चुनाव का चौथा चरण तय करेगा बुंदेलखंड का भाग्य भी

अजय कुमार । Feb 22 2017 2:44PM

बुंदेलखंड की सीमाएं मध्य प्रदेश से सटी हुई हैं। बुंदेलखंड जैसी भौगौलिक स्थितियां मध्य प्रदेश के जिलों की भी हैं, लेकिन वहां की सरकारों ने अपने क्षेत्र के शहरों को काफी विकसित कर लिया है। इसको देखकर बुंदेलखंड वालों की नाराजगी और भी बढ़ जाती है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चौथे चरण की जंग भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। पश्चिम से शुरू हुई चुनावी जंग अवध होते हुए बुंदेलखंड (सात जिलों की 19 सीटें) के साथ−साथ नेहरू−इंदिरा खानदान के सियासी विरासत वाले जिलों रायबरेली और इलाहाबाद पहुंची तो नेताओं का सियासी मिजाज भी बदल गया। बुंदेलखड प्रदेश का सबसे पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां की गरीबी, भुखमरी, पिछड़ापन आजादी के 70 वर्षों के बाद भी दिल को झंझोर देता है। यहां कुपोषण बड़ा मुद्दा है। गर्मी में यहां के शहरी निवासियों को पीने के एक−एक बूंद पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है तो गांवों में ग्रामीणों को दूर−दूर तक पानी की तलाश में भटकना पड़ता है। बुंदेलखंड में हर साल पड़ने वाला सूखा, किसानों की आत्महत्या पूरे देश में चर्चा का विषय बनी रहती है। सूखे पड़े तालाब बच्चों के खेलने की जगह बन गये हैं। इस इलाके में कृषि पेट नहीं भरती है बल्कि खून चूसती है। यहां गरीबी चरम पर है, रोजगार के कोई साधन नहीं हैं, जिसकी वजह से गांव के गांव खाली हो गये हैं। लोग रोजी−रोटी की तलाश में घर पर ताला डालकर अन्य प्रांतों में भटक रहे हैं। घरों में बचे हैं तो बूढ़े मां−बाप और चारे पानी के लिये तरसते जानवर। युवाओं का पलायन यहां की बड़ी समस्या है। विकास यहां से कोसों दूर है। शायद इसीलिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब यहां रैली करने पहुंचे तो उन्होंने घोषणा कर दी कि बीजेपी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री कार्यालय में बुंदेलखंड विकास परिषद का गठन किया जायेगा, जिसकी मुख्यमंत्री प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करेंगे। बुंदेलखंड की सीमाएं मध्य प्रदेश से सटी हुई हैं। बुंदेलखंड जैसी भौगौलिक स्थितियां मध्य प्रदेश के जिलों की भी हैं, लेकिन वहां की सरकारों ने अपने क्षेत्र के शहरों को काफी विकसित कर लिया है। इसको देखकर बुंदेलखंड वालों की नाराजगी और भी बढ़ जाती है।

बुंदेलखंड से निकल कर बात 12 सीटों वाले नेहरू−इंदिरा खानदान के गढ़ इलाहाबाद की कि जाये तो यहां अखिलेश−राहुल गांधी रोड शो और मीटिंग के सहारे जनसमर्थन जुटाने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं तो यहां बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी पूरी ताकत लगा दी है। चौथे चरण में 23 फरवरी को जिन 53 सीटों पर मतदान होना हैं, वहां 2012 के नतीजे अखिलेश यादव को खुशी प्रदान करने वाले रहे थे, परंतु बसपा की हैसियत भी यहां कम नहीं है। बसपा ने 2012 में यहां सपा को जर्बदस्त टक्कर दी थी। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां का सियासी गणित पूरी तरह से बदल गया था। न सपा के हाथ कुछ लगा न बसपा के हिस्से में कुछ आाय। रायबरेली की एक लोकसभा सीट जिस पर सोनिया गांधी जीती थीं, को छोड़कर उक्त इलाका पूरी तरह से भगवामय हो गया था। भाजपा ने यहां जर्बदस्त जीत हासिल की थी। यहां पूरी तरह से भगवा रंग चढ़ा तो प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर भाजपा गठबंधन के अपना दल प्रत्याशी कुंवर हरिवंश सिंह के सिर जीत का सेहरा बंधा था।

चौथे चरण में प्रचार−प्रसार में किसी भी दल ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सभी दलों के बड़े−बड़े नेताओं की रैलियां हुईं। चौथे चरण की जंग में कई धुंआधार नेता सीधे चुनाव लड़ रहे हैं तो कई दिग्गज नेता अपनी−अपनी पार्टी के पालनहारी बने हुए हैं। जो प्रमुख नेता चुनाव लड़ या लड़ा रहे हैं उसमें रायबरेली में चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा, बीजेपी नेत्री उमा भारती, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या, भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या, अखिलेश सरकार के मंत्रियों मनोज पांडेय और शिवाकांत ओझा, सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, कांग्रेस नेता और सांसद प्रमोद तिवारी, निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे अखिलेश सरकार में मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आये स्वामी प्रसाद मौर्या, बसपा के नेता प्रतिपक्ष गयाचरण दिनकर, बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इसके साथ−साथ पीएम मोदी और सीएम अखिलेश यादव सहित बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी इन इलाकों में पूरी ताकत झोंक रखी है।

कांग्रेस के लिए यह चरण खास इसलिये है क्योंकि पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक के परंपरागत जिलों इलाहाबाद−रायबरेली की अग्निपरीक्षा भी इसी चरण में होगी। पूर्व में इलाहाबाद से भूतपूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू चुनाव लड़ते रहे तो रायबरेली गांधी परिवार की परंपरागत लोकसभा सीट रही है। फिरोज गांधी से शुरू हुए इस सिलसिले को इंदिरा गांधी और अब सोनिया गांधी ने भी बरकरार रखा है। कुछ माह पूर्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी इलाहाबाद गये थे, उनके जाने से यहां सियासी हलचल तेज हो गई थी, मगर फिर सब कुछ ठंडा हो गया। इलाहाबाद ही वह जिला है जहां से यदाकदा प्रियंका गांधी को सियासत में लाने के लिये बैनर−पोस्टर टंगे दिख जाते हैं। इस बार अप्रत्याशित रूप से कांग्रेस अध्यक्षा और रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी अपने क्षेत्र में एक दिन भी प्रचार करने नहीं आईं, जिससे विरोधियों को यह कहने का मौका मिल गया कि अखिलेश से बाप परेशान हैं तो राहुल गांधी से माँ (सोनिया गांधी) दुखी हैं। रायबरेली से सांसद बनने के बाद पहला मौका है जब सोनिया गांधी प्रचार करते नहीं दिखीं।

बात चौथे चरण के दागियों और दौलतमंदों की कि जाये तो एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 48 प्रत्याशियों में से 19 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसका औसत 40 फीसद है। भाजपा के प्रत्याशियों में से 14 ऐसे हैं जिन पर दर्ज अपराध में पांच साल या उससे ऊपर सजा हो सकती है। चौथे चरण में सपा के 33 प्रत्याशियों में से 13 खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, इस दल के दागी प्रत्याशियों का औसत 39 फीसदी है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 53 में से 12 के खिलाफ मुकदमे हैं। चौथे चरण में बसपा के दागी प्रत्याशियों का औसत 23 के करीब है। रालोद के 39 प्रत्याशियों में से नौ फीसद पर मुकदमे दर्ज हैं। दागी प्रत्याशियों में 95 प्रत्याशी ऐसे हैं जिन पर हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, महिलाओं पर अत्याचार संबंधित अपराध दर्ज हैं। 07 प्रत्याशी ऐसे हैं जिन पर हत्या के इल्जाम हैं। 18 उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास का इल्जाम है। छह प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिन पर दुष्कर्म, दहेज उत्पीड़न और छेड़छाड़ का इल्जाम है। 10 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन पर अपहरण का भी इल्जाम है।

करोड़पति प्रत्याशियों की संख्या भी अच्छी खासी है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक बसपा के 53 में 45, भाजपा के 48 में 36, सपा के 33 में 26 प्रत्याशी करोड़पति हैं। कांग्रेस के 25 में 17, रालोद के 39 में से छह प्रत्याशी करोड़पति हैं। इस चरण में सबसे बड़े पूंजीपति चायल (सु.) के निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चन्द्रा हैं, उन्होंने 70 करोड़ की संपत्ति घोषित की है। भाजपा के नंद गोपाल नंदी दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 57 करोड़ की संपत्ति घोषित की है। बसपा के मसरूर अहमद, कांग्रेस की आराधना मिश्र उर्फ मोना तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 32 करोड़ की चल−अचल संपत्ति घोषित कर रखी है। टॉपटेन करोड़पतियों में सईदुररब, राकेश सिंह, संजय कुमार, दीप नारायण सिंह, अजय पाल सिंह और संगम लाल गुप्ता भी शामिल हैं।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कर्ज लो घी पियो का बयान दिया था जिस पर खूब हो हल्ला हुआ था। चौथे चरण में ऐसे कर्जदार प्रत्याशियों की भी अच्छी खासी तादाद है। कर्जदार प्रत्याशियों में बीजेपी के नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी (26 करोड़) शीर्ष पर हैं तो अन्य प्रत्याशियों में मसरूर शेख (13 करोड़), सिद्धार्थनाथ सिंह (नौ करोड़), दीप नारायण सिंह (पांच करोड़), अजय पाल सिंह (चार करोड़), प्रकाश चन्द्र (चार करोड़) मनोज (4 करोड़), यशपाल यादव (तीन करोड़), शाबाज खान (2.39 करोड़), विक्रम सिंह (दो करोड़) का नाम शामिल है।

चौथे चरण के चुनावी समर में जहां करोड़पतियों की भरमार है, वहीं फक्कड़ टाइप के भी प्रत्याशियों की भी कमी नहीं है। उरई के प्रत्याशी कैलाश के पास सिर्फ एक हजार रुपये हैं। कोरांव की प्रत्याशी मायावती के पास दो हजार और फूलपुर से प्रत्याशी शिवचन्द्र के पास सिर्फ 2450 रुपये हैं, जबकि प्रतापगढ़ से प्रत्याशी इन्द्राकर मिश्र के पास कोई संपत्ति नहीं है। कहा जाता है कि 'जस राजा, तस प्रजा।' चौथे चरण की चुनावी जंग में सपा के चार ऐसे प्रत्याशी हैं जो सिर्फ साक्षर हैं। इस श्रेणी की तीन प्रत्याशी कांग्रेस के भी हैं। बसपा के दो प्रत्याशी भी साक्षर हैं। अलबत्ता इस चरण के 680 प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे प्रत्याशी भाजपा के हैं। उसने 15 प्रोफेशनल ग्रेजुएट्स को टिकट दिया है। इस चरण में 138 प्रत्याशी परास्नातक, 148 स्नातक और 119 इंटरमीडिएट पास हैं। भाजपा व सपा के चार प्रत्याशियों के पास पीएचडी की डिग्री भी है।

चुनावी मौसम में नौजवानों की बात तो सभी दल करते हैं। खासकर अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी तो इस मामले में कुछ ज्यादा ही ढोल पीट रही है लेकिन नौजवानों को टिकट देने के मामले में सपा की जगह बसपा अव्वल है। बसपा के 25 से 35 साल आयु वर्ग के सात प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने छह, सपा ने पांच और कांग्रेस का एक प्रत्याशी इस आयु वर्ग में हैं। 36 से 45 वर्ग में बसपा के 14, भाजपा के 13, सपा के 10 और कांग्रेस के सात प्रत्याशी हैं। उम्रदराज प्रत्याशियों की श्रेणी में भी बसपा ही आगे है। 66 से 75 आयु वर्ग में उसने तीन प्रत्याशी उतारे हैं जबकि भाजपा ने एक। कांग्रेस ने इस आयु वर्ग के दो प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं।

समाजवादी पार्टी नौजवानों को टिकट देने के मामले में भले ही बसपा और भाजपा से पीछे नजर आ रही हो लेकिन महिलाओं को टिकट देने के मामले में सपा की स्थिति कुछ बेहतर नजर आती है, लेकिन यहां भी महिलाओं को मिले टिकट 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसे नजर आते हैं। चौथे चरण के 680 प्रत्याशियों में  मात्र 60 ही महिला प्रत्याशी हैं। इनमें सबसे अधिक छह प्रत्याशी समाजवादी पार्टी की हैं। भाजपा, रालोद और कांग्रेस के टिकट पर पांच−पांच महिलाएं मैदान में हैं। इस चरण में बसपा ने सिर्फ तीन महिलाओ को टिकट दिया है। सबसे अधिक 15 महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।

चौथे चरण में 23 फरवरी को 12 जिलों की 53 सीटों पर मतदान होना है। इसमें प्रतापगढ़ की 07, कौशाबी की 03, इलाहाबाद की 12, जालौन की 03, झांसी की 04, ललितपुर की 02, महोबा की 02, हमीरपुर की 02, बांदा की 04, चित्रकूट की 02, फतेहपुर की 06 और रायबरेली की 06 सींटे विधानसभा सीटें शामिल हैं। रायबेरली में पहले 07 सीटें हुआ करती थीं, लेकिन रायबरेली की तिलोई विधान सभा सीट अबकी बार अमेठी में चली गई थी।

नजर 2012 के विधानसभा चुनाव पर दौड़ाई जाये तो चौथे चरण की 53 सीटों में से समाजवादी पार्टी ने 24, बसपा ने 15, कांगे्रस ने 06, भारतीय जनता पार्टी ने 05 और अन्य दलों ने 03 सीटों पर जीत हासिल की थी। 23 फरवरी को एक करोड़ 84 लाख मतदाता  680 प्रत्याशियों में से 53 विधायकों का चयन करेंगे।  2012 में हमीपुर विधान सभा क्षेत्र से बीजेपी की साध्वी निरंजन, चरखारी विधान सभा क्षेत्र से बीजेपी की उमा भारती, सिरथू विधान सभा क्षेत्र से बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्या और प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी विधान सभा का चुनाव जीते थे। इसके बाद 2014 में हुए आम चुनाव में साध्वी निरंजन, उमा भारती और केशव मौर्या सांसद चुन लिये गये। उक्त तीनों सीटों पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की झोली में तीनों सीटें चली गईं, जबकि रामपुर खास के विधायक प्रमोद तिवारी का राज्यसभा के लिये हुए चयन के बाद हुई इस रिक्त सीट पर उपचुनाव में प्रमोद की बेटी ने विजय हासिल की।

- अजय कुमार

We're now on WhatsApp. Click to join.
All the updates here:

अन्य न्यूज़