उपचुनाव परिणाम उत्तर प्रदेश की राजनीति को दे सकते हैं नई दिशा

उपचुनाव परिणाम उत्तर प्रदेश की राजनीति को दे सकते हैं नई दिशा

जिन 11 सीटों पर मतदान होना है उसमें गंगोह (सहारनपुर), रामपुर, इगलास (अलीगढ़), लखनऊ कैंट, गोविंदनगर (कानपुर), मानिकपुर (चित्रकूट), प्रतापगढ़, जैदपुर (बाराबंकी), जलालपुर (अंबेडकर नगर), बलहा(बहराइच), घोसी (मऊ) विधानसभा सीट शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में 11 विधानसभा सीटों पर 21 अक्टूबर को उप−चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही प्रदेश में सियासी गरमा−गरमी तेज हो गई है। 24 यानी दीवाली से तीन दिन पहले नतीजे आएंगे। अब देखना यह होगा कि किसकी दीवाली मनेगी और किसका दिवाला निकलेगा, जिन 11 सीटों पर मतदान होना है उसमें से 09 सीटों पर बीजेपी काबिज थी। इसलिए उसको अपनी प्रतिष्ठा बचाए रखने के पूरे प्रयास करने होंगे। एक भी सीट कम हुई तो विपक्ष को भाजपा पर हमले का मौका मिल जाएगा। लोकसभा चुनाव के बाद योगी और पार्टी की नई-नई कमान संभालने वाले स्वतंत्र देव के लिए यह चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं होंगे। अकसर देखा गया है कि उप−चुनाव में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व प्रचार में नहीं उतरता है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे दिग्गज नेताओं के बिना ही योगी टीम को यह चुनाव जीतना होगा।

   

जिन 11 सीटों पर मतदान होना है उसमें गंगोह (सहारनपुर), रामपुर, इगलास (अलीगढ़), लखनऊ कैंट, गोविंदनगर (कानपुर), मानिकपुर (चित्रकूट), प्रतापगढ़, जैदपुर (बाराबंकी), जलालपुर (अंबेडकर नगर), बलहा(बहराइच), घोसी (मऊ) विधानसभा सीट शामिल हैं। टूंडला सुरक्षित विधानसभा सीट के चुनाव का मामला कोर्ट में अटका हुआ है। इसलिए वहां चुनाव नहीं हो रहा है। 11 में से प्रमुख तौर पर रामपुर, लखनऊ कैंट, इगलास और घोसी सीट पर सबकी सबकी निगाहें हैं। इस बार मुकाबला चौतरफा होगा। अबकी सपा−बसपा−कांग्रेस और भाजपा अलग−अलग मैदान में हैं। बसपा की पुरानी परम्परा थी कि वह उप−चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारती थी लेकिन इस बार वह पूरी तरह से सक्रिय है।

इसे भी पढ़ें: ढाई साल में योगी आदित्यनाथ के लिए कोई चुनौती नहीं खड़ा कर पाया विपक्ष

बात चुनावी समीकरण की कि जाए तो अबकी बार बीजेपी के खिलाफ मुस्लिम वोटरों को लामबंद करना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। बीजेपी को मुस्लिम महिलाओं पर भरोसा है तो उसे विपक्ष के वोटों के बंटवारे का भी फायदा मिल सकता है। उपचुनाव में क्षेत्रीय से अधिक राष्ट्रीय मुददों के छाए रहने की संभावना है। बीजेपी कश्मीर से 370 हटाने, तीन तलाक, एनआरसी, अयोध्या मसले और मोदी मैजिक के सहारे रहेगी। कांग्रेस को प्रियंका सोनभद्र में हुए नरसंहार, किसानों का कर्ज माफ नहीं होना, प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था, उन्नाव कांड और चिन्मयानंद के सहारे बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी।

  

समाजवादी पार्टी के लिए परीक्षा की घड़ी है क्योंकि पार्टी का पिछड़ा वोट बैंक खिसक रहा है। लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक में भी बसपा सेंध लगाने में सफल रही थी। मायावती को दलित वोट बैंक और मुस्लिम वोटरों के अधिक संख्या में सपा से छिटक कर बसपा के साथ आने की उम्मीद है। रामपुर में सबसे अधिक गरमा−गरमी देखने को मिल रही है। पहले डिंपल यादव को रामपुर से लड़ाने की योजना थी, लेकिन पिछले दिनों अखिलेश के रामपुर दौरे ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अखिलेश की रामपुर यात्रा के दौरान भीड़ का नहीं जुटना, इसका सबसे बड़ा कारण है। वहीं आजम जिस तरह से घिरे हुए हैं, उसके चलते उनसे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती है।

  

इन 11 सीटों पर होना है महा-मुकाबला

लखनऊ कैंट की विधायक रीता बहुगुणा के प्रयागराज संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद लखनऊ कैंट विधानसभा की सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस ने दिलप्रीत सिंह और बसपा ने अरूण द्विवेदी को उम्मीदवार बनाया है, भाजपा और सपा ने अभी उम्मीदवारों को घोषणा नहीं की है। जैदपुर (सुरक्षित) बाराबंकी से भाजपा विधायक रहे उपेंद्र सिंह रावत के बाराबंकी संसदीय सीट से सांसद चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी। उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने तनुज पुनिया को प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने अखिलेश आंबेडकर को टिकट दिया है।

इसे भी पढ़ें: नेताओं की शह पाकर UP में जम गये हैं बांग्लादेशी, इसलिए NRC है जरूरी

रामपुर से सपा के कद्दावर नेता आजम खां नौ बार विधायक रहे हैं, अब वह सांसद हैं। अभी सपा और बसपा ने भाजपा प्रत्याशी तय नहीं किए हैं, कांग्रेस ने अरशद अली को टिकट दिया है। रामपुर में सबसे अधिक गरमा−गरमी देखने को मिल रही है। 

बहराइच की बलहा (सुरक्षित) सीट के विधायक अक्षवर लाल बहराइच संसदीय सीट से सांसद हो गए हैं। इसलिए यहां उपचुनाव हो रहे हैं। बसपा ने रमेश गौतम व सपा ने किरन को मैदान में उतारा है। जलालपुर से बसपा विधायक रितेश पांडेय अम्बेडकर नगर के सांसद बन गए हैं। बसपा ने अबकी से अपने विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा की पुत्री डॉ. छाया वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने सुनील मिश्र पर दांव लगाया है।

कानपुर की गोविंदनगर सीट से विधायक रहे सत्यदेव पचौरी के कानपुर संसदीय सीट से सांसद बनने से यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव के लिए बसपा ने देवी प्रसाद तिवारी और कांग्रेस ने करिश्मा ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है।

चित्रकूट में मानिकापुर के विधायक आरके सिंह पटेल के बांदा से सांसद बनने के बाद हो रहे उपचुनाव के लिए कांग्रेस रंजना पांडेय और बसपा राजकरण कोल को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।

प्रतापगढ़ सदर- यहां से अपना दल (एस) के संगम लाल विधायक थे जो प्रतापगढ़ सीट से भाजपा से सांसद बन गए। इस सीट पर कांग्रेस ने डॉ. नीरज तिवारी तो बसपा ने रणजीत सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है।

सहारनपुर की गंगोह सीट के विधायक प्रदीप चौधरी भी कैराना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गए थे। उपचुनाव में सपा ने इंद्रसेन, बसपा ने चौधरी इरशाद व कांग्रेस ने काजी नोमान मसूद को प्रत्याशी बनाया है।

अलीगढ़ की इगलास विधानसभा सीट से विधायक बने राजवीर सिंह दिलेर अब हाथरस से भाजपा सांसद हैं। उपचुनाव में कांग्रेस ने उमेश दिवाकर और बसपा ने अभय कुमार बंटी पर दांव लगाया है।

फागू सिंह चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद खाली हुई घोसी सीट पर उपचुनाव हो रहा है। बसपा ने कयूम अंसारी व कांग्रेस ने राजमंगल यादव पर भरोसा जताया है।

-अजय कुमार