सपा नेता आजम खान का बड़बोले नेता से भू−माफिया बनने तक का सफर

By अजय कुमार | Publish Date: Jul 20 2019 1:09PM
सपा नेता आजम खान का बड़बोले नेता से भू−माफिया बनने तक का सफर
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आजम खान और पूर्व सीओ तथा अब जौहर विश्वविद्यालय के साथ जुड़े आले हसन के खिलाफ शिकायतों व मुकदमों को देखते हुए दोनों का नाम एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज किया गया है। आजम पर जौहर विवि के लिए करोड़ों रुपये की जमीन कब्जाने का आरोप है।

अपने विवादास्पद बयानों से बड़े−बडों की 'लिंचिंग' करने वाले पूर्व मंत्री और सांसद आजम खान पर अब भू−माफिया का नया ठप्पा लग गया है। बता दें कि योगी सरकार ने जमीन से अवैध कब्जे हटवाने और भूमाफिया पर कार्रवाई की निगरानी के लिए एक एंटी भू−माफिया पोर्टल विकसित किया है। इसमें जिलों में भूमाफिया पर की गई कार्रवाई का नियमित ब्योरा दर्ज करना होता है। जिनका नाम पोर्टल पर भूमाफिया के तौर पर दर्ज हो जाता है, उनकी निगरानी शासन स्तर पर भी होती है। सरकार उन लोगों को भू−माफिया की श्रेणी में रखती है जो किसी की जमीन पर आपराधिक नीयत से कब्जा करते हैं और वास्तविक मालिक के सामने आने पर भी जमीन नहीं छोड़ते हैं तथा धमकी देते हैं। इसके अलावा यहां उन लोगों के नाम भी शामिल होते हैं जिन पर जमीन कब्जाने की कई शिकायतें, मुकदमे और आपराधिक मुकदमे हों।



आजम खान और पूर्व सीओ तथा अब जौहर विश्वविद्यालय के साथ जुड़े आले हसन के खिलाफ शिकायतों व मुकदमों को देखते हुए दोनों का नाम एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज किया गया है। आजम पर जौहर विवि के लिए करोड़ों रुपये की जमीन कब्जाने का आरोप है। इसके अलावा आजम खां और पूर्व सीओ आले हसन पर वक्फ बोर्ड की जमीनों को कब्जाने, दलितों की जमीन बिना अनुमति के रजिस्ट्री करवाने और शत्रु संपत्ति कब्जाने के भी आरोप लगे हैं। प्रशासन ने पहले दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था। बाद में 26 किसान सामने आए। उनमें से कुछ की तहरीर पर 12 केस दर्ज किए गए हैं। 14 और किसानों ने भी तहरीर दी है। इसके आधार पर केस दर्ज करने की तैयारी है। आजम वह हस्ती हैं जो अपने काम से अधिक कारनामों के चलते ज्यादा जाने जाते हैं। रामपुरी चाकू से भी तेज चलती है उनकी जुबान। जब भी मुंह खोलते हैं तो जहर ही उलगते हैं। खासकर, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के नेता विशेषकर उनके 'निशाने' पर रहते हैं। मोदी−अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे तमाम नेताओं पर हमला करने के लिए खान साहब शब्द छांट−छांट कर लाते हैं। वह किसी का चरित्रहनन करने में भी पीछे नहीं रहते। फिल्म अभिनेत्री से राजनीति में आईं जयाप्रदा इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं।
आजम की खासियत यह है कि वह कभी अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखते हैं। बेगम को राज्यसभा में पहुंचा दिया। बेटे का विधायक बना दिया। जिद्द के पक्के आजम खान जब अपने पर आ जाते हैं तो सामने वाले की कोई औकात नहीं रह जाती है। यही वजह है कि मुलायम सिंह सरकार में मंत्री रहते आजम खान ने जब मुसलमानों के लिए रामपुर में एक विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय खोलने का सपना देखा तो उसे पूरा करने के लिए आजम सभी मर्यादाएं लांघ गए। जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन की व्यवस्था करने के लिए आजम खान ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए किसानों की जमीन और नदियों के किनारे सभी हथिया लिए। नदियों की पैमाइश बदल दी गई। किसान रोते रहे, गिड़गिड़ाते रहे। उनकी एक नहीं सुनी गई। तत्कालीन रामपुर प्रशासन आजम की कठपुतली बन गया तो शासन ने भी इस तरफ से आंखें घुमा लीं। आजम का रूतबा ही कुछ ऐसा था। आजम की इसी हठधर्मी के चलते उनके दुश्मनों की संख्या लगातार बढ़ती गई। उनके दुश्मनों की लिस्ट में जितने हिन्दू थे, उससे कम मुसलमान नहीं थे। आजम लगातार अपने दुश्मनों को निपटाते रहे।


 
 
एक तरफ आजम अपनी मनमानी करते रहे तो दूसरी तरफ अपने 'पाप' को छिपाने के लिए वह अपनी अलग छवि गढ़ते गए। विवादित बोल बोलकर वह सबसे दुश्मनी मोल लेते और जब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती तो वह इसे निजी खुन्नस में की गई कार्रवाई बताकर अपने को 'बेचारा' साबित करने की कोशिश में लग जाते। ऐसा ही आजम ने अबकी भी किया, लेकिन मौजूदा योगी सरकार ने इसकी जरा भी परवाह नहीं की। योगी सरकार पर दबाव बनाने के लिए आजम मोदी से लेकर अमित शाह तक को अपने निशाने पर लिए रहते थे। मगर अबकी से उनकी यह थ्योरी परवान नहीं चढ़ पाई। आजम के खिलाफ सबूत जुटाए गए तो पता चला कि आजम खान एक बड़ा भू−माफिया है। रामपुर के सांसद आजम खां इस समय अपने खिलाफ जमीन कब्जे के मुकदमों व तहरीरों के चलते सुर्खियां बटोर रहे हैं। जिस ड्रीम प्रॉजेक्ट जौहर विश्वविद्यालय के लिए आजम ने तत्कालीन राज्यपाल तक से मोर्चा ले लिया था, उसे किसी भी तरह पूरा करने की जिद अब उनके गले की फांस बन गई है। रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय की आधी से अधिक जमीन फर्जीवाड़े, कब्जे और मिलीभगत से हासिल की गई है।


 
 
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से संचालित जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर पूर्व नगर विकास मंत्री आजम खां है। इस ट्रस्ट के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी उनके परिवार वाले और करीबी काबिज हैं। बता दें कि जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में तत्कालीन मुलायम सरकार में हुई थी। विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिलवाने को लेकर पूर्व राज्यपाल टीवी राजेश्वर और बीएल जोशी से आजम खां खूब लड़े−झगड़े थे। बाद में आजम ने सेटिंग करके जुलाई 2014 में कार्यवाहक राज्यपाल अजीज कुरैशी से विश्वविद्यालय से जुड़े विधेयक को मंजूरी दिला दी थी। 2012 में अखिलेश सरकार के नेतृत्व में सपा सरकार बनने के बाद विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में तेजी आई तो आजम ने विश्वविद्यालय के लिए जमीन हासिल करने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने की बजाए जमीन कब्जाना शुरू कर दिया। उनके कद और रसूख के चलते शिकायतकर्ता की आवाज दब कर रह गई और प्रशासन काफी बौना नजर आया। आजम के कारनामों का काला चिट्ठा कभी नहीं खुलता, अगर 2017 में भाजपा की सरकार नहीं बनती।
 
योगी सरकार ने आजम के खिलाफ आने वाली शिकायतों की फाइल खोलनी शुरू की तो पता चला कि विवि की 39 हेक्टेयर जमीन सरकारी है। बची 38 हेक्टेयर जमीन जो किसानों से खरीदी गई है, वह भी सरकार में निहित होने के योग्य है। जांच रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय को दिए जाने के लिए गलत ढंग से जमीन के सर्कल रेट तक बदल दिए गए। कुछ जमीन को नदी का बहाव क्षेत्र या बाढ़ क्षेत्र बताकर सर्कल रेट घटा दिया गया। यहां निर्माण कार्य भी हो गया, जबकि नियमानुसार नदी के बहाव क्षेत्र में पक्का निर्माण नहीं हो सकता। ऐसे में यह जमीन स्थायी निर्माण के लिए कैसे दी गई? सबसे बड़ी बात यह है कि सर्कल रेट सबसे पहले बाजार क्षेत्र का तय किया जाता है और पूरे जिले का तय होता है। लेकिन, जिस जमीन को कब्जाना था उस जमीन विशेष के सर्कल रेट तीन बार घटाए गए, जिससे किसानों को खासा नुकसान हुआ। रिपोर्ट की मानें तो नगर पालिका परिषद भी 13.0842 शत्रु संपत्ति को वक्फ संपत्ति बनाने के फर्जीवाड़े में शामिल रही थी। जबकि रामपुर में उक्त जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में अंकित ही नहीं थी। एक अन्य मामले में जिला प्रशासन ने नोटिस विवि के रजिस्ट्रार को दिया, लेकिन जवाब वक्फ बोर्ड की ओर से दिया गया। इसी तरह दलितों की जमीन खरीदने के लिए भी नियम ताक पर रखे जाने के आरोप हैं। कुछ दलित किसानों ने जमीन दूसरे दलित किसानों को बेची और उसके कुछ घंटे बाद ही उसकी रजिस्ट्री तीसरे पक्ष को कर दी गई।
 
जौहर विवि की आधी से ज्यादा जमीन फर्जीवाड़े, कब्जे और मिलीभगत से हासिल की गई। इससे संबंधित जांच रिपोर्ट कहती है कि नदी की 5 हेक्टेयर की जमीन पर चहारदीवारी बनाकर अवैध कब्जा किया गया, जबकि तालाब, पोखर, नदी की जमीन को वास्तविक रूप से बनाए रखने का हाई कोर्ट का आदेश है। 7 हेक्टेयर जमीन तत्कालीन एडीएम रामपुर ने नियम विरुद्ध ढंग से नवीन परती दिखाकर विवि को दे दी। यह चकरोड, रेत और नदी की जमीन थी, जिसे नवीन परती में नहीं बदला जा सकता। 7 हेक्टेयर जमीन नवीन परती के रूप में विवि के नाम दर्ज है, जबकि वह सार्वजनिक उपयोग की रेत की जमीन है। इस पर 2713 खैर के पेड़ थे। जमीन का गैर वानिकी उपयोग वर्जित था, जिसमें पेड़ों को यथावत रखा जाना था। सभी पेड़ काटे जा चुके हैं।
 
41 हेक्टेयर से अधिक जमीन किसानों से ली गई और दलित किसानों और असंक्रमणीय भूमिधरों के पट्टे भी खरीद लिए गए। इसके लिए जिला प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई। इसमें तत्कालीन एडीएम पर फर्जीवाड़े के आरोप हैं। अब सब जांच हो रही है। जांच के आधार पर आजम खान को भू−माफिया घोषित कर दिया गया है। वैसे आजम खान पर मंत्री रहते जल निगम में भी फर्जी नियुक्ति आदि धांधली के मामले चल रहे हैं।
बहरहाल, उत्तर प्रदेश की सियासत और समाजवादी पार्टी में आजम खान का रूतबा किसी से छिपा नहीं है। वह कभी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खास हुआ करते थे तो अब अखिलेश यादव के निकट बने हुए हैं। हाल ही में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में आजम की बदजुबानी से उनकी प्रतिद्वंद्वी जयाप्रदा काफी आहत दिखी थीं। तो इससे पहले भी उनकी विवादित बयानबाजी से कई हस्तियां आहत हो चुकी हैं। यहां तक कि जिन मुलायम सिंह यादव ने आजम को सियासत की एबीसीडी सिखाई थी, उन्हीं मुलायम सिंह से जब अमर सिंह को लेकर आजम खान नाराज हो गए तो उन्होंने मुलायम के बारे में घटिया से घटिया शब्दों का इस्तेमाल करने में परहेज नहीं किया था। आज भी आजम के सुर बिगड़ते देर नहीं लगती है।
 
विवादों से उनका रिश्ता पुराना है। भारत माता को डायन बताना, सेना को हिन्दू−मुस्लिम में बांटना, पीएम मोदी को आतंकवादी बताना, कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानना जैसा विवादित बयान देना उनकी फितरत में नजर आता है। जून, 2017 में आजम खान ने सेना को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा था कश्मीर, झारखंड और असम में महिलाओं द्वारा सैनिकों को पीटा गया और उनके निजी अंगों को काट दिया गया। सच्चाई यह है कि महिलाओं को सेना के बलात्कारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह संदेश है कि हिंदुस्तान को शर्म आनी चाहिए। मई, 2017 को आजम खान ने कहा था कि लड़कियों को उन जगहों से दूर रहना चाहिए, जहां पर उनके साथ छेड़छाड़ हो सकती है। उत्तर प्रदेश के रामपुर गांव के एक कॉलेज में ईव−टीजिंग की खबरों के बाद उन्होंने ये बयान दिया। अगस्त 2016 में आजम खान ने एक और विवाद खड़ा कर दिया जब उन्होंने आरोप लगाया कि बुलंदशहर के पास एक व्यस्त राजमार्ग पर नोएडा स्थित मां और बेटी के गैंगरेप में 'राजनीतिक साजिश' शामिल हो सकती है। दिसंबर 2015 में आजम खान ने कहा, 'कई आरएसएस नेता अविवाहित हैं क्योंकि वे समलैंगिक हैं।'
 
अक्टूबर 2015 में आजम खान ने नाबालिगों के बलात्कार के लिए मोबाइल फोन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी द्वारा इन गैजेट्स का दुरुपयोग नाबालिगों के बलात्कार में खतरनाक वृद्धि का कारण बना है। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान ने कहा था, 'कारगिल की पहाड़ियों को फतह करने वाला कोई हिंदू नहीं थी, बल्कि करगिल की पहाड़ियों को नारा−ए−तकबीर अल्लाह−हू−अकबर कहकर फतह करने वाला मुसलमान फौजी था।' आजम खान के विवादित बयान यहीं खत्म नहीं होते हैं। इनके अलावा भी उन्होंने कई बार ऐसा बोला, जिन पर जमकर विवाद हुआ।
 
एक बार मुलायम सिंह बड़बोले आजम को समाजवादी पार्टी से बाहर का भी रास्ता दिखा चुके हैं। तब आजम ने अमर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, जिससे नाराज होकर मुलायम ने आजम को पार्टी से बर्खास्त कर दिया था। अब देखना यह है कि भू−माफिया घोषित होने के बाद आजम कैसे अपने को इस दाग से बचा पाएंगे। क्योंकि इस समय आजम के साथ देने वालों की संख्या नहीं के बराबर है। उनके साथ अगर कुछ सही है तो उनका सांसद होना। इसकी आड़ में आजम थोड़े समय के लिए राहत प्राप्त कर सकते है। कुल मिलाकर सपा के कद्दावर नेता से भू−माफिया बनने तक का सफर काफी रोमांचित करने वाला है। दूसरों को आईना दिखाने वाले आजम आज खुद उसी आइने के सामने शर्मसार नजर आ रहे हैं।
 
-अजय कुमार
 

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