ज़रा हटके ज़रा बचके, ये सफर नहीं आसान...10 KM का किराया 500 रुपये! भाषा विवाद के बीच अपने ही शहर में 'टूरिस्ट' बने मुंबईवासी?
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जो ऑटो और कैब वाले कभी सिर्फ पर्यटकों या विदेशियों से मनमाना किराया वसूलने के लिए बदनाम थे, वो अब मजबूरी का फायदा उठाकर स्थानीय यात्रियों से दोगुना, यानी 100 फीसदी तक ज्यादा किराया वसूल रहे हैं। कुछ इलाकों में तो यह लूट इससे भी कहीं ज्यादा है। घंटों का लंबा इंतजार और ऊपर से जेब पर दोहरा डाका, आखिर कब थमेगा मुंबई की सड़कों पर सफर का यह सियासी और मौसमी संकट?



























































