ढ़ाई दशक के सख्त फैसलों ने बनाया मोदी को मोदी

आर्थिक क्षेत्र में आज भारत दुनिया की प्रमुख ताकत बनकर उभरा है। एक राष्ट्र एक कर जीएसटी विपक्ष के लाख विरोध के बावजूद आज इकोनोमी का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। नोटबंदी का लाख विरोध हुआ और जनधन, आधार और मोबाइल यानी की जाम का असर साफ दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ढ़ाई दशक की अनवरत राजनीतिक नेतृत्व यात्रा के दौरान लिए गए एक से एक चौंकाने वाले फैसलों ने मोदी को मोदी बनाया है। आज मोदी विश्व के सर्वाधिक भरोसेमंद नेताओं में से एक है। सामने वाले को भी यह भय सताये रहता है कि पता नहीं मोदी क्या स्टेंड लेकर क्या का क्या कर ड़ालेंगे। यही कारण है कि चाहे डोनाल्ड ट्रम्प हो, पुतिन हो या फिर शी जिंनपिंग हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हल्के में नहीं ले पाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी के आगे भारत नहीं झुका है तो रुस से कच्चे तेल का आयात जारी है। मालदीव का उदाहरण सामने है जब नरेन्द्र मोदी ने भारत के द्वीप पर केवल कुर्सी लगाकर बैठकर ही मालदीव का हिला कर रख दिया। देश में भी गुजरात के मुख्यमंत्री के रुप में करीब 13 साल और देश के प्रधानमंत्री के रुप में 12 साल से कुछ अधिक के समय में लिए गए निर्णयों से समूचे विप़क्ष को धीरे से पर जोर का झटका देते रहे हैं। हो यह रहा है कि नरेन्द्र मोदी पर जो भी वार किया जाता है वही वार नरेन्द्र मोदी की ताकत बन जाता है। चाहे शुरुआत गुजरात मुख्यमंत्री रहते गोदारा कांड की हो या फिर चौकीदार चोर से लेकर वोट चोरी तक की हो, प्रतिपक्ष का हर वार ना केवल खाली गया है अपितु प्रतिपक्ष के लिए सेल्फ गोल बन कर ही रह गया है। देष आज आंतरिक और बाहरी दोनों ही क्षेत्रों में सर्वोपरि होकर उभरा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात मुख्यमंत्री काल में ही अपने दूरगामी निर्णयों से विशिष्ट पहचान बना ली थी। चाहे वह गोदारा कांड हो या फिर गुजरात भूकंप और उसके बाद विनाशकारी भूकंप प्रभावित क्षेत्र में पुनर्निमार्ण के कार्य, नर्मदा के अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के माध्यम से उत्तरी गुजरात और सौराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था, स्वच्छ भारत का सपना भी गुजरात के रास्ते ही आया है तो कृषि और घरेलू जरुरत की बिजली की व्यवस्था को अलग अलग कर 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराना अपने आप में बड़ी बात है। वाईब्रेंट गुजरात समिट को देशी विदेशी निवेश को सिंगल विण्डों सिस्टम के माध्यम से साकार करना किसी दूरगामी सोच का ही परिणाम है। आज देष के अनेक राज्यों में निवेश सम्मेलन होने लगे हैं और ईज ऑफ डूइंग के बावजूद गुजरात समिट को मॉडल समिट माना ही जाता है। आज का मेक इन इंडिया इसी का विस्तार है।
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जहां तक प्रधानमंत्री बनने के बाद के निर्णयों का सवाल है तो कूटनीति और विदेश नीति के मौर्चें पर आज भारत की तूंती बोलती है। सर्जिकल स्ट्राइक, बालाघाट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिन्दुर ने समूची दुनिया के सामने भारत के रण कौशल की धाक जमा दी और इसका परिणाम यह रहा कि पाकिस्तान के पक्ष में आवाज उठाने की हिम्मत लगभग अन्य देशों में नहीं ही रही। कहने को तुर्किया पाकिस्तान के पक्ष में गाहे-बेगाहे बोलता रहता है पर उसका असर नगण्य ही है। ब्रिक्स के माध्यम से आज भारत दुनिया के देशों का नेतृत्व कर रहा है तो अमेरिकी डॉलर को चुनौती देने की शुरुआत भारत के नेतृत्व में दुनिया के देश करने लगे हैं। देर सबेर यह हालात होंगे ही। समान नागरिकता कानून और कष्मीर में धारा 370 हटाकर कश्मीर को देश की मुख्य धारा से जोड़ना लगभग असंभव काम हो सका है।
आर्थिक क्षेत्र में आज भारत दुनिया की प्रमुख ताकत बनकर उभरा है। एक राष्ट्र एक कर जीएसटी विपक्ष के लाख विरोध के बावजूद आज इकोनोमी का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। नोटबंदी का लाख विरोध हुआ और जनधन, आधार और मोबाइल यानी की जाम का असर साफ दिखाई दे रहा है। आज मोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में भारत अग्रणी देष हो गया है। मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल ने असर दिखाया है तो सुधार प्रयासों का ही परिणाम है हमारे देश से आज सामरिक महत्व के उत्पादों का निर्यात होने लगा है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना ने एमएसएमई को नई ताकत दी है। न्यायिक क्षेत्र के सुधार सामने हैं। पुराने अनावश्यक कानूनों को हटाया गया है तो आज के संदर्भ में नई भारतीय न्याय संहिता लागू की है। चार श्रम कानूनों के माध्यम से श्रमिकों के भविष्य को संवारने का काम किया गया है।
विपक्ष के दो प्रमुख हथियार, राममंदिर और धारा 370 हटाने का बीजेपी का सगूफा केवल राजनीतिक लाभ के लिए है पर नरेन्द्र मोदी सरकार ने राममंदिर का निर्माण कराकर स्पष्ट संदेश दे दिया कि बीजेपी के नारे या वादे खयाली पुलाव नहीं होते। बिना किसी विवाद के राममंदिर विवाद का निपटारा बहुत बड़ी उपलब्धी मानी जानी चाहिए। तीन तलाक का बिल पारित कराना अपने आप में मुश्किल भरा काम था। नारी शक्ति बंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को राजनीतिक नेत्त्व में 33 प्रतिशत आरक्षण महिला सषक्तिकरण का बड़ा निर्णय माना जाना चाहिए। कोविड 2019 के दौरान भारत द्वारा किये गये प्रबंधन को वैश्विक सहयोग को समूचे देशों द्वारा सराहा गया। आयुष्मान भारत, कृषि और कृषक सम्मान के निर्णय, पीएम गरीब कल्याण योजना या इसी तरह के कार्यक्रमों और निर्णयों की लंबी फेहरिस्त हो जाती है।
सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न 25 साल के अपने राजनीतिक नेतृत्व के दौरान क्या किया और ना ही यह कोई गुणगान का सवाल है। सवाल सीधा सा यह है कि आज भारत दुनिया के देशों का पिछलग्गू ना होकर दुनिया के देष भारत की और देखने लगे हैं। भारत अपने स्तर पर अपनी आवश्यकताओं और संप्रभुता को बनाये रखते हुए निर्णय लेता है और इसके खिलाफ किसी की बोलने की हिम्मत नहीं होती है। नरेन्द्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री रहते जो कठोर निर्णय लिए गए हैं उनमें से अधिकांश दुधारी निर्णय रहे हैं और सबसे मजे की बात यह है कि चुनावों में जनता द्वारा उन पर मोहर लगाई जा रही है। इसलिए विपक्ष लाख आलोचना करें पर इसमेंं कोई दो राय नहीं कि 25 साल की यात्रा और विपक्ष के तीखे हमलों के बावजूद नरेन्द्र मोदी जनता के भरोसे पर खरे उतर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह कि निर्णय करना और खासतौर से कठोर निर्णय जोखिम भरा होता है पर प्रत्येक कठोर निर्णय के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अधिक निखर के आये हैं।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा
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