्मीद है, इस सवाल के जवाब में भाकियू नेता ने कहा, ‘‘देखते हैं कि कल क्या होता है। लेकिन, सरकार के साथ हमारी बैठकें तब तक जारी रहेंगी जब तक हमारा प्रदर्शन समाप्त नहीं हो जाता क्योंकि ऐसा होना जरूरी है।’’

नयी दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रदर्शनकारी किसान संघ सरकार के साथ तय नौवें दौर की वार्ता में शामिल होंगे और गतिरोध को सुलझाने तथा आंदोलन को समाप्त करने के लिए वार्ता को जारी रखना जरूरी है। राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर कई सप्ताह से जारी किसानों के प्रदर्शन को समाप्त करने में अब तक हुई आठ दौर की वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज दिन में कहा कि सरकार को शुक्रवार की निर्धारित वार्ता में सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद है। टिकैत ने भी कहा कि प्रदर्शनकारी संघ शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक में भाग लेंगे। 

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क्या किसान संघों को शुक्रवार को होने वाली वार्ता से कोई उम्मीद है, इस सवाल के जवाब में भाकियू नेता ने कहा, ‘‘देखते हैं कि कल क्या होता है। लेकिन, सरकार के साथ हमारी बैठकें तब तक जारी रहेंगी जब तक हमारा प्रदर्शन समाप्त नहीं हो जाता क्योंकि ऐसा होना जरूरी है।’’ जब पूछा गया कि अगर कोई समाधान नहीं निकलता तो क्या शुक्रवार की वार्ता अंतिम हो सकती है, इस पर टिकैत ने कहा, ‘‘हम सरकार के साथ बैठकों का विरोध नहीं करेंगे।’’ तोमर ने कहा था, ‘‘सरकार खुले मन से किसान नेताओं के साथ वार्ता करने को तैयार है।’’

नौवें दौर की वार्ता को लेकर संशय को दूर करते हुए किसान नेता ने कहा कि सरकार और किसान नेताओं के बीच तय समयानुसार 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे वार्ता शुरू होगी। उच्चतम न्यायालय ने 11 जनवरी को गतिरोध के समाधान के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। प्रस्तावित समिति के एक प्रमुख सदस्य ने खुद को इससे अलग कर लिया। किसान संघ कहते रहे हैं कि वे सरकार के साथ निर्धारित वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने कहा है कि वे अदालत द्वारा नियुक्त समिति के समक्ष पेश नहीं होना चाहते हैं और उन्होंने इसके सदस्यों को लेकर भी सवाल उठाये हैं। 

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भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने आज दिन में कहा था कि वह चार सदस्यीय समिति से खुद को अलग कर रहे हैं। किसान संघों और विपक्षी दलों ने इसे ‘सरकार समर्थक समिति’ करार दिया और कहा है कि इसके सदस्य पहले इन तीन कानूनों के पक्ष में रहे हैं।





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ममता बनर्जी का आरोप, भाजपा ने जय श्रीराम का नारा लगाकर नेताजी का अपमान किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 25, 2021   16:49
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ममता बनर्जी का आरोप, भाजपा ने  जय श्रीराम  का नारा लगाकर नेताजी का अपमान किया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और उस पर एक कार्यक्रम में जय श्रीराम का नारा लगाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान करने का आरोप लगाया।

पुर्सुरा (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और उस पर एक कार्यक्रम में जय श्रीराम का नारा लगाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान करने का आरोप लगाया। यह कार्यक्रम बोस की 125वीं जयंती के मौके पर आयोजित किया गया था। भाजपा को बाहरी लोगों का समूह और भारत जलाओ पार्टी बताते हुए बनर्जी ने कहा कि भाजपा लगातार बंगाल की महान शख्सियतों का अपमान कर रही है और नेताजी भी ‘‘इस फहरिस्त में शामिल हो गए हैं।’’ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने यहां एक रैली में कहा, ‘‘क्या आप किसी को अपने घर बुलाकर उसका अपमान करेंगे? क्या यह बंगाल या हमारे देश की संस्कृति है? अगर नेताजी के लिए नारे लगाए जाते तो मुझे कोई परेशानी नहीं होती।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मेरा उपहास उड़ाने के लिए उन्होंने नारे लगाए जिनका कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था। देश के प्रधानमंत्री के सामने मेरा अपमान किया गया। यह उनकी (भाजपा) संस्कृति है।’’ सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर शनिवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में जय श्रीराम के नारे लगाए जाने के बाद बनर्जी ने कार्यक्रम को संबोधित नहीं किया था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।

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दल बदलुओं को विश्वासघाती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ने वाले नेताओं को फिर कभी पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा। बनर्जी ने कहा, ‘‘जो (पार्टी) छोड़कर गए हैं, उन्हें पता था कि उन्हें आगामी चुनाव में टिकट नहीं मिलने वाला है। यह अच्छा है कि वे चले गए अन्यथा हम उन्हें निकाल देते.... जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उन्हें जल्द से जल्द पार्टी छोड़ देनी चाहिए।





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किसानों के प्रदर्शन पर नाटक कर रहे हैं कुछ राजनीतिक दल: फडणवीस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 25, 2021   16:45
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किसानों के प्रदर्शन पर नाटक कर रहे हैं कुछ राजनीतिक दल: फडणवीस

फडणवीस ने भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के साथ भंडारा में विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह भंडारा के अस्पताल में पिछले महीने आग लगने से 10 बच्चों की मौत के मामले के संबंध में राज्य सरकार की ‘‘असंवेदनशील’’ रवैये के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

नागपुर (महाराष्ट्र)। भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार को आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक पार्टियां केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन को लेकर ‘‘नाटक’’ कर रही हैं और गलत जानकारियां फैला रही हैं। मुम्बई में किसानों द्वारा आयोजित की गई रैली का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस द्वारा समर्थन करने के बाद उन्होंने यह बयान दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस-राकांपा सरकार ने ही अनुबंध कृषि और कृषि उत्पादों की सीधी खरीद की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि कृषि कानून पारित हुए काफी समय हो गया है और महाराष्ट्र में भी तक ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं हुआ।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘ कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर अब नाटक कर रहे हैं और गलत जानकारियां फैला कर किसानों को गुमराह कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे पास इन मोर्चों का समर्थन करने वाली पार्टियों के लिए एक सवाल है कि कांग्रेस ने अपने 2019 के चुनाव घोषणापत्र में यह क्यों कहा था कि अगर वह सत्ता में आई तो वह बाजार समितियों को निलंबित कर देगी।’’ फडणवीस ने पूछा, ‘‘ कांग्रेस और राकांपा को जवाब देने चाहिए कि उन्होंने 2006 में अनुबंध खेती अधिनियम को मंजूरी क्यों दी? उन्हें महाराष्ट्र में इस कानून से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वे केन्द्र में इसे नहीं चाहते। यह ड्रामा क्यों?’’ 

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उन्होंने यह भी दावा किया कि किसानों की उपज की सीधी खरीद के लिए पिछले कांग्रेस-राकांपा शासन ने 29 लाइसेंस जारी किए गए थे। इस बीच, फडणवीस ने भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के साथ भंडारा में विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह भंडारा के अस्पताल में पिछले महीने आग लगने से 10 बच्चों की मौत के मामले के संबंध में राज्य सरकार की ‘‘असंवेदनशील’’ रवैये के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने भंडारा में धान की खरीद के दौरान ‘‘व्यापक भ्रष्टाचार’’ का भी आरोप लगाया।





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नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


प्रधानमंत्री की गलत नीतियों के कारण देश में आर्थिक असमानता बढ़ी: कांग्रेस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 25, 2021   16:30
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प्रधानमंत्री की गलत नीतियों के कारण देश में आर्थिक असमानता बढ़ी: कांग्रेस

गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाली संस्था ‘ऑक्सफैम’ ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 35 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि इस दौरान करोड़ों लोगों के लिए आजीविका का संकट पैदा हो गया।

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने ‘ऑक्सफैम’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘गलत नीतियों एवं प्राथमिकताओं’ के कारण देश में आर्थिक असमानता बढ़ी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी जी की ग़लत नीतियों और प्राथमिकताओं से देश में आर्थिक असमानता बढ़ी है। ऑक्सफैम की नयी रिपोर्ट के अनुसार मोदी जी के मित्रों व देश के सबसे अमीर अरबपतियों की संपत्ति 35 प्रतिशत बढ़ी, वहीं अप्रैल में हर घंटे 1.7 लाख लोगों ने अपनी नौकरी खोई !’’

उल्लेखनीय है कि गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाली संस्था ‘ऑक्सफैम’ ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 35 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि इस दौरान करोड़ों लोगों के लिए आजीविका का संकट पैदा हो गया। ऑक्सफैम की रिपोर्ट ‘इनइक्वलिटी वायरस’ में कहा गया, ‘‘मार्च 2020 के बाद की अवधि में भारत में 100 अरबपतियों की संपत्ति में 12,97,822 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इतनी राशि का वितरण यदि देश के 13.8 करोड़ सबसे गरीब लोगों में किया जाए, तो इनमें से प्रत्येक को 94,045 रुपये दिए जा सकते हैं।





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