Sabarimala पर धर्म और कानून में महासंग्राम, Supreme Court के फैसले से सियासत में आएगा तूफान?
सबरीमाला प्रकरण के बहाने यह लेख भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव का विश्लेषण करता है, जिसमें धार्मिक प्रथाओं पर न्यायिक हस्तक्षेप और 'चयनात्मक धर्मनिरपेक्षता' पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। लेख मांग करता है कि संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट कानून या निष्पक्ष न्यायिक निर्णय हो, अन्यथा लोकतांत्रिक बहस व्यवस्था पर हावी हो जाएगी।



























































