गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी ताइवान को नहीं मिला सम्मान, न लहराया गया ध्वज और न ही बजा राष्ट्रगान

गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी ताइवान को नहीं मिला सम्मान, न लहराया गया ध्वज और न ही बजा राष्ट्रगान

ओलंपिक में ताइवान के खिलाड़ी ताइवान नहीं बल्कि "चीनी ताइपे" के नाम का इस्तेमाल कर रहे है जोकि हर ताइवानियों के लिए काफी निराशाजनक है।बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति के कारण पिछले कुछ वर्षों में ताइवान को ओलंपिक में कई नाम दिए गए हैं।

तोक्यो ओलंपिक में दुनिया के कई देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें से एक देश ताइवान भी है और मंगलवार को ताइवान की स्टार भारोत्तोलक कुओ सिंग-चुन ने अपने दमदार प्रदर्शन से गोल्ड मेडल जीता है, लेकिन जब वह अपना मेडल प्राप्त करने के लिए पोडियम पर चढ़ीं तो उनका अभिवादन करने के लिए कोई राष्ट्रीय ध्वज और कोई राष्ट्रगान नहीं था। अपनी सीमाओं, मुद्रा और लोकतंत्र देश होने के बावजूद ताइवान की स्थिति विवादित बनी हुई है जिसके कारण खेलों में ताइवान का अपना राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का नामोनिशान नहीं है। ओलंपिक में ताइवान के खिलाड़ी ताइवान नहीं बल्कि "चीनी ताइपे" के नाम का इस्तेमाल कर रहे है जोकि हर ताइवानियों के लिए काफी निराशाजनक है।बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति के कारण पिछले कुछ वर्षों में ताइवान को ओलंपिक में कई नाम दिए गए हैं। बता दें कि चीन अभी भी ताइवान को एक चीन के हिस्से के रूप मे देखता है और एक दिन इस देश को जब्त करने की कसम भी खाई है। ताइपे नाम साल 1981 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का स्थापित किया गया। यह एक ऐसा समझौता था जिसमें जो ताइवान को खुद को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में पेश किए बिना खेलों में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देगा।

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ओलंपिक  में ताइवान का ध्वज इस्तेमाल होता है?

आपको बता दें कि ताइवान के लाल और नीले झंडे के बजाय, केवल एक सफेद झंडा जिसमें ओलंपिक रिंग का इस्तेमाल करने की इजाजत है। जब ताइवान के एथलीट पोडियम पर होते है तो एक पारंपरिक झंडा फहराने वाला गीत ही चलेगा न की ताइवान का राष्ट्रगान। इसको लेकर आलोचकों ने इसे अपमानजनक करार देते हुए कहा कि, फिलिस्तीन देश भी ओलंपिक में अपने नाम और ध्वज का उपयोग करते हैं तो ताइवान क्यों नहीं कर सकता? साल 1952 में ताइवान और चीन दोनों ही देशों को ओलंपिक के लिए आमंत्रित किया गया लेकिन चीन का प्रतिनिधित्व होने के कारण ताइवान बाहर हो गया। चार साल बाद ताइवान ओलंपिक में "फॉर्मोसा-चीन" यानि की सुंदर चीन  के रूप में शामिल हुआ, लेकिन बीजिंग ने खेलों का बहिष्कार किया जिसके दो साल बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से चीन बाहर हो गया। 

कब-कब ताइवान पर चीन का दबाव?

साल 1960 में IOC के इशारे पर ताइवान नाम से प्रदर्शन किया।

ताइवान ने 1960 के तोक्यो खेलों सहित 1964  के दशक में ताइवान के रूप में दो और ओलंपिक में भाग लिया।

1970 के दशक तक, अधिक देशों ने ताइवान पर बीजिंग को राजनयिक रूप से मान्यता देना शुरू कर दिया था।

1972 में, ताइवान ने आखिरी बार चीन गणराज्य के रूप में ओलंपिक में भाग लिया।

ताइवान ने 1976 के ओलंपिक का बहिष्कार किया

बाद में चीनी ताइपे के नाम का इस्तेमाल किया गया

1990 के दशक के बाद से, ताइवान एक तानाशाही से एशिया के सबसे प्रगतिशील लोकतंत्रों में से एक में बदल गया है।

साल 2018 में "चीनी ताइपे" को बदला जाना चाहिए या नहीं, इस पर एक जनमत संग्रह हुआ था, जिससे आईओसी और बीजिंग दोनों ने चेतावनी दी थी।

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आपको बता दें कि तोक्यो ओंलपिक के उद्घाटन समारोह के दौरान एक समाचार एंकर ने जब चीनी ताइपे को ताइवान के रूप में घोषित किया तो ताइवान ने ऑनलाइन जापान को धन्यवाद का संदेश लिखा। इसके जवाब में चीन के सरकारी मीडिया टैब्लॉइड ग्लोबल टाइम्स ने जापान को "गंदी राजनीतिक चाल" के लिए फटकार लगाई।