Prabhasakshi NewsRoom: शशि थरूर को रोकने के लिए गांधी परिवार के वफादारों ने कसी कमर

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यह तो स्पष्ट है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में एक नामांकन गांधी परिवार से होगा। वह नामांकन राहुल गांधी का भी हो सकता है और प्रियंका गांधी का भी हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि उनके मुकाबले कौन खड़ा होगा?

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के भविष्य को लेकर आजकल कई सवाल उठ रहे हैं क्योंकि परिवारवाद को बढ़ावा देने वाली यह पार्टी आज भी भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे से बाहर नहीं निकल पा रही है। जिस तरह वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़-छोड़कर जा रहे हैं उससे सवाल खड़ा हुआ है कि कांग्रेस बचेगी भी या नहीं? कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की घोषणा तो हो गयी है लेकिन अध्यक्ष बनने को कोई राजी नहीं हो रहा है। पार्टी ने कह दिया है कि चुनाव पारदर्शी तरीके से होंगे और जो चाहे वह चुनाव लड़ सकता है लेकिन इसी के साथ यह भी कहा जा रहा है कि अध्यक्ष तो राहुल गांधी को ही बनायेंगे। यही नहीं जो लोग अध्यक्ष को चुनेंगे यानि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में जो लोग मतदाता होंगे उनके नामों को भी फर्जी बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि कांग्रेस क्यों अपनी ही बर्बादी पर तुली हुई है?

यह तो स्पष्ट है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में एक नामांकन गांधी परिवार से होगा। वह नामांकन राहुल गांधी का भी हो सकता है और प्रियंका गांधी का भी हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि उनके मुकाबले कौन खड़ा होगा? जाहिर है कि गांधी परिवार के समर्थकों में से तो कोई खड़ा नहीं होगा ऐसे में चुनौती देने के लिए कांग्रेस का असंतुष्ट गुट जी-23 आगे आया है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष के पद का चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, अभी शशि थरूर ने इस पर अंतिम फैसला नहीं किया है। दरअसल शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ सकते हैं, इस बात की अटकलें तब लगनी शुरू हुईं जब उन्होंने मलयालम दैनिक अखबार मातृभूमि में एक लेख लिखा। इस लेख में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए ‘‘स्वतंत्र एवं निष्पक्ष’’ चुनाव कराने का आह्वान किया है। इस लेख में उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति की दर्जन भर सीटों के लिए भी पार्टी को चुनाव की घोषणा करनी चाहिए।

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कांग्रेस के असंतुष्ट गुट जी-23 के सदस्य शशि थरूर ने कहा कि नए अध्यक्ष का चुनाव करना पुनरुद्धार की ओर एक शुरुआत है, जिसकी कांग्रेस को सख्त जरूरत है। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि चुनाव के लिए कई उम्मीदवार सामने आएंगे। शशि थरूर ने कहा कि हालांकि, पार्टी को पूरी तरह से पुनर्जीवित करने की जरूरत है लेकिन नेतृत्व के जिस पद को तत्काल भरने की जरूरत है वह स्वाभाविक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष का पद है।

अब शशि थरूर तो कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाह रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या गांधी परिवार के वफादार ऐसा होने देंगे? हम आपको बता दें कि कांग्रेस में गांधी परिवार के वफादार माने जाने वाले नेता पूरा पूरा प्रयास कर रहे हैं कि राहुल गांधी ही दोबारा पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान संभालें। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने तो यहां तक कह दिया है कि हम राहुल गांधी पर दबाव डालेंगे ताकि वह दोबारा अध्यक्ष बनें। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या शशि थरूर नामांकन दाखिल कर अलग-थलग तो नहीं पड़ जायेंगे? 

हम आपको बता दें कि जब 90 के दशक में सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था तो जितेंद्र प्रसाद ने अपना पर्चा दाखिल कर चुनौती पेश की थी लेकिन वह हार गये थे। उससे पहले सीताराम केसरी के खिलाफ शरद पवार और राजेश पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गये थे। 17 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव कराने की घोषणा कर चुकी कांग्रेस की निर्वाचन सूची पर भी सवाल उठे हैं। रविवार को जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने निर्वाचन सूची तैयार किए जाने को लेकर सवाल खड़े किए थे और पूछा था कि पार्टी के संविधान के तहत उचित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।

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दूसरी तरफ, एक ओर जहां कांग्रेस लगभग ढाई वर्ष से ज्यादा समय से खाली पार्टी अध्यक्ष पद पर नये व्यक्ति को चुनने की ओर आगे बढ़ रही है तो दूसरी ओर पार्टी का साथ छोड़ चुके गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक चुनाव के नाम पर धोखा दे रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने कहा, ‘‘जब चुनाव होता है, उसके लिए सदस्यता अभियान होता है। यह पुराने समय से चला आ रहा है..अब क्या हो रहा है कि वोटर लिस्ट से लोगों के नाम लिए जाते हैं और उनके पैसे भर दिए जाते हैं। यह नकली सदस्यता अभियान है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर कागज की इमारत बनाओगे तो वह हवा से गिर जाएगी या आग से जल जाएगी। ऐसे चुनाव करने से क्या फायदा होगा....यह सब फर्जी है।''

भाजपा ने ली चुटकी

कांग्रेस में चल रही उठापटक पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि कांग्रेस से 40-50 वर्ष से जुड़े वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं क्योंकि वह एक ‘‘पारिवारिक पार्टी’’ बन गयी है। नड्डा ने दावा किया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कमजोर हो रही है क्योंकि उसने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्रीय आकांक्षाओं तथा प्रतिबद्धताओं से नहीं जोड़ा है। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले गुलाम नबी आजादी का नाम लिए बगैर नड्डा ने कहा, ‘‘40-50 साल से जुड़े वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्हें पता चल गया है कि कांग्रेस न तो अब एक राष्ट्रीय पार्टी है और न ही क्षेत्रीय पार्टी है। यह एक पारिवारिक पार्टी बन गयी है।’’ उन्होंने कई क्षेत्रीय पार्टियों के नाम गिनाए और दावा किया कि ये भी ‘‘पारिवारिक पार्टियां’’ बन गयी हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक बड़ी पार्टी थी लेकिन अब वह कमजोर हो रही है क्योंकि उसने क्षेत्रीय आकांक्षाओं का राष्ट्रीय आकांक्षाओं तथा प्रतिबद्धताओं से तालमेल नहीं बिठाया।’’ उन्होंने कई राज्यों के उदाहरण दिए, जहां कांग्रेस ने दशकों तक शासन किया लेकिन अब उसकी वहां मजबूत मौजूदगी नहीं है।

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