Britain की पहली Sikh Rugby Player का नया दांव, अब Sumo रिंग में इतिहास रचने को तैयार

51 साल की उम्र में, तीन बच्चों की माँ और पूर्व रग्बी खिलाड़ी मनजिंदर नागरा ने सूमो रेसलिंग में राष्ट्रीय खिताब जीतकर एक और मिसाल कायम की है। उनका यह सफर रग्बी से सूमो तक फैला है और अब वे यूरोपीय प्रतियोगिता में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व कर साबित कर रही हैं कि जुनून की कोई उम्र नहीं होती।
जहां ज्यादातर लोग बढ़ती उम्र के साथ अपने सपनों को सीमित करने लगते हैं, वहीं पंजाब मूल की मनजिंदर नागरा ने यह साबित कर दिया है कि जुनून और मेहनत की कोई उम्र नहीं होती हैं। ब्रिटेन की पहली सिख महिला रग्बी खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने वाली 51 वर्षीय मनजिंदर अब सूमो रेसलिंग की दुनिया में नया इतिहास रचने जा रही हैं।
तीन बच्चों की मां मनजिंदर नागरा इन दिनों अपने नए सफर को लेकर चर्चा में हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की सूमो प्रतियोगिता में अपनी आयु वर्ग का खिताब जीता हैं। अब जून महीने में स्कॉटलैंड में होने वाली यूरोपीय सूमो रेसलिंग प्रतियोगिता में वे इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करेंगीं।
बता दें कि मनजिंदर नागरा ने 1990 के दशक में उस समय रग्बी खेलना शुरू किया था, जब एशियाई मूल की महिलाओं के लिए यह खेल लगभग अनजान माना जाता था। यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में पढ़ाई के दौरान उन्होंने रग्बी को चुना और अपनी मेहनत के दम पर इंग्लैंड स्टूडेंट्स टीम में जगह बनाई थीं। उस समय वे मैदान पर खेलने वाली अकेली एशियाई महिला खिलाड़ी थीं।
गौरतलब है कि मनजिंदर का सफर सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा हैं। उन्होंने कई सामाजिक और खेल परियोजनाओं में भी अहम भूमिका निभाई हैं। सिख गेम्स में एंबेसडर के तौर पर काम करते हुए उनकी मुलाकात सूमो चैंपियन मंदीप सिंह से हुई थी। बताया जा रहा है कि मंदीप सिंह की प्रेरणा के बाद मनजिंदर ने मार्च 2026 में सूमो रेसलिंग में कदम रखा था।
इसके बाद उन्होंने बेहद कम समय में शानदार प्रदर्शन करते हुए अप्रैल 2026 में राष्ट्रीय सूमो खिताब अपने नाम कर लिया हैं। अब उनका लक्ष्य यूरोपीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करना है।
मनजिंदर नागरा का कहना है कि दक्षिण एशियाई परिवारों की लड़कियों को खेलों में आगे बढ़ने के दौरान कई सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं। उन्होंने कहा कि अगर लड़कियां कोशिश ही नहीं करेंगी, तो उन्हें कभी अपनी असली क्षमता का पता नहीं चल पाएगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार मनजिंदर ने सिर्फ खुद सफलता हासिल नहीं की, बल्कि दूसरी लड़कियों के लिए भी रास्ते खोले हैं। साल 2016 में उन्होंने ‘होव रग्बी क्लब’ में लड़कियों के लिए विशेष सेक्शन शुरू किया था। शुरुआत में जहां केवल 6 लड़कियां जुड़ी थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 80 से ज्यादा महिला खिलाड़ियों तक पहुंच चुकी हैं।
इसके अलावा वे महिलाओं के लिए ‘वॉकिंग रग्बी’ समूह भी चलाती हैं, जिसके जरिए अधिक उम्र की महिलाओं को खेलों से जोड़ा जा रहा हैं। बता दें कि मनजिंदर नागरा कानून के क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक वक्ता तथा मार्गदर्शक की भूमिका भी निभा रही हैं।
गौरतलब है कि वे साल 2024 में सिख गेम्स की वैश्विक एंबेसडर भी रह चुकी हैं। इसके साथ ही क्रिकेट अनुशासन पैनल में सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। मनजिंदर नागरा का यह सफर आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है, जो उम्र या समाज के डर से अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
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