Modi 100: जानिये वो 10 बड़े कदम जो मंदी की मार से बचा लेंगे अर्थव्यवस्था को

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यह जरूर कहा जा सकता है कि मोदी सरकार-2 ने अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े कदम उठाये हैं जिनके सकारात्मक परिणाम देर-सबेर मिलना तय है।

किसी भी सरकार की सफलता का पैमाना यह होता है कि उसके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की विकास दर कैसी रही। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में देखें तो नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े और कड़े फैसलों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार रही। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करते ही प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था को अगले पाँच साल में 5 ट्रिलियन डॉलर का आकार देने का संकल्प लिया और इस संकल्प को सिद्ध करने के लिए कई बड़े फैसले भी किये। लेकिन वैश्विक मंदी की चपेट में आयी भारतीय अर्थव्यवस्था ने सरकार की ओर से पेश की जा रही सुनहरी तसवीर पर सवाल खड़े कर दिये हैं क्योंकि कहा जा रहा है कि हर सेक्टर मंदी की मार झेल रहा है। इस स्थिति से निबटने के लिए सरकार की ओर से कई उपायों की घोषणा की गयी है, इनका असर क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि मोदी सरकार ने अपने पहले 100 दिनों में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े कदम उठाये हैं जिनके सकारात्मक परिणाम देर-सबेर मिलना तय है। आइए जानते हैं अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए उठाये गये सरकार के 10 महत्वपूर्ण कदम-

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श्रम सुधार- संसद ने असंगठित क्षेत्र सहित देश भर के कामगारों को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाने एवं मजदूरी के मामले में महिला-पुरुषों के बीच भेदभाव को समाप्त करने के प्रावधानों वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दी। इस विधेयक के जरिये ऐसा पहली बार हुआ है कि देश के असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ कामगारों को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाया गया। इससे पहले कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी को लेकर एक समानता नहीं थी। विधेयक के उद्देश्यों में बताया गया है कि ये निवेशकों की सहूलियत और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगी। ये चार संहिताएं वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा एवं कल्याण और औद्योगिक संबंध से जुड़ी हैं।

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खरीफ फसलों का एमएसपी और किसान सम्मान निधि का दायरा बढ़ाया- मोदी सरकार-2 ने अपने पहले बजट से पहले ही किसानों को बड़ा तोहफा दिया। सरकार ने 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ा दिया। इसके अलावा किसानों को समृद्ध बनाने की दिशा में इस साल के अंतरिम बजट में उठाये गये कदम 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना' का दायरा अपने दूसरे कार्यकाल में बढ़ा दिया। भाजपा ने लोकसभा चुनावों के समय अपने संकल्प-पत्र में इस बात का वादा भी किया था। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6000 रुपए तीन किश्तों में मिलते हैं। जब इस योजना को इस साल फरवरी में लागू किया गया था तब यह सिर्फ 12 करोड़ किसानों के लिए ही थी, क्योंकि इस पर 2 हेक्टेयर यानी 5 एकड़ तक जमीन होने की शर्त थी, लेकिन अब इस शर्त को हटा दिया गया है जिससे 14.5 करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। इसके अतिरिक्त सरकार ने किसानों के लिए पेंशन योजना का भी ऐलान किया है।

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लोन को रेपो रेट से जोड़ना- भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को होम लोन, पर्सनल लोन और एमएसएमई सेक्टर को सभी नए फ्लोटिंग रेट वाले लोन को रेपो दर सहित बाहरी मानकों से जोड़ने का निर्देश दिया है। इससे नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का लाभ कर्ज लेने वाले उपभोक्ताओं को जल्दी मिलने की उम्मीद है। कई बैंक पहले ही लोन को रेपो रेट से जोड़ चुके हैं और 1 अक्टूबर, 2019 से सभी बैंकों के लोन बाहरी बेंचमार्क से स्वतः ही जुड़ जाएंगे।

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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को उदार बनाया गया- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिये एकल ब्रांड खुदरा कारोबार, विमानन, बीमा और डिजिटल मीडिया सहित कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का फैसला लिया। साथ ही कॉन्ट्रेक्ट्र मैन्युफैक्चरिंग में भी 100 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दे दी। खास बात यह है कि यह नीति छोटे-बड़े सभी मेन्यूफेक्चर्स पर लागू होगी। इसके अलावा कोल माइनिंग, कोयला की बिक्री और कोयला से जुड़े तमाम कामों के लिए शत-प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी गई है।

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कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती- वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण ने जब अपना पहला बजट पेश किया तो अधिकांश कंपनियों को 25 प्रतिशत कॉर्पोरेट टैक्स के दायरे में ला दिया। लेकिन उद्योग जगत इससे हिल गया और राहत की गुहार लगायी। जिसके बाद सरकार ने 400 करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 25 प्रतिशत किया जबकि पहले यह दर 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए थी। 

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सरकारी बैंकों में पूंजी डाली- सरकार ने गत सप्ताह चार बैंकों में 10,800 करोड़ रुपए की पूंजी डालने की घोषणा की है। इसके अलावा अगर इस बार के बजट भाषण को देखें तो सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कुल 70 हजार करोड़ रुपए की राशि डालने की घोषणा की थी। सरकार को उम्मीद है कि इससे इन बैंकों की स्थिति भी सुधरेगी और यह बैंक लोगों को ज्यादा लोन दे सकने की स्थिति में आएंगे।

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सरकारी बैंकों का महाविलय- मोदी सरकार ने 10 बड़े सरकारी बैंकों का विलय कर दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 सरकारी बैंकों के महाविलय की योजना का ऐलान किया जिसके बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या मौजूदा 27 से घटकर 12 रह जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस विलय के चलते किसी की नौकरी नहीं जायेगी।

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आरबीआई से मदद ली- भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने खजाने से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये की राशि देने का फैसला किया है। राजकोषीय घाटे को अंकुश में रखने में जुटी मोदी सरकार को आरबीआई से मिली यह राशि काफी राहत प्रदान करेगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयासों में मदद भी मिलेगी। माना जा रहा है कि सरकार इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन में करेगी ताकि अर्थव्यवस्था को विकास की दौड़ती पटरी पर वापस लाया जा सके।

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ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योगों को राहत- मोदी सरकार ने सरकारी विभागों द्वारा वाहनों की खरीद पर लगी रोक को हटाने के अलावा नॉन बैंकिंग फाइनेंसिंग कंपनियों को यह छूट प्रदान कर दी है कि वह अब आधार KYC के माध्यम से भी लोन दे पाएंगी। इसके अलावा सरकार ने GST रिफंड में देरी से पैसों की कमी झेलने वाले कारोबारियों को राहत देते हुए घोषणा की है कि अब जीएसटी रिफंड का भुगतान 30 दिनों के अंदर कर दिया जायेगा। इसके अलावा नकदी की कमी को दूर करने के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूंजी मुहैया कराने के लिए नई संस्था बनाने के साथ ही हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की कैश लिक्विडिटी 20 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30 हजार करोड़ करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा सरकार ने भाजपा के संकल्प-पत्र में किये गये वादे को पूरा करते हुए छोटे व्यापारियों के लिए पेंशन योजना का भी ऐलान किया है। इस पेंशन योजना के तहत 18 से 40 वर्ष आयु के लोगों को 60 साल की उम्र के बाद प्रति महीने 3 हजार रुपये पेंशन मिलेगी।

-नीरज कुमार दुबे

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