Asian Games में व्यक्तिगत हार को Jyothi Surekha Vennam ने बताया अप्रत्याशित

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अनुभवी कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नाम ने एशियाई खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा के प्री क्वार्टर फाइनल में मिली हार को अप्रत्याशित बताया है। उन्होंने स्वीकार किया कि 14 वर्षीय कोरियाई तीरंदाज कांग योनसियो द्वारा 150 में से 150 अंक हासिल करने के बाद उनके पास वापसी का अवसर नहीं बचा था। इसके बाद उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में शानदार वापसी करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

अनुभवी कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नाम ने बुधवार को कहा कि एशियाई खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में उनका जल्दी बाहर हो जाना ‘काफी अप्रत्याशित’ था। उन्होंने साथ ही स्वीकार किया कि 14 वर्षीय कोरियाई तीरंदाज कांग योनसियो के खिलाफ खराब शुरुआत के बाद उनके पास वापसी का ज्यादा मौका नहीं था। ज्योति ने 2023 हांगझोउ एशियाई खेलों में महिला व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था और वह आइची-नागोया खेलों में मौजूदा चैंपियन के रूप में उतरी थीं।

हालांकि युवा कोरियाई तीरंदाज ने प्री क्वार्टर फाइनल में 150 में से 150 अंक हासिल करके उन्हें चौंका दिया। ज्योति ने ऑनलाइन बातचीत में कहा, ‘‘मैंने व्यक्तिगत स्पर्धा में अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन मेरी प्रतिद्वंद्वी ने 150 में से 150 अंक हासिल किए। मेरे पास कोई मौका नहीं था क्योंकि पहले दौर में मेरी शुरुआत थोड़ी कमजोर रही।

मैंने अपनी तरफ से जो कुछ कर सकती थी वह किया। यह काफी अप्रत्याशित था।’’ हालांकि 30 वर्षीय ज्योति ने इस निराशा को जल्द पीछे छोड़ते हुए महिला टीम स्पर्धा में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में मदद की। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मुझे लगा कि टीम स्पर्धा अभी बाकी है और मैं उसमें अपना शत प्रतिशत दूंगी।’’ भारत ने इन खेलों में तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए नौ पदक जीते जिनमें पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक शामिल रहे।

इसके साथ ही भारत इस खेल की पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। नीरज चौहान ने पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के कांस्य पदक मुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त हमवतन धीरज बोम्मादेवरा को हराया। नीरज ने कहा कि पदक मुकाबले के दौरान उन्होंने प्रतिद्वंद्वी पर ध्यान देने के बजाय अपने निशाने पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह नहीं सोचा कि क्या होगा। मेरा ध्यान अपने निशाने पर था। पहले दौर में मैंने लगातार दो बार 10 अंक हासिल किए तो मुझे लगा कि अगर मैं इसी प्रदर्शन को जारी रख सका तो जीत सकता हूं।

मैंने यह नहीं सोचा कि मेरा प्रतिद्वंद्वी कौन है, बस निशाना लगाता रहा।’’ नीरज ने धीरज से मिली सलाह का भी जिक्र किया। धीरज ने उन्हें मुकाबले के दौरान पल का आनंद लेने के लिए कहा था। उन्होंने कहा, ‘‘धीरज भैया हमेशा कहते हैं कि परिस्थिति और उस पल का आनंद लो क्योंकि आज जो है, वह कल नहीं होगा और इसके उलट भी हो सकता है।’’ नीरज ने कहा, ‘‘मैंने सुबह भैया से बात की थी।

हमने सोचा था कि हम दोनों फाइनल में खेलेंगे लेकिन कुछ कमियां रह गईं और हमें कांस्य पदक के लिए मुकाबला करना पड़ा।’’

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